UPBIL/2018/70352

उत्तर प्रदेश में बिजली महँगी , कांग्रेस हमलावर


Sanjey Singh
प्रियंका गांधी का यह बयान उत्तर प्रदेश सरकार के उस फैसले के बाद आया है जिसके तहत बिजली की दरों में 12 फीसदी तक की बढ़ोतरी की गई है. इसे लेकर विपक्ष योगी सरकार पर हमलावर है. बसपा प्रमुख मायावती ने भी इसकी आलोचना की है.
·         योगी सरकार में दूसरी बार बढ़ा बिजली का रेट
·         आर्थिक संकट से जूझते किसानों पर पड़ेगी मार
·         कृषि उपभोक्ताओं का भी बढ़ा बिजली का रेट
उत्तर प्रदेश में महंगी हुई बिजली की मार किसानों पर कुछ ज्यादा ही पड़ेगी. वजह है कि एक तो उन्हें समय-समय पर फसल की खराबी से आर्थिक नुकसान सहना पड़ता है और अब उन्हें महंगी बिजली खरीदनी पड़ेगी. राज्य में तमाम किसान महंगे डीजल की वजह से बिजली से पंप सेट चलाकर सिंचाई करना पसंद करते हैं. मगर योगी सरकार की ओर से ट्यूबवेल और पंप सेट के बिजली चार्जेज भी बढ़ा दिए हैं.
नए रेट के मुताबिक, मौजूदा समय में निजी ट्यूबवेल पंप सेट की 150 रुपये प्रति बीएचपी की दर को बढ़ाकर 170 रुपये कर दिया गया है. इसी तरह मिनिमम चार्जेज को भी 150 से 160 कर दिया गया है. वहीं ग्रामीण कृषि उपभोक्ताओं को अब 15 प्रतिशत अधिक बिल देना पड़ेगा. अब 50 रुपये का नया लगने वाला फिक्स चार्ज भी देना पड़ेगा.
दूसरी बार महंगी हुई बिजली
उत्तर प्रदेश में दूसरी बार बिजली महंगी हुई है. वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार ने निकाय चुनाव के बद 12.73 प्रतिशत दाम बढ़ाने का फैसला किया था. अब फिर फिर आठ से 12 प्रतिशत बिजली बढ़ोत्तरी का करंट जनता को लगा है. नई दरों के मुताबिक दो किलोवाट कनेक्शन वाले उपभोक्ता अगर दो सौ यूनिट बिजली का उपयोग करते हैं तो उन्हें हर महीने 101 रुपये ज्यादा खर्च देने होंगे. शहरी इलाके की बिजली दरें 12 प्रतिशत तक बढ़ाई गईं हैं.

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