UPBIL04881

रघुराम राजन ‘सख्त’ थे, तो मौजूदा गवर्नर उनसे अलग कैसे हैं?

अपनी सख्त मौद्रिक नीति से महंगाई थामने की भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की कोशिश लगातार रंग दिखा रही है. पिछले हफ्ते घोषित आंकड़ों के अनुसार सितंबर में खुदरा महंगाई दर को बताने वाले सूचकांक यानी सीपीआई में केवल 3.28 फीसदी की वृद्धि हुई. इससे वित्त वर्ष 2017-18 की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) में खुदरा महंगाई की औसत दर केवल 2.6 फीसदी रही. यह खुदरा महंगाई पर आरबीआई के अनुमान (दो से 3.5 फीसदी) की अधिकतम सीमा से करीब एक फीसदी कम है.
इसके पीछे  का अतीत देखे तो सख्त गवर्नर की छवि वाले रघुराम राजन ने जनवरी 2015 से अप्रैल 2016 के बीच केवल 15 महीनों में इन दरों में क्रमश: 1.5 और एक फीसदी की कमी की थी. 
यह हैरान करने वाली बात है कि जो आलोचक राजन की मौद्रिक नीति की आलोचना करते नहीं थकते थे, उनकी निगाह से उर्जित पटेल की नीति पर कैसे अभीतक परीक्षण नहीं हुआ है? विचारणीय विषय है. 

कई आलोचक इसका श्रेय आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल की सख्तमौद्रिक नीति को दे रहे हैं. लेकिन यह उन्हें गवर्नर बनाए जाते वक्त (सितंबर 2016) उनसे लगाई गई उम्मीदों के विपरीत है. तब सरकार को उनसे उम्मीद थी कि वे मौद्रिक नीति को नरम करेंगे जिससे सस्ती दर पर कर्ज मिल सके. लेकिन पिछले तेरह महीनों में उन्होंने रेपो और रिवर्स रेपो दरों में केवल आधा और चौथाई फीसदी की कमी की है.

Share this

Related Posts

Previous
Next Post »