UPBIL/2018/70352

किसानों को इस मंहगाई के समय 17 रूपये प्रतिदिन नाकाफी है:राजबब्बर


क्षितिजकान्त;लखनऊ  
राजबब्बरसांसद, उत्तर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में जनपद आगराफिरोजाबाद एवं फतेहपुर सीकरी से विभिन्न राजनीतिक दलों को छोड़कर आये सैंकड़ों नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कराने के एक कार्यक्रम के दौरान सम्बोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से आम आदमी के साथ खड़ी रहने वाली और उनके हितों के लिए कार्य करने वाली पार्टी रही हैयही कारण है कि देश और प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद जब सारे लेागों ने यथास्थिति मानकर खामोशी ओढ़ ली तब कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधी जी निरन्तर जनता के मुद्दों पर किसानोंयुवाओंछात्रोंव्यापारियों आदि के लिए संघर्ष करते रहे। 
उन्होंने आगे कहा जिन राज्यों में हमारी कामयाबी में कांग्रेस की सरकार सत्ता में आयी, हमने तत्काल किसानों की कर्जमाफी सरकार बनते ही किया। 
राजस्थान में देश की अनूठी योजना जिसमें हर उस युवा को जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं या रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं उन्हें 3500 रूपये मानदेय देने की शुरूआत की गयी है।
छत्तीसगढ़ में किसान कर्जमाफी तथा 2500 रूपये प्रति कुंतल धान खरीद शुरूआत के बाद वहां के किसानों द्वारा श्री राहुल गांधी जी का आभार सम्मान किया गया। श्री गांधी ने केन्द्र में कांग्रेस की सरकार बनने पर देश के हर जरूरतमंद को न्यूनतम आय गारंटी योजना के तहत मानदेय सुनिश्चित करने की बात कही है। 
राजबब्बर ने कल केन्द्रीय बजट की घोषणा जिसमें किसानों को दो-दो हजार रूपये तीन किश्त में हजार रूपये प्रतिवर्ष की धनराशि दिये जाने को भारत के किसानों का अपमान बताया है उन्होने कहा कि आज के इस मंहगाई के समय 17 रूपये प्रतिदिन लगभग सौ रूपये प्रतिमाह जो कि बहुत ही नाकाफी है.  
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अगर सरकार की नीयत साफ होती तो सबसे पहले किसानों के ऊपर लदे लागत के बोझ को कम करती। जैसे ट्रैक्टर सहित सभी कृषि यंत्रों एवं कीटनाशक दवाओं को जी.एस.टी. से मुक्त करनाडी.ए.पी.पोटाश एवं यूरिया के दामों में हुई भारी बढ़ोत्तरी को कम करना और किसानों द्वारा उत्पादित सभी फसलों की सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाना सुनिश्चित करना आदि शामिल हैलेकिन सरकार ने लागत कम करने और कर्ज माफ करने के बजाय भीख देने का फैसला किया। यह हमारे अन्नदाता का अपमान नहीं तो और क्या हैहमारे अन्नदाता को उसका अधिकार चाहिए भीख नहीं। 
इसी प्रकार मध्यम वर्ग को रियायत के नाम पर जो टैक्स में छूट दी गयी वह भी नाकाफी है। जुमलों से शुरू हुई सरकार जुमलों पर आकर समाप्त हो रही है क्योंकि यह सारी घोषणाएं आने वाली सरकार को पूरा करना है। अच्छा होता जो यह घोषणाएं उन्होने की हैं उसे पिछले बजट सत्र 2018  में घोषित करते तो शायद कुछ लाभ भी मिलता। 
पांच साल तो जनता पीड़ा में और मंहगाई की मार से परेशान रहीबेरोजगार युवा रोजगार के लिए और किसान अपने अधिकार के लिए संघर्ष करता रहा। 
अब मोदी सरकार जाते-जाते लोकलुभावन घोषणाएं करके जनता को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है लेकिन कल ही किसानों ने पीएमओ पर विरोध मार्च करके अपनी नाराजगी जताई है। 


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