UPBIL/2018/70352

अफ़सोस हम न होंगे नाटक का लखनऊ में मंचन


अफ़सोस हम ना होंगे के लेखक रणवीर सिंह ने अपनी इस कहानी में दाम्पत्य जीवन में वहम को लेकर कुछ इस अंदाज़ में दर्शाया है जो जीवन का सत्य है की अगर किसी व्यक्ति के मन में अपनी बिमारी को लेकर शक पैदा हो जाये और उसे ये महसूस होने लगे की उसकी मत्यु करीब है तो उसके जीवन में उथल पुथल मच जाती है और वो अपने जीवन में होते उथल पुथल को ज़िन्दगी और मौत के बीच अपने दाम्पत्य जीवन में परिवार के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाने का प्रयास करते कहना और दुसरो को इसका एहसास न होने देना अपने कर्त्तव्य का निर्वाह करते रहना बताना मक़सद है इस कहानी दाम्पत्य जीवन के सुखद सम्बन्धो में जब वहम की दरार पड़ जाये तो व्यंग और हास्य के सेतु से उसके मधुर फूल कगारों को फिर से पंहुचा जा सकता है इस कहानी के नायक और नायिका के बीच कुछ ऐसा ही देखने को मिला है 
निर्देशकीय उवाच  
निर्देशक मै मोहम्मद फुज़ैल से आप सभी भलिभांति परिचित हैं मेरे द्वारा निर्देशित नाटक समय समय पर मंचन किये जाते रहे है मुझे आगे बढ़ने में आप सभी का आपार स्नेह वा सहयोग रहा है आप लोगो के स्नेह ने ही एक बार फिर इस नाटक अफ़सोस हम ना होंगे का निर्देशन करने के लिए प्रेरित किया है आशा है की एक बार फिर इस हास्य नाटक के द्वारा मनोरंजन पूर्ण रूप से सफल रहा  इस नाटक के माध्यम से दाम्पत्य जीवन में होने वाली किसी भी व्यक्ति के मन शक की विपरीत परिस्थितियों का दर्शन कराया गया है और इसी परिस्थितियों को हास्य रूप से पिरोकर आप लोगो के मनोरंजन की भरपूर चेष्टा की है आपके सहयोग एवं आशीर्वाद का आशा के साथ 

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