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पोक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश सस्पेंड; जमानत देने में की गई जल्दबाजी: हाईकोर्ट


समाजवादी  सरकार के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को जमानत देने का निर्णय रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने जमानत देने वाले पोक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश ओमप्रकाश मिश्रा को सस्पेंड कर दिया है।
गायत्री प्रजापती पर कई संगीन जुर्म के कारण गिरफ्तार हुए थे वह भी सुप्रिमकोर्ट के आदेश के बादA
इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल डीके सिंह ने ओमप्रकाश मिश्रा के निलंबन की पुष्टि की। मिश्रा के खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिए हैं। यह जांच हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुधीर अग्रवाल करेंगे। जांच 30 अप्रैल तक पूरी होगी। मालूम हो की ओम प्रकाश मिश्र 30 अप्रैल को रिटायर होने वाले हैं।

इससे पहले गायत्री को मिली जमानत के खिलाफ सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दिलीप बाबासाहेब भोसले ने ओमप्रकाश मिश्रा के खिलाफ सख्त टिप्पणियां की थी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि गायत्री के मामले में खुद सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी हुई। 
जांच के दौरान एक बेहद गंभीर मामले में आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश जल्दबाजी में दिया गया निर्णय है। पुलिस और सरकारी वकील को अपना पक्ष रखने का मौका भी नहीं मिल सका।

हाईकोर्ट के निर्णय और जमानत देने में की गई जल्दबाजी को देखते हुए मिश्रा को निलंबित किया गया।सरकारी वकील ने केस डायरी और रिकार्ड्स के बहुत ज्यादा होने की वजह से तीन दिन का समय मांगा था, लेकिन इसे दरकिनार करते हुए जमानत दे दी गयी। चीफ जस्टिस ने कहा, सरकारी वकील के प्रार्थना पत्र पर जज ने कुछ नहीं किया और गायत्री की अर्जी पर सुनवाई करते हुए बेल दे दी। 

जस्टिस भोसले ने कहा जज ने आरोपों की प्रकृति को दरकिनार करते हुए जल्दबाजी में आरोपी को जमानत दे दी। वे यह भी भूल गए की आरोपी पर एफआईआर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई थी। एक ऐसे जज जो 30 अप्रैल को रिटायर होने जा रहे हैं, उनका जमानत देने के पीछे उद्देश्य क्या था, ये मेरे लिए चिंता की बात है।

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