UPBIL/2018/70352

सनातन आश्रम में ३ दिवसीय पत्रकार-संपादक अधिवेशन का समापन

इस सप्ताह 

विगत 70 वर्षों में समाचारपत्रों एवं अन्य प्रसारमाध्यमों के माध्यम से हिन्दुत्व के विरोध में बडा षडयंत्र रचा गया। हमारे लिए उसके जड़ तक जाना अत्यंत आवश्यक है ! शिक्षा व्यवस्था एवं समाचारपत्रों के माध्यम से अयोग्यकृत्यों को योग्यदिखाया गया। हिन्दू समाज शक्ति वीरता, सदाचार, एवं त्याग में अग्रसर होते हुए भी वर्तमान स्थिति में बौद्धिक स्तर पर हिन्दू असफल सिद्ध हुए हैं ! अतः विद्यालयों में भगवद्गीता के कुछ श्‍लोक सिखाने जैसे उपरी प्रयास करते समय ही विविध स्थानों पर उच्चविद्या केंद्रों की स्थापना होनी चाहिए। पत्रकारों को भी विद्या की साधना कर समाज के सामने सच्चाई रखनी चाहिए। भारत सरकार के पूर्व सांस्कृतिक सलाहकार तथा भोपाल स्थित धर्मपाल शोधपीठ के संस्थापक प्रा. रामेश्‍वर मिश्र ने ऐसा प्रतिपादित किया। पत्रकार-संपादक प्रथम अधिवेशनके समापन सत्र में वे ऐसा बोल रहे थे।
यहां के सनातन आश्रम में ३ दिवसीय पत्रकार-संपादक अधिवेशन का समापन हुआ। इस अवसर पर व्यासपीठपर हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे एवं समिति के महाराष्ट्र प्रवक्ता श्री. अरविंद पानसरे उपस्थित थे। अधिवेशन के समापन के समय अधिवेशन में सहभागी पत्रकार एवं संपादकों ने अपने अनुभवों का कथन किया।
प्रा. मिश्र ने आगे कहा कि, भारत में हिन्दुओं के विरोध में जाने का किसी में साहस न हो; इसके लिए जो सत्ता में हैं, उन पर पत्रकारों को दबाव रखना चाहिए ! हिन्दुत्व व्यापक है; इसलिए हिन्दुत्व का कार्य करनेवाले सभी संघटनों को संघटित रूप से विविध क्षेत्रों में कार्य करते रहना चाहिए !
श्री. अरविंद पानसरे ने कहा कि, इस पत्रकार-संपादक अधिवेशन के माध्यम से हिन्दुत्वनिष्ठ पत्रकारिता को एक व्यापक स्वरूप प्राप्त हो रहा है। अधिवेशन में उपस्थित पत्रकारों की संघटितता से यह ध्यान में आता है कि, इसके आगे पत्रकारों का हिन्दुत्व का कार्य किसी क्षेत्र तक सीमित न रहते हुए, उसकी व्यापकता बढेगी ! इस माध्यम से सभी को संघटित रूप से हिन्दुत्व का कार्य करने का अवसर मिला है !
हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, वास्तव में जो घटित है, उसको समाज के सामने न रखते हुए समाचारपत्र के स्वामी को जो अपेक्षित है, उसको समाचारपत्र में रखा जाता है, यही वर्तमान पत्रकारिता की दुःस्थिति है !
महाभारत के समय जब धृतराष्ट्र के पुत्र मारे जा रहे थे, तब भी संजय ने धृतराष्ट्र तक उसका सत्य समाचार पहुंचाया। हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हेतु पत्रकारों को भी संजय की भांति सत्यनिष्ठ रहना चाहिए। ऐसा करने से ही सत्ता एवं समाज जागृत होंगे ! पत्रकारों ने वैचारिक स्तर के क्षत्रिय बन कर हिन्दूविरोधी विचारों के विरोध में लडना आवश्यक है !

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