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मध्यप्रदेश सरकार गैर कानूनी तरीके से हेलमेट पहननें पर 250 रुपये फ़िर 500 रुपयेउगाही कर रही है



पुलिस का चैकिंग अभियान, अधिकार एवं सच्चाई’ ’मोटरयान अधिनियम 1988 में हेलमेट न पहनने के लिए कोई दण्ड का प्रावधान नही है।परंतु मोटरयान अधिनियम की धारा 129 लोगों से अपेक्षा करती है कि वे हेलमेट पहनें। अब जब कोई दण्ड नही है तो फिर दण्ड धारा 177 के तहत किया जा सकता है। जिसमें पहली बार उल्लंघन करने पर अधिकतम 100 रुपये एवं उसके बाद पुनः उल्लंधन करते पाये जाने पर अधिकतम 300 रुपये का प्रावधान है। परंतु मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने अपने चिर परिचित अंदाज में मध्यप्रदेश की जनता का अधिकतम तेल निकालने के उद्देश्य से पूरी तरह से गैर कानूनी तरीके से पहली बार में 250 रुपये व उसके बाद 500 रुपये उगाही कर रही है। मोटरयान अधिनियम की धारा 130 में लायसेंस छोड़कर कोई भी अन्य दस्तावेज चेक करने का अधिकार पुलिस को नही है, परंतु मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए पुलिस सभी दस्तावेज चेक कर रही है। अब जब पुलिस वाले मोटरयान अधिनियम का उल्लंघन करते हुए दस्तावेज चेक करते हैं तो वह भी धारा 177 के तहत अपराध है। वहीं यह किंचित परिस्थितियों में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 166 के तहत भी अपराध है। साधारण परिस्थिति में पुलिस का उप अधीक्षक स्तर का अधिकार व यातायात का सब इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी ही चैकिंग कर सकता है ऐसा मध्यप्रदेश सरकार का धारा 200 के तहत प्रकाशित राजपत्र कहता है। पुलिस को जुर्माना देना जरुरी नही है। पुलिस का अधिकार शमन शुल्क, समझौता शुल्क प्राप्त करने का अधिकार है। अगर आप जुर्माना नही भरना चाहते तो आप पुलिस ने न्यायालय में आपका प्रकरण सौंपने को कह सकते हैं। पुलिस आपको जुर्माना भरने के लिए कानूनी तौर पर विवश नही कर सकती। इस संबंध में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय कि डिविजन बैंच के स्पष्ट निर्देश हैं।


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