UPBIL/2018/70352

क्या मुलायम सिंह की चाह में राह का रोड़ा है वर्तमान सपा नेतृत्व ?


समाजवादी पार्टी ने कहा है कि आजम खां पर हो रहे सरकारी अन्यायके खिलाफ पार्टी पहले से ही आंदोलन कर रही है, ऐसे में पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव के आह्वान पर कोई नई मुहिम चलाने की योजना फिलहाल नहीं है. मुलायम सिंह यादव ने कुछ दिन पहले सपा कार्यकर्ताओं से अपील की थी कि आजम खां के खिलाफ हो रहेसरकारी दमनके खिलाफ उन्हें आंदोलन चलाना चाहिए.
तो क्या वर्तमान सपा मुलायम के वर्चस्व की हवा निकालते हुए, आन्दोलन को अपने मनमर्जी से आगे ले जाने की फिराक मे है या एक भाजपा का अप्रत्यक्ष दबाव की कहीं सपा सुप्रिमो पर वर्तमान सरकार का सिकंजा कस जाय इसलिये जिस आन्दोलन का आह्वान मुलायम समय की मांग पर चाहते हैं को सांकेतिक रूप देने की योजना पर विचार हो चुका है। क्या मुलायम सिंह यादव के आह्वान पर पार्टी आजम खां के समर्थन में किसी आंदोलन की तैयारी कर रही है?
 इस सवाल के जवाब में सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा, ‘हमारा आंदोलन तो पहले से ही चल रहा है. पिछली नौ अगस्त को इस मामले पर हर जिले में प्रदर्शन हो चुका है और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव राज्यपाल से मिलकर आजम खां पर हो रही कार्रवाई का विरोध भी जता चुके हैं.’ क्या सपा मुलायम के आह्वान पर आंदोलन को और तेज नहीं करेगी? इस पर राजेंद्र चौधरी ने दोहराया कि हमारा आंदोलन चल रहा है और सपा अध्यक्ष अखिलेश आगामी नौ सितम्बर रामपुर जाकर आजम और उनके परिजनों से मुलाकात करेंगे. अभी कुछ नया करने की बात नहीं है.
सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने तीन सितंबर को प्रेस कांफ्रेंस में कार्यकर्ताओं से रामपुर से पार्टी सांसद आजम खां पर हो रहेसरकारी अन्यायके खिलाफ आंदोलन खड़ा करने की अपील की थी. मुलायम ने कहा था, ‘हम उत्तर प्रदेश के सभी पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील करते हैं कि आजम खां के अपमान और अन्याय के खिलाफ तैयार हो जाएं और पूरे प्रदेश में आंदोलन खड़ा करें. हम खुद उस आंदोलन में आगे खड़े होंगे.’ उन्होंने यह भी कहा था कि वह सपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्यों और अन्य नेताओं से बात करके एक-दो दिन में आंदोलन की तारीख घोषित करेंगे
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1.भीख मांगकर चन्दे से बनायी गयी यूनिवर्सिटी को तबाह करने की कोशिश है ।
2.
सारी ज़िन्दगी की कमाई और मेहनतों से मो0 आज़म खां ने यह यूनिवर्सिटी बनायी है उन्होंने इसकी तामीर के लिए एम0एल00 कोटे से मिले मकान को भी बेच दिया और वह स्वयं आज भी पतली गली के एक छोटे से मकान में रहते हैं।
3.
यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए सैकड़ो बीघा जमीन खरीदने वाला इंसान डेढ़-दो बीघा जमीन की बेईमानी कर ही नहीं सकता मात्र दो बीघा जमीन के लिए 27 गंभीर धाराओं में मुक़दमे दर्ज कर लिए गए वो जमीनें 13 से 15 वर्ष पूर्व खरीदी गई हैं। स्वयं राजस्व निरीक्षक अपनी एफ0 आई0 आर0 में लिखते हैं कि एक गाटा संख्या यूनिवर्सिटी परिसर के बाहर है उसी गाटा संख्या के आधा दर्जन से ज्यादा मुकदमे दर्ज कर लिए गए। सिविल मामलों को आपराधिक मुकदमों में तब्दील कर दिया गया है।
4.
ज़िन्दगी भर गरीबों और मजलूमों के हक की लड़ाई लड़ने वाले मो0 आजम खां कैसे जालिम और गरीब विरोधी हो सकते हैं।

5.
वक्फ की जमीन से कब्जा तात्कालीन जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक द्वारा हटाया गया और वर्षो बाद इसी तारतम्य में लूट, डकैती की रिपोर्ट मो0 आज़म खां, उनके साथियों तथा समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं के विरूद्ध लिखी गयीं।

6.
सरकारी जमीन पर सरकारी आवास बनाने के लिए सरकार द्वारा जिन अवैध कब्जों को हटाया गया वर्षो बाद अवैध कब्जाधारियों की शिकायत पर शासन द्वारा मो0 आजम खां और समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं पर लूट डकैती के झूठे मुकदमे दर्ज किए गये हैं। इस प्रकार मो0 आज़म खां पर लगभग 80 मुकदमे तथा समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं पर हजारों मुकदमें दर्ज किए गए हैं। राजनैतिक प्रतिशोध का ऐसा भयावह रूप मैने अपने पूरे राजनैतिक जीवन में देखा और सुना है राजनीतिक विवाद का यह मतलब होता है कि ऐसा ख्याल भी नहीं आया था। राजनीतिक जीवन में मतभेद तो देखे हंै लेकिन मनभेद की जो डरावनी सूरत बीते 3 माह में रामपुर में देखी है उसकी कल्पना भी नहीं की थी।

7.
मो0 आज़म खां की सगी बूढ़ी 75 वर्षीय बहन को घर के अंदर से जो नमाज पढ़ चुकी थी और भोजन करने के लिए बैठी ही थी कि थाने का दरोगा पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता और अश्लीलता के साथ घसीटते हुए थाने ले जाते हैं तथा थाने में भी अमानवीय बर्ताव करते हुए 10-11 सादे कागजों पर हस्ताक्षर करा लेता है। इस अत्याचार को देखकर जब बूढ़ी महिला की हालत बिगड़ती है तो उन्हें आनन-फानन में गाड़ी में दोबारा डालकर घर पर पटक दिया जाता है जहां से उन्हे अस्पताल ले जाया गया जहां 0सी0जी0 आदि की जांच उपरांत हार्ट अटैक के गंभीर लक्षण पाए गए तथा 3 दिन बाद अस्पताल ने इलाज हेतु किसी बड़े अस्पताल के लिए रिफर कर दिया जहां वो बूढ़ी महिला आज मौत और जिंदगी की जंग लड़ रही है। उनका गुनाह बस यह है कि वो मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की कोषाध्यक्ष हैं और उससे भी बड़ा गुनाह यह है कि वो मो0 आज़म खान की सगी बहन हैं।

8.
इस समय रामपुर देश का सबसे चर्चित जिला है और इस समय मो0 आज़म खां के चरित्र हनन की कोई कोशिश इसलिए भी नहीं छोड़ी जा रही चूकि उनका पूरा जीवन सादगी और ईमानदारी का प्रतीक है। संतोष इस बात का है कि यह सारे आरोप शिक्षा के मंदिरों को बनाने के लिए लगे हैं और सरकारें इन मंदिरों को मिटाना चाहती हैं परन्तु ऐसा नहीं होगा जीत न्याय की होगी।
 फ़िलहाल सपा के संघर्ष का समय है और मुलायम इस स्थिति को अच्छीतरह भांप गए है] लेकिन वर्तमान सपा नेतृत्व इस स्थिति को कितना गभीरता से लेता है यह समय के गर्त में छुपा है। 





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