UPBIL/2018/70352

भूखे पेट १० निहत्थे सत्याग्रही अपनी दिल्ली यात्रा के पहले पड़ाव पर  ग़ाज़ीपुर जेल में

भूखे पेट १० निहत्थे सत्याग्रही अपनी दिल्ली यात्रा के पहले पड़ाव पर ग़ाज़ीपुर जेल में

आज जब यह पत्र आपको लिख रहे हैं तब हम नौ सत्याग्रही गाजीपुर जिला जेल के बैरक नंबर दस एक महिला साथी जो पेशे से पत्रकार हैं, महिला बैरक में बंद हैं. यह बिना जाने कि हमारा गुनाह क्या है और जिला प्रशासन हमें कब तक बंद रखेगा, हम सभी सत्याग्रहियों ने अनशन पर जाने का फैसला किया है. हमने 13 फरवरी से अन्न त्याग दिया है.
ज्ञात हो कि हम सभी सत्याग्रही गांधी जी के प्रेम, सद्भावना, भाईचारा सौहार्द के संदेश को लेकर बीती दो फरवरी को चौरी-चौरा (गोरखपुर) से राजघाट (दिल्ली) तक कीनागरिक सत्याग्रह पदयात्रापर निकले थे. हम गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़ और मऊ होते हुए लगभग 200 किमी की यात्रा पूरी कर गाजीपुर पहुंचे थे. गाजीपुर में विरनों थाना क्षेत्र के अंतर्गत सुल्तानपुर चौराहे के पास भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हमें गिरफ्तार कर लिया गया.
देश में सीएए और एनआरसी आन्दोलन के पक्ष-विपक्ष के बीच हिंसा में उत्तर प्रदेश में 23 लोगों की मौत सहित देशभर में सैकड़ों लोग घायल हुए. ऐसे में बतौर नागरिक हमारा कर्तव्य है कि हम उन 23 परिवारों समेत देशभर के सभी प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़े हों. देश समाज में बढ़ रही आपसी नफरत और विभाजनकारी विचारधारा के प्रतिउत्तर में हमें गांधी जी के अहिंसा, प्रेम एवं सौहार्द जैसे मूल्यों को समाज में स्थापित करना है. साथ ही हमें खुद के अंदर के डर अहिंसा को भी चुनौती देना है. हमारा सरकार से यह सवाल भी है कि गांधी के संदेश को लेकर चल रहे दस निहत्थे युवाओं से उसे ऐसा कौन सा खतरा है कि यात्रा के बीच से उन्हें उठाकर जेल में डाल दिया गया.
प्रियेश, नीरज, राज, शेषनारायण, अनंत, अतुल, रवींद्र, मुरारी, मनीष, प्रदीपिका