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कांग्रेसजनों का लखनऊ मे ‘कैंडिल मार्च’;सरकार महिला की सुरक्षा मे विफल: कांग्रेस



सुचित बाजपेई; लखनऊ 
उन्नाव(उ0प्र0) में महिला के साथ हुए बलात्कार एवं पुलिस कस्टडी में पीडि़ता के पिता की हत्या, कठुआ (जम्मू-कश्मीर) में नाबालिग बालिका के साथ बलात्कार एवं हत्या के साथ ही पूरे देश, प्रदेश में महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार, उत्पीड़न के विरोध में उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री राजबब्बर जी सांसद के निर्देश पर आज वीवीआईपी गेस्ट हाउस के सामने से गांधी प्रतिमा(जीपीओ पार्क) हजरतगंज लखनऊ तक कांग्रेसजनों द्वारा कैंडिल मार्चनिकाला गया एवं शोक संवेदना व्यक्त करते हुए दो मिनट मौन रहकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। इसके साथ ही दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करने हेतु उ0प्र0 सरकार एवं जम्मू-कश्मीर की सरकार को सद्बुद्धि प्रदान करने हेतु ईश्वर से प्रार्थना की गयी। 
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता कृष्णकान्त पाण्डेय ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधी जी के आवाहन पर पूरे देश में आज कैंडिल मार्च निकाला गया जिसके क्रम में प्रदेश मुख्यालय लखनऊ सहित उ0प्र0 के सभी जनपदों में कैंडिल मार्च निकालकर पीडि़त परिवारों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की गयीं।  
देश और प्रदेश की भाजपा सरकार महिलाओं की सुरक्षा करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली भारतीय जनता पार्टी से आम जनता अब पूछ रही है कि बेटियां बचेंगीं तभी तो पढ़ेंगी। लोग अपनी बेटियां छिपाने में लग गये हैं। महिला सुरक्षा और सुशासन का ढोंग रचने वाली भाजपा सरकार को मा0 उच्च न्यायालय को कार्यवाही करने के लिए निर्देशित करना पड़ रहा है यह किसी भी चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार के लिए बेहद शर्मनाक स्थिति है।
प्रदेश में कांग्रेस के प्रदर्शन एवं कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधी जी के कैंडिल मार्च से प्रदेश सरकार दबाव में कार्यवाही के लिए बाध्य हुई है। हमेशा से जनहित सरोकार के मुद्दे पर कांग्रेस अग्रिम भूमिका में रही है आगे भी रहेगी। 

 क्या है  मामला 

देश में उन्नाव रेप केस के अलावा जम्मू-कश्मीर के कठुआ में एक आठ साल की बच्ची से गैंगरेप और उसकी बेरहमी से हत्या का मामला भी सुर्खियों में बना हुआ है. कठुआ के इस मामले में पुलिस की चार्जशीट के हवाले से जो रिपोर्टें आ रही हैं उनमें बच्ची से बरती गई क्रूरता का पता चलता है. मीडिया  दस अनुसार के मुताबिक चार्जशीट में बताया गया है कि बच्ची को एक मंदिर में कैद करके रखा गया था. इस दौरान उसे शांत रखने के लिए कई बार नशीली दवाएं दी गईं और फिर उसका बार-बार रेप किया गया.
आसिफा नाम की यह बच्ची बकरवाल समुदाय से थी. यह एक खानाबदोश मुस्लिम समुदाय है. इस साल 10 जनवरी को जम्मू के कठुआ जिले से आसिफा का अपहरण किया गया था. उस समय वो घर के नजदीक घोड़ों को चरा रही थी. जम्मू-कश्मीर पुलिस और क्राइम ब्रांच की तरफ से दायर चार्जशीट के मुताबिक राजस्व विभाग के एक रिटायर्ड अधिकारी संजी राम ने इस अपराध की योजना बनाई थी. रिपोर्ट के मुताबिक बकरवाल समुदाय को डराने के लिए संजी राम ने यह योजना बनाई थी ताकि वे रासाना गांव छोड़कर चले जाएं. इस काम में उसने अपने भतीजे, जो स्कूल ड्रॉप आउट है, को भी शामिल किया था.

इस मामले में अभी तक आठ लोगों को आरोपित बनाया गया है. इनमें संजी राम, उसका भतीजा, बेटा विशाल जंगोत्रा, भतीजे का एक दोस्त, एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर, एक हेड कॉन्स्टेबल और दो विशेष पुलिस अधिकारी शामिल हैं. आरोपित भतीजे को पहले नाबालिग बताया गया था, हालांकि डीएनए टेस्ट में उसकी उम्र 19 साल पता चली है. चार्जशीट में उस पर आरोप है कि उसी ने संजी राम के बेटे विशाल जंगोत्रा को फोन करके पूछा था कि अगर वह अपनी हवस पूरी करना चाहता है तो कठुआ आ जाए. विशाल उस समय मेरठ में था. वहीं, पुलिस वालों पर आरोप है कि उन्होंने इस अपराध के सबूत मिटाने की कोशिश की और पूरे मामले को दबाने के बदले आरोपितों से रिश्वत ली.
चार्जशीट के मुताबिक जिस मंदिर में बच्ची को छुपाया गया उसका नाम देवस्थान है. संजी राम इस मंदिर का संचालक है. मंदिर में लाने के बाद बच्ची को लगातार नशीली दवाएं दी गईं और गैंगरेप किया गया. चार्जशीट में बताया गया है कि आरोपित भतीजे द्वारा गला दबाकर बच्ची को मारने से पहले उसे 14 जनवरी को मंदिर में रखा गया था. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि एक और आरोपित ने कहा था कि वह भी बच्ची से रेप करना चाहता है. 17 जनवरी को आसिफा का शव देवस्थान से काफी दूर जंगल में मिला था.
चार्जशीट में एक बात साफ तौर पर कही गई है कि जांच में आगे जो भी नतीजा निकले, यह तय है कि यह अपराध इन्हीं आठ लोगों ने किया है. इसमें यह भी बताया गया है कि फॉरेन्सिक विशेषज्ञों और प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के साथ मिलकर जांचकर्ताओं ने घटनास्थल का दौरा किया था. उन्होंने देवस्थान समेत घटना से जुड़ी जगहों का निरीक्षण किया था. इस दौरान उन्हें लकड़ी के डंडों पर खून के निशान और बाल मिले थे. कुछ बाल देवस्थान और उस जंगल से बरामद हुए जहां बच्ची का शव फेंक दिया गया था. बाद में उन्हें डीएनए टेस्ट के लिए नई दिल्ली भेज दिया गया. उनमें से एक नमूना आसिफा के डीएनए से मेल खाता है.
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