UPBIL/2018/70352

चिकित्सक परामर्श निःशुल्क एवं दवाईया निःशुल्क वितरित की गईं


धनवन्तरि चिकित्सा केन्द्र का उद्घाटन पूर्व न्ययाधीश उच्च न्यायालय श्री रघुनाथ किशोर रस्तोगी द्वारा पं0 हरीकुमार शर्मा की स्मृति मे स्थान शर्मा फ्लोर मिल ऐशबाग लखनऊ मे किया गया। इसके उदघाटन समारोह के अवसर पर केजीएमयू के कुलपति एम0एल0बी0 भटट एवं अन्य के0जी0एम0यू0 के चिकित्सक, बलरामपुर एवं राममनोहर लोहिया चिकित्सालय के विभिन्न चिकित्सक उपस्थित थें। क्षेत्रीय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री बृजेशपाठक भी उपस्थित थे। यह व्यस्था पूर्णतयः जनसेवा से जुड़ी थी जिसे आरएसएस के प्रचारक श्री अवघेश जी, श्री फूलचन्दजी, श्री दुर्गाशंकर बाजपेई एवं कुमारी ज्योती ि़त्रपाठी तथा अन्य संघ के सहयोगी द्वारा आयोजित किया गया।


क्षेत्र मे सम्पन्न आबादी के साथ-साथ  विशेषकर अभाव एवं आर्थिक विपन्न बहुल्य लोग है इस कार्यक्रम मे स्थानीय लोगो को एक दिवसीय चिकित्सा शिविर की सुविधा प्रदान की गई।
चिकित्सक परामर्श निःशुल्क एवं दवाईया निःशुल्क वितरित की गईं। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगो तक चिकित्सा का लाभ आसानी से पहुंचाया जा सके। 

पोक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश सस्पेंड; जमानत देने में की गई जल्दबाजी: हाईकोर्ट


समाजवादी  सरकार के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को जमानत देने का निर्णय रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने जमानत देने वाले पोक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश ओमप्रकाश मिश्रा को सस्पेंड कर दिया है।
गायत्री प्रजापती पर कई संगीन जुर्म के कारण गिरफ्तार हुए थे वह भी सुप्रिमकोर्ट के आदेश के बादA
इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल डीके सिंह ने ओमप्रकाश मिश्रा के निलंबन की पुष्टि की। मिश्रा के खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिए हैं। यह जांच हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुधीर अग्रवाल करेंगे। जांच 30 अप्रैल तक पूरी होगी। मालूम हो की ओम प्रकाश मिश्र 30 अप्रैल को रिटायर होने वाले हैं।

इससे पहले गायत्री को मिली जमानत के खिलाफ सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दिलीप बाबासाहेब भोसले ने ओमप्रकाश मिश्रा के खिलाफ सख्त टिप्पणियां की थी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि गायत्री के मामले में खुद सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी हुई। 
जांच के दौरान एक बेहद गंभीर मामले में आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश जल्दबाजी में दिया गया निर्णय है। पुलिस और सरकारी वकील को अपना पक्ष रखने का मौका भी नहीं मिल सका।

हाईकोर्ट के निर्णय और जमानत देने में की गई जल्दबाजी को देखते हुए मिश्रा को निलंबित किया गया।सरकारी वकील ने केस डायरी और रिकार्ड्स के बहुत ज्यादा होने की वजह से तीन दिन का समय मांगा था, लेकिन इसे दरकिनार करते हुए जमानत दे दी गयी। चीफ जस्टिस ने कहा, सरकारी वकील के प्रार्थना पत्र पर जज ने कुछ नहीं किया और गायत्री की अर्जी पर सुनवाई करते हुए बेल दे दी। 

जस्टिस भोसले ने कहा जज ने आरोपों की प्रकृति को दरकिनार करते हुए जल्दबाजी में आरोपी को जमानत दे दी। वे यह भी भूल गए की आरोपी पर एफआईआर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई थी। एक ऐसे जज जो 30 अप्रैल को रिटायर होने जा रहे हैं, उनका जमानत देने के पीछे उद्देश्य क्या था, ये मेरे लिए चिंता की बात है।

लम्बे समय से पेट्रोल घटतौली कर लूट;लोगो के लगे चूने का अन्दाजा लगाना मुश्किल

सुचित बाजपेई, लखनऊ 
क्या लखनऊ का प्रशासन सील किये गये पेट्रोल पंप मालिको से भविष्य मे इसका लाईसेन्स व अधिकार छीन पायेगी? या जुर्माना का दण्ड लेकर पुनः इसे बहाल कर देगी। हो कुछ भी जिन लोगो ने इस लूट को लम्बे समय से कर रहे थे की रोकथाम के लिये इससे पूर्व प्रशासन द्वारा क्यों नही लगाम कसी गई? जबकि यह एक दैनिक प्रक्रिया है यह सही है कि प्रशासनिक अमले को सरकार उनके काम के लिये प्रतिमाह एक मोटी रकम के रूप मे वेतन देती है फिर भी पब्लिक का चूना लगता रहा और प्रशासन देर से जागा।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ मे पेट्रोल चोरी मामले पर बड़ी कार्रवाई करते हुए यूपी एसटीएफ ने शुक्रवार शाम को 23 लोगों  को गिरफ्तार किया है जबकि सात के लाइसेंस सस्पेंड किए गए हैं।
 गौरतलब है कि बृहस्पतिवार रात को एसटीएफ जिला प्रशासन व पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में सात पेट्रोल पंपों पर रेड मारी गई थी जिसमें चिप लगाकर पेट्रोल चोरी की बातें सामने आई थी।
 मामले पर तत्काल कार्रवाई करते हुए सात पेट्रोल पंपों को सील कर दिया गया था। इसी मामले में शुक्रवार को गिरफ्तारी हुई हैं।
कार्रवाई के दौरान वितरण में इस्तेमाल होने वाली डिस्पेंसर यूनिट और फ्यूल टैंक में डिवाइस लगाकर प्रति लीटर 25 से 50 मिलीलीटर पेट्रोल-डीजल की चोरी होते मिली थी।

इस प्रकार लोगो का कितना चूना लगा अन्दाजा लगाना मुश्किल है क्योंकि इस चोरी से लूट मे तब्दीली कों पेट्रोल घोटाले की श्रेणी मे डाला जाना चाहिए। क्या प्रशासन द्वारा की गई इस कार्यवाई की पैरवी भी इतनी मुश्तैदी से की जायेगी यह समय के गर्त मे है
   

पुलिस कस्टडी मे मौत, चार आरोपी जेल में बंद; चार लोगों को बेकसूर मानने वाले मृतक के परिजन की मौत

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बाहरी इलाके मे एक पुलिस कस्टडी मे मौत का मामला प्रकाश मे आया है। इस मौत के राज को छुपाने के लिये लखनऊ पुलिस मृतक के परिजनो का कोपभाजन करने पर आमादा है। मामला कुछ इस प्रकार है।
कय्यूम, अकील, इरफान, एवं बबलू सभी जेल में बंद लोगों के परिजनों और पड़ोसियों के मुताबिक़ 6-7 अप्रैल की रात कोई सवा बजे इंदिरा नगर के दायरे में शामिल हो चुके चांदन गांव के सुनसान कोने में स्थित कय्यूम के घर चोर घुसा था. आहट से घरवालों की नींद टूट गयी, शोर से पड़ोसी भी जाग गये और वह पकड़ा गया. उसकी थोड़ी बहुत पिटाई हुई और 100 नंबर पर उसके पकड़े जाने की सूचना दे दी गयी.
 पुलिस घटनास्थल पर पहुंची लेकिन उसने पानी-मिट्टी से सने चोर को अपने वाहन में बिठाने से परहेज किया और चोर को गोमती नगर थाना पहुंचाने की जिम्मेदारी कय्यूम और उसके पड़ोसी अकील पर लाद दी. मोटरसाइकिल पर दोनों के बीच चोर बैठा. पड़ोसी होने के नाते दूसरी मोटरसाइकिल से इरफान और बबलू भी साथ हो लिये. रात ढाई बजे तक चारों अपने घर वापस भी लौट आये. यही चारों बाद में आरोपी बना दिये गये. चारों गरीब परिवार से हैं और अपने घरों के मुखिया भी हैं।.
 प्रश्न यह है कि पुलिस ने चोरी के घटना स्थल पर पहुंचने के बाद उस चोर को कस्टडी मे नही लिया न ही थाना ले जाने के लिये किसी पुलिस को शिकायतकर्ता के साथ तैनात किया प्रत्यक्ष दर्शी के मुताबिक पानी-मिटटी से सने होने की बात कही गई दोनो ही स्थितियां स्पष्ट करती है - यदि कथनानुसार 100 नम्बर डायल कर पुलिस बुलायी गयी तो क्या चोर घटना स्थल पर मर चुका था या मृतकचोर को उठाकर निवासी पुलिस आने से पहले कहीं छोडने़ चले गये।
रिहाईमंच के मुताबिक पुलिस कहती है कि उसने चोर को अपने कब्जे में लिया था लेकिन वह उसकी पकड़ से भाग निकला. उसे बहुत खोजा गया लेकिन वह हाथ न आया. दूसरे दिन सुबह तकरोही से सटी मायावती कालोनी के पास लावारिस लाश मिली. 100 नंबर पर इसकी सूचना मिलने पर पुलिस आयी और उसे मेडिकल कालेज ले कर चली गयी. उसे लावारिस घोषित कर दिया गया.

नन्हें पहलवान के मुताबिक़ रात कोई 3.30 बजे पुलिस उनके घर आयी थी और उनसे रमेश लोधी के बारे में पूछताछ की थी. लेकिन यह नहीं बताया कि आखिर इतनी रात में की जा रही पूछताछ के पीछे माजरा क्या है. अगले दिन यानी 7 अप्रैल को कोई 11.30 बजे पुलिस फिर गांव आयी और उनसे मोबाइल पर एक धुंधली सी तसवीर पहचानने को कहा. नन्हें पहलवान और फिर रमेश की मां सताना समेत घर के दूसरे सदस्यों और पड़ोसियों ने भी उस तसवीर को नहीं पहचाना. तो भी पुलिस ने नन्हें पहलवान को पोस्टमार्टम हाउस चल कर लाश की पहचान करने का दबाव बनाया.
नन्हें पहलवान ने लाश को देखते ही उसकी पहचान अपने भतीजे के तौर पर कर दी. इसके साथ ही पुलिस ने रहस्यमयी मुस्तैदी दिखायी और लाश को फ़टाफ़ट फुंकवा कर ही दम लिया. इस बीच सूचना पा कर रमेश की बहन बिंदेश्वरी सीधे भैंसाकुंड पहुंची थी. उसने लाश को गांव ले जाने की ज़िद पकड़ी और पुलिस की इस जल्दबाजी के पीछे किसी साजिश की आशंका भी जतायी. लेकिन उनकी आवाज अनसुनी रहा गयी. पुलिस ने जो चाहा, वही किया. वर्दी का आतंक बहुत भारी होता है.
घरवाले चाहते थे कि शव पहले उनके गांव ले जाया जाये लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनी. इस बेचारगी का मलाल उनका पीछा नहीं छोड़ रहा था. सदमे के इस आलम में पुलिस की जब तब आमद और अपने साथ खड़े लोगों पर बन रहे उसके दबाव ने उनकी बेचैनी और बढ़ा दी थी.
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यह उल्लेख भी ज़रूरी है कि नन्हें पहलवान ने एसएसपी के घर दस्तक दी और मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भी इंसाफ की गोहार लगायी लेकिन इंसाफ मिलने की संभावना का कहीं से कोई सुराग नहीं मिला. राजधानी की इस स्थिति से अंदाज लगाया जा सकता है कि सूबे के दूसरे इलाकों में कानून व्यवस्था की हालत कैसी होगी.     
 नन्हें पहलवान वह लखनऊ के इंदिरा नगर इलाके में बहुत पहले शामिल हो चुके तकरोही गांव के मजरे फतहापुरवा के निवासी थे. उनकी मौत की खबर इसलिए ख़ास है क्योंकि वह उस रमेश लोधी के चाचा थे जिसकी पिछली 7 अप्रैल को पुलिस हिरासत में मौत हुई थी और वही इस मामले के प्रमुख पैरोकार भी थे.
 नन्हें पहलवान की मौत की ख़ास बात यह भी कि उन्होंने उन चार लोगों को बेकसूर माना था जिन्हें पुलिस ने इस मामले के आरोपी के बतौर जेल भिजवा दिया. 
शवदाह के समय मौजूद लोगों ने कुछेक पुलिसवालों को फोन पर किसी को कुछ ऐसा भरोसा दिलाते हुए सुना कि सब ठीक हो जायेगा सर, कि काम पूरा हो गया सर. शव दाह के फ़ौरन बाद पुलिस नन्हें पहलवान को थाने पर पहुंचने का आदेश देकर चलती बनी. थाने में समझौते की बात चल रही थी और उनसे किसी कागज़ पर अंगूठे का निशान लिया जाना था. इस बीच वह दवा लेने बाहर निकले. इस बहाने उन्होंने किसी वकील से संपर्क साधा और उसकी सलाह पर वापस थाने जाने के बजाय सीधे अपने घर चले गये.

इसके बाद पुलिस कैलाश लोधी के पीछे पड़ गयी जो उन्हें थाने से मेडिकल की दूकान तक ले गये थे. पुलिस को लगा कि नन्हें पहलवान के थाना वापस न लौटने के पीछे कैलाश लोधी का दिमाग है. पुलिस ने उन्हें धमकाया, लगातार उनका फोन घनघनाया और रिस्पांस न मिलने पर उनके घर भी धमक गयी. उन्हें डर है कि पुलिस उन्हें कभी भी फंसा सकती है.
  ढेरों सवाल हैं. लोगों का बयान है कि चोर को थाने ले जाया गया था. क्यों न माना जाये कि थाने में उसकी बेरहम पिटाई हुई जिससे वह लाश में बदल गया. खुद को बचाने के लिए पुलिस ने उसकी लाश सड़क किनारे फेंक दी और फिर लावारिस लाश की बरामदगी दिखा दी. तो फिर पुलिस देर रात नन्हें पहलवान के घर रमेश लोधी के बारे में पूछताछ करने क्यों और किस आधार पर गयी थी. अगर लाश लावारिस थी तो उसकी शिनाख्त करने के लिए उन पर इतना जोर क्यों था. शवदाह की जल्दी क्यों थी. लाश को घर ले जाने में पुलिस को क्या और कैसी हिचक थी. गांव स्थित श्मशान में शवदाह क्यों नहीं हो सकता था. यह झूठी बात क्यों फैलायी गयी कि रमेश शादीशुदा था, कि उसकी पत्नी उसकी इन्हीं आदतों के चलते छह माह पहले उसे छोड़ कर जा चुकी थी. जबकि रमेश अविवाहित था और हिंदू समाज में अविवाहित को जलाने की नहीं, दफनाये जाने की परंपरा रही है. तो क्या शवदाह और उसमें जल्दबाजी के पीछे पुलिस की मंशा अपने गुनाहों के सबूत मिटाने की थी. पुलिस किस बात का समझौता कराना चाहती थी और क्यों. नन्हें पहलवान के हमदर्दों के खिलाफ पुलिस ने निशाना क्यों साधा. ऐसा माहौल क्यों बनाया कि लोग चुप रहें, कि इसी में अपनी भलाई समझें.
 मुख्यमंत्री और एसएसपी को भेजी गयी नन्हें पहलवान की अर्जी के मुताबिक़ फ़ौरन कार्रवाई हो और पुलिस की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच हो.
उत्तर प्रदेश मे प्रशासनिक फेरबदलः कई आई0ए0एस0 का तबादला

उत्तर प्रदेश मे प्रशासनिक फेरबदलः कई आई0ए0एस0 का तबादला

लखनऊ-उत्तर प्रदेश में 84 आईएएस अफसरों के तलबादले,विवेक वार्ष्णेय विशेष सचिव कार्यक्रम क्रियान्वयन,विशाख जी डीएम भदोही बनाए गए,मन्नान अख्तर डीएम हमीपुर बनाए गए,डॉ. आदर्श सिंह विशेष सचिव मुख्यमंत्री,शरद कुमार सिंह डीएम प्रतापगढ़ बनाए गए,प्रकाश बिंदु विशेष सचिव परिवहन विभाग,रवींद्र कुमार डीएम फर्रुखाबाद बनाए गए,हृदय शंकर तिवारी मुख्य कार्यपालिका अधिकारी स्वास्थ्य बिमा योजना,भवानी सिंह खंगौरौत डीएम बागपत बनाए गए,अनुज कुमार झा आयुक्त मनरेगा यूपी बनाए गए,अभय जिलाधिकारी रायबरेली बनाए गए,शंभू कुमार विशेष सचिव शिक्षा विभाग बनाए गए,आंद्रा वामसी डीएम कुशीनगर बनाए गए,अबरार अहमद विशेष सचिव प्राविधिक शिक्षा विभाग,सुजीत कुमार डीएम देवरिया बनाए गए,इंद्र कुमार सिंह डीएम शामली बनाए गए,अनिल धीगरा विशेष सचिव वित्त विभाग,कृष्णा करुणेश डीएम हापुड़ बनाए गए,मासूम अली सरवर विशेष सचिव बाल विकास एवं पुष्टाहार,शीतल वर्मा को पीलीभीत का डीएम बनाया गया,कुमार प्रशांत अपर आयुक्त वाणिज्यकर नोएडा,हेमंत कुमार डीएम चंदौली बनाए गए,निखिल चंद्र शुक्ला अपर मिशन निदेशक* *एनएचएम,ऋषिरेंद्र कुमार डीएम मऊ बनाए गए,महेंद्र बहादुर सिंह विशेष सचिव आवास एवं शहरी नियोजन,सूर्यपाल गंगवार विशेष सचिव नागरिक उड्यन विभाग,कुणाल सिलकू डीएम सिद्धार्थनगर बनाए गए,नितीष कुमार अपर निबंधक सहकारी समितियां,दीपक मीणा डीएम श्रावस्ती बनाए गए,अविनाश कृष्ण सिंह नियंत्रक विधिक मान विज्ञान यूपी,अमित कुमार सिंह हाथरस के डीएम बनाए गए,भवनाथ विशेष सचिव कृषि उत्पादन आयुक्त,चंद्र भूषण सिंह अपर आबकारी आयुक्त,अशोक चंद्र विशेष सचिव कृषि उत्पादन आयुक्त,भानु चंद्र गोस्वामी विशेष सचिव नियोजन विभाग,राजेश प्रकाश अपर आयुक्त राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र,राम विशाल मिश्र विशेष सचिव माध्यमिक शिक्षा विभाग,राकेश कुमार मिश्रा डीएम बलरामपुर बनाए गए,श्याम नरायण त्रिपाठी सदस्य राजस्व परिषद,रजनीश गुप्ता-निदेशक राज्य कृषि* *उत्पाद मंडी परिषद का अतिरिक्त प्रभार,अरविंद कुमार-प्रमुख सचिव सहकारिता एवं निबंधन,हरिराज किशोर-अपर मुख्य सचिव,कनक त्रिपाठी-विशेष सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन परती भूमि,राज प्रताप सिंह-अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा अतिरिक्त प्रभार,कामरान रिजवी-आयुक्त ग्राम विकास का अतिरिक्त चार्ज हटा,नीना शर्मा-आयुक्त ग्राम विकास यूपी,मृत्युंजय कुमार नाराय़ण सचिव मुख्यमंत्री,राज्य संपत्ति,मृत्युंजय कुमार को नागरिक उड्डयन का भी चार्ज,धीरज साहू-आबकारी आयुक्त का अतिरिक्त चार्ज,मनोज मिश्रा-सचिव संस्कृति विभाग निदेशक संस्कृति,केधन लक्ष्मी-अपर स्थानिक आयुक्त,कर्ण सिंह चौहान-जिलाधिकारी झांसी,शमीम अहमद खान-विशेष सचिव नगर विकास नगरीय रोजगार,सेल्वा कुमार जे-जिलाधिकारी इटावा,मदनपाल जिलाधिकारी* *फतेहपुर,चंद्रपाल सिंह विशेष सचिव गोपन विभाग,यशवंत राव-जिलाधिकारी मैनपुरी,डॉ नितिन बंसल-मिशन निदेशक राजकीय ग्रामीण आजीविका मिशन,अरविंद मलप्पा बंगारी-जिलाधिकारी मथुरा,जगदीश-विशेष सचिव खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन,जगदीश प्रसाद -जिलाधिकारी* *कन्नौज,आन्जनेय कुमार सिंह-अपर आयुक्त वाणिज्य कर,डॉ. रौशन जैकब-जिलाधिकारी बुलंदशहर,अखिलेश तिवारी जिलाधिकारी बाराबंकी,सुरेश कुमार सिंह-सीईओ ग्रामीण सड़क प्राधिकरण,योगी सरकार में सबसे बड़ा प्रशासनिक फेरबदल,38 जिलों के डीएम हटाए गए,कौशलराज शर्मा लखनऊ के नए डीएम,शुभ्रा सक्सेना-जिलाधिकारी हरदोई,नवनीत सिंह चहल-जिलाधिकारी अमरोहा,अमृत त्रिपाठी-विशेष सचिव राष्ट्रीय एकीकरण विभाग,डॉ सारिका मोहन-डीएम सीतापुर बनाई गई,निधि केसरवानी-विशेष सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी,मिनीस्ती एस-डीएम गाजियाबाद,मो. शफकत कमाल-विशेष सचिव ग्रामीण अभियंत्रण,नागेंद्र प्रसाद सिंह-डीएम* *सहारनपुर,बृजेश नारायण सिंह-डीएम गौतमबुद्धनगर,पवन कुमार विशेष सचिव कृषि उत्पादन आयुक्त शाखा,अनीता श्रीवास्तव-डीएम बदायूं,जुहेर बिन सगीर-विशेष सचिव कृषि उत्पादन आयुक्त शाखा,राकेश कुमार सिंह द्वितीय-डीएम* *मुरादाबाद,दिनेश कुमार सिंह-विशेष सचिव गृह विभाग,जीएस प्रियदर्शी-डीएम मुजफ्फरनगर,सुरेंद्र सिंह-डीएम कानपुर नगर,पिंकी जोवेल-डीएम बरेली,डॉ राजशेखर-विशेष सचिव पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं निदेशक,शिवसहाय अवस्थी-डीएम रामपुर बनाए गए*

पत्रकार का नाम पूछ कर उसे भवगा पार्टी वाला कह दिया: तैश में अखिलेश यादव

आज प्रेस कान्फ्रेस के दौरान अखिलेश यादव उस समय भड़क गये जब एक वरिष्ठ पत्रकार ने उनसे सवाल किया,’ आपके चाचा शिवपाल जानना चाहते हैं कि आप अपने वादे के मुताबिक पिता मुलायम सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद कब सौंप रहे हैं।इस सवाल पर वे इतना तमतमा गये कि संबंधित पत्रकार का नाम पूछ कर उसे भवगा पार्टी वाला कह दिया। अखिलेश यहीं नहीं रूके, तैश में यह तक कह गये,’ जब देश बर्बाद हो जायेगा तो तुम जैसे पत्रकार कहीं नहीं रहोगे।परिवार के सवाल पर उन्हें अक्सर आग बबूला होता देखा जाता है। मैंने 48 वर्ष के पत्रकारिता जीव में कभी किसी नेता को इतना तैशमें नहीं देखा। मुलायम सिंह यादव से 90 के दशक में तमाम तीखे सवाल पत्रकारों द्वारा पूछे जाते थे। अयोध्या कांड के दौरान एक बार उनसे पूछा था,‘ मुल्ला मुलायम की छवि से बाहर कब आइयेगा।किसी प्रकार का रियेक्ट करने के बजाये उन्होंने बड़े शांत स्वर में जबाव दिया था,’ अगर गोली न चलवाता तो उपद्रवी मस्जिद ढहा देते।प्रेस कांफे्रस के बाद मुलायम सिंह ने मुझे अलग बुलाकर कहा था,’ ऐसे सवाल हमेशा पूछा करो, कम से कम मुसलमानों में तो मैसेज ठीक जायेगा।; हालांकि मन से वह कतई यह नहीं चाहते थे आगे से कोई उनसे ऐसा तीखा सवाल पूछे। आज अखिलेश की तमतमाहट तमाम पत्रकारों को नागवर लगी। एक सफल नेता बनने के लिये संयम जरूरी है।

यूपी की तर्ज पर तमिल किसानो के कर्ज माफी का 40 दिन पुराना आंदोलन समाप्त

नई दिल्ली. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई.पलानीस्वामी द्वारा आश्वासन मिलने के बाद जंतर-मंतर पर धरना दे रहे किसानों ने छह हफ्ते से चल रहे प्रदर्शन को समाप्त करने की घोषणा कर दी है. हालाँकि किसानों ने इस प्रदर्शन को केवल 15 दिनों के लिए स्थगित किया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगे इन 15 दिनों में सरकार ने नहीं मानी तो किसान फिर से अपना रूख प्रदर्शन कर देंगे. जो कि इससे भी बड़ा आंदोलन का रूप धारण करेगा।
बता दें कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई पलानीस्वामी ने अपने राज्य के किसानों से मुलाकात कर उनसे प्रदर्शन खत्म करने का आग्रह किया और उनको विश्वास दिलाया कि वह उनकी मांगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष रखेंगे। वहीं आंदोलन कर रहे किसानों का कहना है कि जिस तरीके से योगी सरकार ने यूपी के किसानों का ऋण माफ कर दिया, वैसे ही तमिलनाडु के किसानों का भी माफ किया जाए. उल्लेखनीय है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर तमिलनाडु के किसान कर्ज माफी को लेकर करीब 40 दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे. शनिवार को इन किसानों ने अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए और सरकार का ध्यान खीचने के लिए मूत्र भी पिया था. जिसके बाद पूरे देश में इसकी निंदा हुई.
   

54 प्रतिशत बजट का हिस्सा पिछड़ी जाति पर व्यय होगा: कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर

लखनऊ। दिव्यांगजनों के बैंक कर्ज को किसानां की तर्ज पर माफ कर दिया गया है। दिव्यांगजनों को अब काम-धंधा करने के लिए एक लाख रूपये का लोन दिया जायेगा। पहले मात्र दस हजार रूपये का ही लोन मिलता था। इनके विभाग का नाम बदल कर अब दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग कर दिया गया है। पिछड़ा वर्ग के 27 प्रतिशत भर्ती आरक्षण को पूरा करवाया जायेगा। यूपी की कुल आबादी में 54 प्रतिशत पिछड़ी जाति के हैं। अब इन 54 प्रतिशत लोगों के लिये यूपी के बजट में से 54 प्रतिशत बजट की धनराषि इनके विकास कार्यों में व्यय की जायेगी।
यह बात यूपी के दिव्यांगजन सशक्तीकरण एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने विधानभवन स्थित अपने कार्यालय में मीडिया से बताया। मंत्री ने बताया कि विकलांग कल्याण विभाग का नाम बदलकर अब दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग कर दिया गया है। अब दिव्यांगों को अपना काम-धंधा शुरू करने के लिए 10 हजार से बढ़ाकर एक लाख रूपये का बैंक कर्ज दिया जायेगा। दिव्यांगजनों के संपूर्ण कर्जें किसानों की तर्ज पर माफ कर दिये गये हैं। 6421 दिव्यांगों में प्रत्येक को दस हजार रूपये का बैंक लोन देने से 5 करोड़ 88 लाख रूपये का कुल कर्ज था और इसमें से मात्र 1 करोड़ 60 लाख रूपये की ही वसूली अबतक हो पायी थी। और शेष धनराशि 4 करोड़ 28 लाख रूपये की वसूली नहीं हो पायी थी। जिसे हमारी सरकार ने माफ कर दिया है। इनकी पेंशन भी 300 रूपये से बढ़ाकर 500 रूपये कर दी गयी है।
मंत्री ने बताया कि यूपी की कुल आबादी में 54 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग की आबादी है। हमने मुख्यमंत्री से निवेदन किया है कि प्रदेश के कुल बजट का 54 प्रतिशत हिस्सा पिछड़ा वर्ग के विकास पर खर्च किया जाये। इसके साथ ही श्री राजभर ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत सरकार वी0पी0 सिंह के मंडल कमीशन 1990 द्वारा यूपी में पिछड़ा वर्ग की भर्तियां में 27 प्रतिशत आरक्षण लागू है। फिर भी 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ पिछड़ा वर्ग को नहीं मिल रहा है। जिसके कारण हमनें प्रदेश के सभी विभागों में नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि आपने अभी तक पिछड़े वर्ग के कितने पद भरें हैं, कितने खाली हैं और कितने दिनों में खाली पदों को भर दिया जायेगा? प्रदेश में पिछड़ा वर्ग को सरकारी भर्तियों में 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ सुनिश्चित कराया जायेगा। पिछड़ा वर्ग के विकास के लिए इनको स्वावलंबी बनाने के लिए छोटे-छोटे उद्योगों को लगाया जाएगा। इनको तकनीकी ज्ञान दिया जायेगा। जिसके अंतर्गत मोबाइल, टीवी, एसी, फ्रिज आदि इलेक्ट्रानिक्स सामानों का पूर्ण तकनीकी ज्ञान दिया जायेगा। कौशल विकास योजना में इनकी ज्यादा से ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित करायेंगे। गरीब पिछड़े वर्ग की बिटिया की शादी के लिए पहले 20 हजार रूपये का ही अनुदान मिलता था अब इनको 25 हजार रूपये की मदद की जायेगी।

साथ ही मंत्री ने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक-एक कंप्यूटर सेंटर खोले जायेंगे। हर एक सेंटर पर तीन-तीन कंप्यूटर रखे जायेंगे और इनको चलाने के लिए संविदा पर आपरेटर रखे जायेंगे। यहां पर पिछड़ा वर्ग और दिव्यांगों के नौकरी, शादी इत्यादि लाभकारी सरकारी योजनाओं के फार्म वगैरह बगैर त्रुटि के आनलाइन आवेदन करवाने की व्यवस्था होगी।

प्रशासन के छापे से पहलेः मुखबर ने सतर्क किया दलालो को

जिलाधिकारी  रोशन जेकब ए आर टी  ओ बाराबंकी दफ्तर में दलाली की शिकायत पर छापा डालती हुई  
 बाराबंकी,(प्रेसमैन)ःइस सप्ताह जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक ने एआरटीओ कार्यालय की हो रही शिकायतों का संज्ञान लेते हुए वहॉ छापा मारा, लेकिन प्रशासनिक अमले मे मुखबरी छापे से पहले ही सतर्क कर गयी अर्थात कही कोई चूक रह गयी कि सारे दलाल भागने में कामयाब रहें। एआरटीओ अकेला ऐसा कार्यालय है जिसके बारे में हर कोई जानता है कि देश में जितने भी विभाग है उनमे से एआरटीओ कार्यालय ही अकेला ऐसा विभाग है जहॉ दलाल बकायदा दुकाने सजाकर बैठे रहते है और खुलेआम हजारो रूपये का काम एआरटीओ कार्यालय की मिली भगत से कर रहे है। जितनी दलाली के कसूरवार दलाल है उससे अधिक एआरटीओ विभाग के सेवारत कर्मचारी व अधिकारी है। 
जिलाधिकारी बाराबंकी डा. रोशन जैकब व एसपी वैभव कृष्ण ने एआरटीओ कार्यालय पर अचानक छापा मारा। लेकिन एआटीओ कार्यालय के बाहर दलालो की फौज होने के बावजूद एक भी दलाल जिला व पुलिस प्रशासन के हाथ नही लगा, बल्कि बेकसूर बेगुनाह लोग जो अपना काम करवाने आये थे उन्हे पकड़कर पूरा दिन कोतवाली में मुल्जिमो की तरह बैठाये रखा गया तथा बाद में एआरटीओ की तस्दीक पर उनको यह कहकर छोड़ दिया गया कि उनमे से कोई दलाल नही है। 
इससे यह स्वतः साबित है कि एआरटीओ दलालो को ठीक से पहचानते है। अबतक पुलिस ने एआरटीओ से किसी दलाल की शिनाख्त के लिये कोई जानकारी हासिल नही की  जिससे जिलाधिकारी महोदया का पूरा छापा गीला पटाखा साबित हो रहा है। यह बात सच्चाई है कि दलालो की पूरी फौज आरटीओ दफ्तर के बाहर लर्निग लईसेंस के लिये 800/- धनराशि वसूल करते हैं। 
यह भी सच है कि किसी दलाल की हिम्मत नही कि वह कार्यालय में आसानी से जा कर काम करवा सकें जब तक कार्यालय की पूरी मिलिभगत न हो। कार्यवाही तो जिला प्रशासन कितना संजीदा है भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिये एवं वत्रमान सरकार का कितना असर अधिकारियो पर है यह समय के गर्त मे है।
डीएम व एसपी का एआरटीओ कार्यालय लाव लश्कर के साथ पहुॅचना ही उनके मिशन की नाकामी रही। यदि इस कार्य के पूर्व लोकल ईन्टेलीजेन्स की सहायता ली गयी होती तो यह भ्रष्टाचार के विरूद्ध सफल अभियान होता एक भी दलाल भागने में सफल न हो पाताः इसमे संलिप्त सरकारी अमले की मिलीभगत सहसंबंध एवं सारा कसूर दलालो का ही नही है साबित हो जाता, बल्कि लाईसेंस बनवाने, नवीनीकरण करवाने व रजिस्ट्रेशन करवाने, भार क्षमता बढ़वाने अथवा कम करवाने के नाम पर जो मोटी-मोटी रकमे वसूली जा रही है उसपर नकेल कस जाती। दलाली उगाये गये धन का बड़ा हिस्सा कार्यालय के कर्मचारी व अधिकारी डकार जाते है।
आश्चर्य है कि मेडिकल फिटनेस की भी दुकान है जिला प्रशासन के सोचने की बात है कि यदि एआरटीओ कार्यालय पर दलाली नही हो रही है तो कार्यालय के बाहर जो दुकाने खुली है उनको क्या फायदा? जैसा कि कहा जा रहा है कि दुकाने फोटो स्टेट की है तो क्या आरटीओं कार्यालय से इतना फोटो स्टेट का काम निकलता है कि लगभग चार दर्जन लोगो को काम मिला हुआ है?

मध्यप्रदेश सरकार गैर कानूनी तरीके से हेलमेट पहननें पर 250 रुपये फ़िर 500 रुपयेउगाही कर रही है



पुलिस का चैकिंग अभियान, अधिकार एवं सच्चाई’ ’मोटरयान अधिनियम 1988 में हेलमेट न पहनने के लिए कोई दण्ड का प्रावधान नही है।परंतु मोटरयान अधिनियम की धारा 129 लोगों से अपेक्षा करती है कि वे हेलमेट पहनें। अब जब कोई दण्ड नही है तो फिर दण्ड धारा 177 के तहत किया जा सकता है। जिसमें पहली बार उल्लंघन करने पर अधिकतम 100 रुपये एवं उसके बाद पुनः उल्लंधन करते पाये जाने पर अधिकतम 300 रुपये का प्रावधान है। परंतु मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने अपने चिर परिचित अंदाज में मध्यप्रदेश की जनता का अधिकतम तेल निकालने के उद्देश्य से पूरी तरह से गैर कानूनी तरीके से पहली बार में 250 रुपये व उसके बाद 500 रुपये उगाही कर रही है। मोटरयान अधिनियम की धारा 130 में लायसेंस छोड़कर कोई भी अन्य दस्तावेज चेक करने का अधिकार पुलिस को नही है, परंतु मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए पुलिस सभी दस्तावेज चेक कर रही है। अब जब पुलिस वाले मोटरयान अधिनियम का उल्लंघन करते हुए दस्तावेज चेक करते हैं तो वह भी धारा 177 के तहत अपराध है। वहीं यह किंचित परिस्थितियों में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 166 के तहत भी अपराध है। साधारण परिस्थिति में पुलिस का उप अधीक्षक स्तर का अधिकार व यातायात का सब इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी ही चैकिंग कर सकता है ऐसा मध्यप्रदेश सरकार का धारा 200 के तहत प्रकाशित राजपत्र कहता है। पुलिस को जुर्माना देना जरुरी नही है। पुलिस का अधिकार शमन शुल्क, समझौता शुल्क प्राप्त करने का अधिकार है। अगर आप जुर्माना नही भरना चाहते तो आप पुलिस ने न्यायालय में आपका प्रकरण सौंपने को कह सकते हैं। पुलिस आपको जुर्माना भरने के लिए कानूनी तौर पर विवश नही कर सकती। इस संबंध में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय कि डिविजन बैंच के स्पष्ट निर्देश हैं।


मुख्यमंत्री योगी भेंट की राज्यपाल से; विधान मण्डल सत्र के बारे में चर्चा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक से आज प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिष्टाचारिक भेंट की। भेंट के दौरान राज्यपाल से मुख्यमंत्री ने संभावित विधान मण्डल सत्र के बारे में चर्चा की। ज्ञातव्य है कि नयी सरकार के गठन के पश्चात् राज्य विधान मण्डल का यह पहला सत्र होगा। संसदीय परम्परा के अनुसार राज्यपाल साल की पहली बैठक में विधान परिषद एवं विधान सभा के एक साथ समवेत संयुक्त सत्र को सम्बोधित करते हैं। 
राजकीय निर्माण निगम के एडिशनल जनरल मैनेजर पैतृक गाँव इनकम टैक्स का छपा

राजकीय निर्माण निगम के एडिशनल जनरल मैनेजर पैतृक गाँव इनकम टैक्स का छपा

आजमगढ़ : राजकीय निर्माण निगम के एडिशनल जनरल मैनेजर शिव आश्रय शर्मा के पैतृक गाँव आजमगढ़ ठेकमा बरदह थाना क्षेत्र के अन्तर्गत इनकम टैक्स की टीम पहुँचने के बाद से बेचैनी है। बुधवार को आईटी टीम ने जांच की थी। परिज़नों का कहना है कि घर में टीम नहीं आयी थी हालाकिं इन्ही के पैतृक संपत्ति मे किराएदार यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया की शाखा पर गयी थी। परिज़नों के अनुसार खातों की जांच की गयी थी, कुछ कागजात ले गए हैं और एक लाकर भी सीज किया गया है।

वहीं मामले पर पूछे जाने पर बैंक के शाखा प्रबंधक व फील्ड ऑफिसर ने पल्ला झाड़ लिया। आलीशान मकान राजकीय निर्माण निगम के एजीएम शिव आसरे के पैतृक गाँव का घर है। ख़ास बात है कि आसपास के इलाके पर नज़र डालें तो पिछड़ा क्षेत्र है लेकिन इस आवास और आसपास की व्यवस्था बहुत कुछ बोल रही है। ठेकमा के रहने वाले विश्वनाथ राय जो कि जनता इंटर कालेज में प्रधानाचार्य पद से रिटायर हुए थे उनके पहले पुत्र रामआसरे शर्मा हैं जो कि रिटायर्ड प्रोफ़ेसर हैं उनकी पत्नी भी इसे पद से रिटायर हुईं। दूसरे नंबर पर शिवआसरे शर्मा हैं। जबकि तीसरे पुत्र विश्वेन्द्र शर्मा हैं जो देवरिया में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर हैं। शिव आसरे गोरखपुर से इंजीनियरिंग की पढाई कर सरकारी सेवा में आये। उनकी संपत्ति की जांच पर उनके बड़े भाई का कहना है कि परिवार पहले से संपन्न है और सभी सदस्य सेवारत रहे हैं पहले की भी पुश्तैनी जमीन है। वहीं शिव आसरे पर आरोप को गलत बताते हुए कहा कि जांच अधिकारी को सभी जरुरी अभिलेख दे दिए जायेंगे और तभी इससे दूध का दूध पानी का पानी होगा। हालांकि बैंक के अधिकारी मामले में किसी कार्रवाई से साफ़ इनकार कर रहे हैं। बता दें कि कई महत्वपूर्ण मीडिया संस्थानों के पास मिली जानकारी के मुताबिक़ शिव आसरे के पास छह सौ करोड़ रुपये की संपत्ति का खुलासा हुआ है।

 श्रीनगर लोकसभा सीट पर उपचुनाव ड्यूटी से लौट रहे सीआरपीएफ जवानों के साथ हुई बदसलूकी पर जवानों का रुख सामने आया

श्रीनगर लोकसभा सीट पर उपचुनाव ड्यूटी से लौट रहे सीआरपीएफ जवानों के साथ हुई बदसलूकी पर जवानों का रुख सामने आया

श्रीनगरः (कश्मीर) हाल ही में श्रीनगर लोकसभा सीट पर उपचुनाव के बाद ड्यूटी से लौट रहे सीआरपीएफ जवानों के साथ हुई बदसलूकी के मामले में पहली बार इन जवानों का रुख सामने आया. इन जवानों ने उस दौरान अपने साथ हुए अभद्र व्यंवहार को लेकर कहा कि जब हम लोग बूथ से निकल रहे थे, तो उस दौरान उनपर पथराव किया गया... हाथापाई की गई. एनडीटीवी से बातचीत में इन जवानों ने कहा कि जब वे ड्यूटी से वापस लौट रहे थे तो भीड़ ने उनके साथ हाथापाई की और वे नारे लगा रहे थे. उस भीड़ के पास कोई हथियार नहीं थे. जवानों ने कहा कि उस भीड़ में बच्चे, बूढ़े और महिलाएं भी थीं, इसलिए हमने बल प्रयोग करना वाजिब नहीं समझा. हम अपने को बचाते आगे निकल गए. वो भी हमारे भाई हैं’. उन्होंनि यह भी कहा कि उनके ऐसे व्ययवहार पर थोड़ा गुस्सा आया, लेकिन हमने हथियार का प्रयोग नहीं किया. वो भी हमारे भाई हैं... बहक गए हैं, हमें जो ट्रेनिंग दी गई है हमने उसका ध्यान रखा. आम नागरिकों पर बल प्रयोग करना ठीक नहीं समझा. दरअसल, उपचुनाव के वक्त  सीआरपीएफ जवानों के साथ हुई इस बदसलूकी का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसको लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की नाराज़गी खुलकर सामने आई थी. श्रीनगर लोकसभा सीट पर उपचुनाव के समय की इन तस्वीरों में सीआरपीएफ जवानों को पैरों से मारा गया और उनका हेलमेट फेंका गया. इन सबके बीच जवानों ने अपना संयम नहीं खोया और वे चुपचाप चलते रहे. उपद्रवियों और पत्थरबाजों का सामना हमारे सुरक्षाबल किस संयम के साथ करते हैं उसकी एक बानगी इस वीडियो में दिखाई दी थी.   

आईएसआईएस से प्रेरित इंटरनेट और सोशल नेटवर्किंग चार संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार

नई दिल्लीः गुरुवार की सुबह-सुबह खुफिया सूचना के आधार पर यूपी पुलिस, दिल्ली पुलिस, मुंबई पुलिस, पंजाब पुलिस और आंध्रप्रदेश पुलिस की नौ टीमों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए पांच राज्यों में छापेमारी कर चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया और छह लोगों को हिरासत में लिया. हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ जारी है. यूपी एटीएस के मुताबिक जो लोग गिरफ्तार हुए हैं उनमें मुंबई से बिजनौर के नाज़िम शमशाद अहमद को पकड़ा गया, जालंधर से उन्नाव के रहने वाले गाजी बाबा को और बिजनौर से फैजान और जकवान को पकड़ा गया. जो लोग हिरासत में हैं उनमें बिजनौर के पांच और शामली का एक शख्स है. पुलिस के मुताबिक यह लोग आतंकी संगठन आईएसआईएस से प्रेरित होकर अपना एक संगठन बनाने की कोशिश में थे. यह इंटरनेट और सोशल नेटवर्किंग साइट्स के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में थे. वे हथियार और पैसा इकठ्ठा करके कई शहरों में सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए हमले करने की फिराक में थे. उनके पास से कई सिमकार्ड और दस्तावेज बरामद हुए हैं. यूपी एटीएस के मुताबिक इस मॉड्यूल के गिरफ्तार आरोपियों की संगठन में भूमिका कुछ इस तरह थी- 1. नाज़िम शमशाद अहमद - मॉड्यूल का सरगना, लोगों को आतंक के लिए भर्ती करना और आतंकी गतिविधियों के लिए धन इकठ्ठा करना. 2. गाजी बाबा - संगठन से नए सदस्यों को जोड़ना, धार्मिक भावनाएं भड़काकर उन्हें आतंक के लिए प्रेरित करना. 3. फैज़ान - जिहाद के लिए लोगों को प्रेरित करना और हथियार इकठ्ठे करना. 4. जकवान - धन की व्यवस्था करना. पुलिस के मुताबिक यह मॉड्यूल स्वप्रेरित है इसलिए जो लोग हिरासत में लिए गए हैं उनकी भूमिका के हिसाब से उन्हें या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उन्हें समझाकर छोड़ा जाएगा.