UPBIL/2018/70352

कागज के फूल - ये दुनियां जहां आदमी की कोई कीमत नही है

उत्तर प्रदेश के सूचना विभाग मे पिछले पाँच सालों में जो ऐतिहासिक घोटाले पूर्व प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल की संरक्षण में हुए है ऐसा इतिहास शायद ही कभी दोहराया जा सके पूर्व सरकार ने जनता के साथ किया ये सारे घोटालो को संगठित तरीके से। जनता का धन, खबरें’ दबाने के लिए बेतरतीब फर्जी पत्रकारो और बेईमान पत्रकारो पर उडायाः फिर भी जो नही माने उन्हे धौसियाया गया पिछले पाँच सालों मे 3000 करोड़ का बजट इस बंदर बाँट मे चला गया जिसमें (सूचना विभाग में 40से 60 प्रतिशत कमीशन की’ ’दर पर विज्ञापन बाँटे जाते है )लगभग 1500 करोड़ रुपए तो निश्चित तौर पर सूचना विभाग के अफसरों की जेबों में ही गया है।
एक पत्रकार जो एक अंग्रेजी साप्ताहिक अखबार का चलाता हैः इसके खर्चे को ट्यूशन पढ़ाकर वहन करता है। इसके अनुसार सूचीब़द्धता के लिये एक मुश्त पैसा न दे पाने के कारण बिना कारण ही अकारण प्रकरण को प्रक्रिया की पेंचीदगी मे फंसाया गया। आजतक 2015 से सूचीब़द्धता नही हुई। एक विज्ञापन की बूंद भी इस आखबार के लिये भूल से भी नही टपकी। सूचना विभाग के कई चक्कर लगा चुका है। इस भ्रष्टतंत्र मे कैसे प्रधानमंत्री स्किल इण्डिया का स्वप्न साकार होगा - मात्र एक मृगतृष्णा है। इस संबंध मे तत्कालीन मुख्यमंत्री के शिकायत पोर्टल पर अपनी बात कही गई किन्तु यह शक्तिशाली बहुसंख्यक है एवं सत्ता के नजदीक रहने वाले हैं एवं निर्णय की आख्या देते हैः ऐसे मे कहां बाहर की बात की पैरवी होगीं।
कहानी सत्य है किन्तु भरतेन्दु हरिश्चन्द की कहानी के शीर्षक अंधेर नगरी एक हिस्सा तो पिछली सरकार के अधीन व्यवस्था को चरितार्थ करती है।

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