UPBIL/2018/70352

कविता इस सप्ताह

                    
                    हृदय का रि-मिक्स

कवि आज के आधुनिक युग मे हिन्दी भाषी लोगो की बातचीत हिन्दी-अंग्रेजी रि-मिक्स सुनकर अपनी व्यथा को उजागर करने की कोशिश करता है किन्तु उसकी 
यह पीड़ा शुद्ध शब्दावली के प्रयोग परजिस उम्र को सम्बोधित करता है उन्हे समझ मे आयेके कारण बचने की कोशिश कर रहा है

आयुष पाण्डेय, लखनऊ

हिरदय बस गयो जबसे हमरे, तुम्हरा सुन्दर फेस।
शान्ति से हुई गा युद्ध, औरू जीवन मा मचा कलेश।।
तुम हिरणी जैसी आकर मन में, किया बहुत उत्पात।
स्थिति हमरी हुई गयी वैसी, जैसे देश में हो आपात।।
इससे पहले मन हमरा था, जस ताल में होवै जल।
तुम आ गिरी पाथर सी इसमें, कर दी मन में हलचल।।
करती हो घायल बातन से, स्माइल ऐसी जस होवै तेज कटार।
छलनी हुई गा हिरदय हमरा, खोपड़ी मा खूब मचा हाहाकार।।
बंद करौ खेल यो आपन, हमका दो कुछ रिलैक्स।
जान आ गयी आफत मा हमरी, टेंशन हो गयी मैक्स।।
अब आ गये हो दिल के भीतर, बंद कर लो इसका डोर।
ना आई कोई अब अंदर, हम सबका कर देब इग्नोर।।
बादल सी बन छा जाओ, जीवन मा भर दो सातो रंग।
हम बन जाई मांझा तुम्हरा तुम छुओ गगन बन पतंग।। 

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