UPBIL/2018/70352

फिलीपींस के टेमबिन तूफान से मरने वालो की संख्या १३६ हुई

फिलीपींस मिन्डानओ द्वीपके हिस्से मे टेमबिन तूफान
फिलीपींस के मिन्डानओ द्वीप के हिस्से मे टेमबिन तूफान इस शुक्रवार को सैलाब व बाढ़ लेकर आया यहां दो शहर तूबोड व पियागापा बुरी तरह तबाह हो गये कई घर बड़े पत्थरो के नीचे दब गये मरने वालो की संख्या 136 पहुच गई है।
80किलोमीटर प्रतिघंटे की हवा वाला टेमबिन मिन्डावाओ से गुजरा और यह दक्षिण की ओर बढ़ रहा है।
फिलीपींस एसी उष्णकटिबन्धीय आंधियो का हमेशा शिकार होता रहा है, किन्तु मिण्डानाओ प्रायः इससे बच जाता था।
टूबो पुलिस अधिकारी, जेरी परामी ने एएफपी को बताया कस्बे मे 19 लोगो की मृत्यु हो चुकी है। नदी के उफान से लगभग घर बह गये, गॉव का नामो निशान मिट गया।
रक्षक द्वारा दालामा गॉव मे फैले हुए कीचड़ से मृतकों की ्यरीर को खोजकर निकालने के प्रयास किये जा रहे है पीयगापो गॉव जो टूबो से 10 कीलोमीटर पूर्व मे है मे 10 लोग मारे गये है
मैने जीवन रक्षको को भेजा है किन्तु उन्हे शिलाखण्ड की बाधाओं  के कारण कोई सफालता नही मिल पा रही है, श्रीपद पकासुम ने बताया। सीबुको व सालुग कस्बे से अधिक  मौत की खबरें प्राप्त हो रहीं  है।

मिनिस्ट्रीयल कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ का कार्य बहिष्कार; मुख्यद्वार पर एक दिवसीय धरना

कलेक्ट्रेट में धरने के दौरान कर्मचारी लखनऊ बृहस्पतिवार २१ दिसंबर २०१७ 
उत्तर प्रदेश मिनिस्ट्रीयल कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ ने आज लखनऊ कलेक्ट्रेट के परिसर के मुख्यद्वार पर एक दिवसीय धरना दिया। यह कार्यक्रम प्रान्तीय शाखा के आवाहन पर आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश शासन के एवं तहसील स्तर पर लम्बित मांगो के समर्थन मे करमचफर;कर्मचरियो ने  कार्य बहिष्कार कर धरने मे प्रतिभाग लिया।
 इस धरने के आयोजन के दौरान कलेक्ट्रेट संघ द्वारा एक ज्ञापन मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को संबोधित करते हुए, "शासन के कर्मिक अनुभाग-1 द्वारा प्रदेश के समस्त विभागों के कर्मारियो व अधिकरियो की पदोन्नति के संबंध मे जारी दिशा निर्देश कि पदोन्नतियों द्वारा विभाग की रिक्तियो को एक माह के अवधि मे भर दिया जाय",  अनुपालन न किये जाने के विरोध मे दिया गया।
नरेन्द्र सिंह, संघ के अध्यक्ष, ने बताया 71पद मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, 13 पद वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी व 126 पद प्रशासनिक अधिकारी के रिक्त चल रहे हैं उपरोक्त के साथ ही विभिन्न जनपदों मे वरिष्ठ सहायक प्रधान सहायक के पद रिक्त है किन्तु विभागीय चयन समिति अभीतक इन पदों की रिक्तियों का पदोन्नति करते हुए नही भर सकी हैं इससे कर्मचारियो मे घोर निरशा व असंतोष व्याप्त है। कर्मचारी इन पदोन्नतियों से वंचित व अपने अधिकार से उपेक्षित, कुंठित व आंदोलित हैं।
ज्ञापन के माध्यम से कलेक्ट्रेट संघ के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश  को अपनी मांगो पर शीघ्र विचार कर निर्णय लिये जाने की मांग की हैं। इस एक दिवसीय धरने को विभिन्न कर्मचारी नेताओं व राज्य कर्मचारी महासंघ उ0प्र0 के अध्यक्ष ने संबोधित किया।

अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद लखनऊ की बैठक का आयोजन

दिनाक 10 दिसम्बर 2017 दिन रविवार को ’अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद लखनऊ’ के तत्वाधान में जब्ती बाग हनुमान मंदिर राजाजीपुरम में एक मासिक बैठक का आयोजन किया गया जिसमें हमारे संगठन के ’राष्ट्रीय महासचिव  पँ विनय मिश्र जी मुख्य अतिथि के रूप में आये’ ,गोष्ठी में समाज के विभिन्न वर्गों से लोग समिल्लित हुए कार्यक्रम में पँ रामचन्द्र तिवारी जी ,पँ जीवन तिवारी ,पँ सतीश तिवारी,पँ पवन तिवारी अखण्ड ,पँ साजन दीक्षित ,पँ राहुल शुक्ल ,पँ अनुराग पांडेय,पँ राम सागर शुक्ल ,पँ योगेश्वर तिवारी,पँ अखिलेश त्रिवेदी,पँ आशीष वाजपेयी,पँ रमापति दुबे जी,पँ दीपक कुमार पांडेय जी समेत अन्य लोगों भी सम्मिलित हुए, ’गोष्ठी का आज का विषय जनपद में कार्यकारिणी का विस्तार तथा ब्राह्मण उत्थान पर चर्चा रहा’ सर्वप्रथम भगवान परशुराम जी की प्रतिमा पर दीप प्रज्ववलित कर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कार्यक्रम की शुरुवात की गई ततपश्चत हमारे राष्ट्रीय महासचिव  विनय मिश्र  ने नव आगन्तुक सदस्यों समेत सभी बन्धुओ को संगठन के सात सूत्रीय संकल्प से अवगत कराया ब्राह्मण एकता के विषय पर सभी बन्धुओ ने अपने अपने विचार रखे तथा यह भी सुनिश्चित किया गया कि भविष्य कौन संगठन में किस प्रकार का दायित्व प्राप्त करने पर उसका निर्वहन कर सकता है अंत मे सभी पदाधिकारियों के नाम तथा उनके दायित्व को सुनिश्चित कर संगठन को वार्ड स्तर तक पहुँचॉने के लिए पुनः फिर एक बैठक का आयोजन करने का निश्चय कर बैठक को विराम दिया गया।

कुछ लोग अपने जीवन के प्रारम्भ में ही अपने कर्तव्यों को समझ लेते है; कुछ समझने में शोषित होते है


एक कहावत है की अमीर बच्चे बचपन के बाद जवानी देखते है; गरीब बच्चे बचपन के बाद बुढ़ापा ा अब यही देखे बचपन बाल मज़दूरी में गुजरा तो पूरी जवानी भी मजबूरियों के विकट घेरे के हवाले रही. जीवन का बड़ा हिस्सा बड़े लोगों को और बड़ा बनाने की सेवा-टहल में या कहें कि किसी तरह ज़िंदा रहने की जुगत में गुजरा. गरीब बस्तियों के अधिकतर परिवारों की तरह कई सालों से उनके परिवार के लिए भी बरसात का मतलब मुसीबतों से मुठभेड़ करना रहा है. यह सालाना आफत है कि घरों में सीवर का पानी घुस आता है और हफ़्तों बाहर निकलने का नाम नहीं लेता. सड़ांध और रोग-बीमारियों का बसेरा हो जाता है, फोड़े-फुंसियों से बच्चे-बूढ़े हलकान हो जाते हैं. इलाज का बोझ अलग से पैबस्त हो जाता है. गोहार लगती है लेकिन नगर निगम उफ़ भी नहीं करता.

कमाल यह कि आज उसी मामूली आदमी ने लखनऊ नगर निगम के चुनाव में पार्षदी के लिए ताल ठोंकी है. नाम है वीरेन्द्र कुमार गुप्ता. वह इंदिरा नगर के मैथिलीशरण गुप्त वार्ड में रहते हैं. जर्जर हो चली पान की दूकान से कहने भर को उनका घर चलता है.    

जैसा कि आम आदमी के साथ होता है- आर्थिक मजबूरियों ने उनके जीवन को भी ऐसा चकरघिन्नी बना रखा था कि उनके लिए बेहतरी का सपना देख पाना भी जैसे सपना हो गया था. आंखें देर से खुलीं और जब खुलीं तो बहुत दूर तलक देखने लगीं. इन सवालों से जूझने लगीं कि आख़िर गरीब गरीब क्यों होता है, कि गरीब के लिए हाड़तोड़ मेहनत के बाद भी दो जून की रोटी का इंतजाम इतना भारी क्यों हो जाता है, कि मेहनतकश गरीब क्यों लुटता-पिटता रहता है, कि उसकी दुख-तकलीफ़ें अनसुनी क्यों रहती हैं, कि उसके लिए सुनवाई के दरवाजे बंद के बंद क्यों बने रहते हैं...

समझदारी और हिम्मत ने पंख फैलाए. वीरेन्द्र कुमार गुप्ता ने हालात से समझौता करना छोड़ दिया, समझा कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता. पुलिसवाले ने आइसक्रीम बेचनेवाले से मुफ़्त का माल खाना चाहा और मना करने पर उसे पीट दिया तो वीरेन्द्र कुमार गुप्ता पुलिसवाले से उलझ पड़े. दबाव बना तो पुलिसवाले को माफी मांगनी पडी. तकरोही के दलित युवक की पुलिस हिरासत में पिटाई से मौत हुई और पुलिस ने कहानी गढ़ कर चार मुसमानों को फंसा दिया तो वीरेन्द्र कुमार गुप्ता इस अत्याचार के ख़िलाफ़ खड़े हो गए. सरकारी स्कूल में बच्चों की पिटाई, पढ़ाई में ढिलाई, मिडडे मील में गड़बड़ी और स्कूल में साफ़-सफाई के सवाल को आम दिलचस्पी का विषय बनाने का बड़ा काम किया.      

मुसीबतों के मारों को जोड़ा और बिना ढोल-नगाड़ा बजाये गरीब-गुरबों के हित-अधिकारों का मोर्चा खोला. उसे जीने का अधिकार अभियान नाम दिया और उसके तहत मासिक चौपाल की शुरूआत की. यह बदलाव की करवट थी. आम आदमी पार्टी ने उनके इसी जज्बे और उनकी लड़ाकू पहचान को सराहा और उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया.

वीरेन्द्र कुमार गुप्ता सचमुच आम आदमी हैं. उनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं, थोड़ी मजदूरी भी कर लेते हैं. पत्नी निजी स्कूल में आयागिरी का काम करती हैं.

उनके चुनाव प्रचार में उन्हीं जैसे आम लोगों का जुटान है. इसमें घरों में काम करनेवाली महिलाएं, दिहाड़ी मज़दूर और शिक्षित बेरोजगारों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हैं. और हां, 110 वार्डों में वीरेन्द्र कुमार गुप्ता अकेले ऐसे उम्मीदवार हैं जिनका परचा रंगीन नहीं, काला-सफ़ेद है. वह कहते हैं कि हमें अपनी बात पर भरोसा है, तीमझाम पर नहीं.
  

सेना द्वारा घर में नजरबंद राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे ने इस्तीफा देने से किया इनकार


राबर्ट मुगांबे के चार दशक से चले आ रहे जिमबावे की सत्ता पर पकड़ अब ढीली पडती प्रतीत होती है। शनिवार की रात को हजारों लोगो की भीड़ देश के नगरों मे उनके त्यागपत्र की मांग करती देखी गई  है। उनकी सत्तारूढ़ पार्टी ने ही राष्ट्रपति को बर्खास्त करने की तैयारी कर ली है  
पिछले सप्ताह सेना प्रमुख ने सत्ता की बागडोर अपने हाथो में ले ली है उनसे रविवार की सुबह 93 वर्ष के राष्ट्रपति मिलने वाले है यह वहां के टीवी चैनल के माध्यम से प्रसारित किया गया है।
सेना के दखल के पांच दिनों बाद यह दूसरी बार बहस है और जानू-पी एफ नेताओ ने मुगांबे को राष्ट्रपति पद से त्यागपत्र देने एवं पार्टी के नेता व अपने प्रथम सचिव पद से त्यागपत्र देने के एक प्रस्ताव की मांग के लिये बुलाते है. अगले सप्ताह संसद महाअभियोग की प्रक्रिया अपनायेगी। 

सेना के सूत्रों के अनुसारए राष्ट्रपति ने अपने विश्वसनीय मित्र जो एक कैथोलिक पादरी है से सेना प्रमुख के बीच वार्ता की मध्यस्थता करने के लिये कहा है। मुगांबे ने इस तरह के पूर्व मध्यस्थता के प्रस्ताव को इस सुझाव के साथ कि वह सार्थक समझौता बनाने के करीब हैं ठुकरा  दिया था।
अब शायद ही कोई विकल्प इस निरंकुष शासक के लिये बचा है जिसने जिम्बावे को मिश्रित बलप्रयोग, घूस और क्रन्तिकारी भाषणो द्वारा 40 साल से राज किया है। सुरक्षा व्यवस्था की कुछ शाखाओं मे समर्थन पुलिस सहित विलुप्त हो चुका है एवं बड़े नेता पकड़ लिये गये है।
 शनिवार को हरारे की गलियों मे लोगो का जमवाड़ा लगा है लोग नारे लगा रहे है, गा रहे है, और तख्ती हाथ मे लिये है। बहुत से लोग सैनिको को गले लगा रह है। लोगों के मार्च को सेना की अनुमति है और यह अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सेनाप्रमुख की छवि ऊचां करेगी।
जिम्बाब्वे में सेना द्वारा सत्ता पर कब्जा जमाने के बाद से राजनीतिक संकट बना हुआ है. बीबीसी के मुताबिक सेना द्वारा घर में नजरबंद राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे ने इस्तीफा देने की लगातार मांग के बावजूद पद छोड़ने से इनकार कर दिया है. इससे पहले कुछ खबरों में कहा गया था कि बर्खास्त उपराष्ट्रपति इमर्सन मननगागवा राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे की जगह देश का नेतृत्व संभाल सकते हैं. लेकिन अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है.
जिम्बाब्वे की सेना ने बुधवार को राजधानी हरारे के प्रमुख प्रतिष्ठानों के अलावा सरकारी टेलिविजन चैनल को अपने कब्जे में ले लिया था. सेना ने अपने कदम को तख्ता पटल की कोशिश मानने से इनकार किया था. उसने कहा था कि यह कदम राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे के आसपास मौजूद अपराधियों को काबू करने और उन्हें न्याय के कटघरे में लाने के लिए है. इस कार्रवाई के बाद से राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे और उनका परिवार घर में नजरबंद है.
शुक्रवार को जारी बयान के मुताबिक सेना ने कहा है कि वह अपराधियों की पहचान करके उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है. इसके साथ-साथ राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे से भी बातचीत कर रही है. सेना ने आगे कहा है कि राष्ट्रपति के साथ बातचीत का जो भी परिणाम आएगाउसके बारे में जनता को बहुत जल्द बता दिया जाएगा. 93 वर्षीय रॉबर्ट मुगाबे 1980 में ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद से जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति हैं. इस दौरान उनकी सरकार पर मानवाधिकारों के उल्लंघन से लेकर प्रशासनिक गड़बड़ियों तक कई गंभीर आरोप लग चुके हैं.


सरकारी क्षेत्र में अपर्याप्त तकनीकी साधनों के कारण क्षयरोग के प्राथमिक संकेतो को चिन्हित करने प्रयास विफल हो जाते हैं: प्रो0 वीणा दास


लखनऊ विश्वविद्यालय मे चल रहे समाजशास्त्री परिषद के सम्मेलन के तीसरे दिन अध्यात्मिक तथा शोध परक चर्चा की गयी। इस दौरान देश भर से आयें शोध समितियों के विभिन्न प्रतिभागियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। प्रो0 राधाकमल मुखर्जी, प्रसिद्ध समाजशास्त्री, स्मारक व्याख्यान का आयोजन 11ः00 बजे मालवीय सभागार में किया गया। 
   डा0 राजीव कुमार, उपाध्यक्ष नीती आयोग, ने भी अपने उद्घाटन सत्र के वक्तव्य मे प्रो0 मुखर्जी का स्मरण  किया। प्रो0 मुखर्जी की स्मृति में उनकी समिति तथा आई0सी0एस0एस0आर0 द्वारा भारतीय समाजशास्त्री परिषद के सम्मेलन में 2010 से व्याख्यान का आयोजन किया जाता रहा हैं।
 इस वर्ष का प्रो0 राधाकमल मुखर्जी व्याख्यान प्रो0 वीणादास, प्रो0 जॉन हाव्किन्स विश्वविद्यालय अमेरिका द्वारा किया गया।

    प्रो0 वीणा दास ने ‘टी0बी0 इन एन इन्डियन सिटी‘ नामक अपने व्याख्यान  में भारत में क्षय रोग के नियन्त्रण में निजी तथा सरकारी क्षेत्र की भूमिका का समाजशास्त्री विवेचन किया। उन्होंने बताया कि डॉ0 राधाकमल मुखर्जी की सामाजिक पास्थितिकी अवधारणा पूरे विश्व में समाजशास्त्री अध्ययनों में आज भी प्रासंगिक हैं। 
    भारत में क्षय रोग के सम्बन्ध में सामाजिक परिस्थिति के द्वारा हम बेहतर समाजशास्त्री विवेचन कर सकते हैं। स्वास्थ्य की सामाजिक परिस्थितिकी को मगर हम देखे तो इसके एक सिरे पर प्रशिक्षित चिकित्सक है तो दूसरे सिरे पर मरीज, जो कि सामाजिक पारिस्थितिकीय कारणो मे एक दूसरे से दूर होते जाते हैं। 
     प्रो0 दास आगे अपने  समाजशास्त्री विश्लेषण मे पटना तथा मुम्बई के अध्ययनों का हवाला देते हुए क्षय रोग निरोधक केन्द्रों तथा निजी क्षेत्र की भूमिका बारे मे बताया। उनका मानना है कि मरीजों के ऊपर पर्याप्त देख-रेख के अभाव के कारण सरकारी केन्द्रो से रोगी दूर होते जाते हैं यही कारण है कि यह बीमारी आज एक महामारी का रुप ले चुकी हैं। 
    सरकारी क्षेत्र में पर्याप्त तकनीकी साधनों के अभाव के कारण इस बीमारी के प्राथमिक संकेतो को चिन्हित करने प्रयास विफल हो जाते हैं। प्रो0 वीणा दास का मानना है कि विगत वर्षो में क्षय रोग के नियंत्रण में विदेशी स्वयंसेवी स्वास्थ्य संगठनों की भारत में भूमिका बढ़ी हैं तथा वर्तमान परिवेश में सरकारी तथा निजी क्षेत्र को सामंजस्यपूर्ण ढ़ग से काम कर मरीजों को क्षय मुक्त करना होगा।
        तीसरे सत्र में जे0 एन0 यू0 की मैत्रीय चैधरी व के0एस0 जेम्स,  यूनिर्वसिटी ऑफ मैरीलैण्ड अमेरिका की सोनालडे देसाई ने अपने शोधपरक व्याख्यान प्रस्तुत किये। जे0एन0यू0 के मैत्रीय चैधरी ने वर्तमान परिवेश में मीडिया तथा अकादमिक जगत की भूमिका का विष्लेशण सूचना तकनीकी तथा वैश्वी करण के संदर्भ में किया। 
        मैत्रीय चौधरी के अनुसार सामाजिक मीडिया ने आज एक ऐसी परिधि का सृजन किया हैं। जिसनें लोगों को सीमित दायरे में बॅध रखा हैं। सूचना प्रौद्योगिकी का प्रभाव 90 के दशक से बढता जा रहा है, परन्तु इस सूचना तकनीकी ने वैचारिक ध्रूवीकरण पैदा कर दिया हैं।

        उनका मानना है कि समाजशास्त्र के समान्य बोध तथा सांस्कृति वर्चस्व के कारण सूचना की अधिकता ने समाज के नेतृत्व को भ्रमित कर दिया हैं अथवा यह सूचनायें सामाजिक वास्तविकता का प्रतिनिधित्व नही करती हैं। 
         मैत्रीय चौधरी के अनुसार वैश्वीकृत जगत में लोकतंत्र को बचाने के लिये मीडिया तथा अकादमिक जगत की महत्वपूर्ण भूमिका है लेकिन बाजार ने अपने लाभ के लिये जिस वैचारिक ध्रुवीकरण को जन्म दिया हैं उसने इन संस्थाओं को अपनी जकड में ले लिया हैं।
        सोनाल्डे देसाई ने नव उदार वादी आर्थिक रुपान्तरण तथा ग्रामीण अभिजात्य की विवेचना करते हुए अन्य पिछडे वर्गों में आरक्षण के दृष्टिकोण का वर्णन किया हैं। गुजरात के पाटीदारों का उल्लेख करते हुए देसाई ने बताया कि भारत में कृषि जोतो के विखण्डन ताकि खेती के अलाभकारी होने के कारण अर्थव्यवस्था में गृहस्थ कृषक का योगदान 75 प्रतिशत से घटकर 56 प्रतिशत हो गया हैं। घटी हुई आबादी में से मात्र 10 प्रतिशत आबादी ही सेवाओं में समाहित हो पायी हैं।
         निजी क्षेत्र में कम वेतन, व्यावसायिक अनिश्चितता के कारण यह पारम्परिक कृषक जातियां यह महसूस करती है कि यह आरक्षण के माध्यम से अपनी आर्थिक-सामाजिक स्थिति में सुधार कर सकती हैं।
        जे0एन0यू0 के जे0एस0 जेम्स ने भारत में मध्यम वर्ग की विवेचना लैगिंक लाभांश के संदर्भ में की हैं। जेम्स का मानना है कि एशियन डवलपमेंट बैंक की रिर्पोंट के अनुसार भारत में जन्मदर में उल्लेखनीय कमी आई हैं। जिन कारणों से महिलाएं एक लैगिंक लाभांश के रुप में अस्तित्व में आई हैं। भारत में उभरते मध्यमवर्ग में महिलायें भी शामिल हो गई हैं, क्योंकि उनका कार्य केवल पुर्नरुत्पादन तक सीमित नही रह गया हैं।
        पर्यावरण तथा समाज(शोध समिति) के तत्वावधान में शोध समिति के संयोजक डा0 अनूप कुमार सिंह के नेतृत्व में शोध समिति के सदस्यों ने समाजशास्त्र विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो0 आभा अवस्थी तथा श्री जय नारायण पी0जी0 कालेज के पूर्व प्राचार्य डा0 जे0पी0 मिश्र को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।   

बारिश की वजह से अब तक 12 लोगों की मौत; चेन्नई का पूर्वोत्तर मानसून फिर क़हर ढा रहा

अजहर खान ; प्रेसमैन चेन्नई 
चेन्नई में बारिश एक बार फिर क़हर ढा रही है. ख़बर के मुताबिक़ 27 अक्टूबर को शहर में आए पूर्वोत्तर मानसून की आठ दिन की बारिश की वजह से अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है. रिपोर्ट में बताया गया कि अब तक कुल 552.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जा चुकी है. यह हर साल बारिश के सीज़न में होने वाली कुल 750 मिलीमीटर बारिश का 74 प्रतिशत है. पूर्वोत्तर मानसून की वजह से होने वाली यह बारिश इस इलाके में 1 अक्टूबर से 15 दिसंबर तक होती है.
गुरुवार को हुई भारी बारिश के बाद शुक्रवार सुबह बारिश नहीं होने से थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन शाम को फिर तेज़ बारिश शुरू हो गई. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ तेज बारिश ने चेन्नई के मयलापुर, फोरशोर एस्टेट और तांब्रम, क्रोमपेट और पल्लवरम के दक्षिणी इलाक़ों को बुरी तरह प्रभावित किया है. ट्रैफ़िक भी लगातार दो दिन जाम रहा. चेन्नई के ज़िला कलेक्टर ने शनिवार को स्कूलों को बंद कर दिये है. ज़्यादा बुरी ख़बर यह है कि मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में तमिलनाडु के उत्तर तटीय क्षेत्रों में और भारी बारिश होने की आशंका जताई है. साथ ही चेन्नई और उसके उपनगरों में जोर हवाओं की आंधी आने का पूर्वानुमान भी लगाया गया है.
इधर केन्द्र सरकार गुजरात व हिमांचल प्रदेश के विधान सभा चुनाव मे मग्न है, उधर, बारिश से होने वाली मुसीबतों से निपटने मे सरकारी नकामी को लेकर मुख्यमंत्री के पलानीसामी सरकार को लोगों का ग़ुस्सा झेलना पड़ रहा है. हालांकि मुख्यमंत्री कुछ और ही दलील देते नज़र आए. जलभराव को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व की जयललिता सरकार ने साल 2015 में निचले इलाक़ों से पानी निकालने की जो योजना परिकल्पित की थी उसकी वजह से आज पानी जमा नहीं हुआ है. मुख्यमंत्री ने उप-मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कुछ इलाकों का दौरा किया है. बारिश के चलते राहत शिविरों में गए लोगों के लिए खाने के पैकेट, कपड़े, चटाई और चादर बांटे गए हैं.

434 यूपी पीपीएस अफसरों की स्क्रीनिंग, तीन की नौकरी खतरे में

लखनऊ (प्रेसमेन)। पुलिस महकमे में 50 की उम्र पार कर चुके कथित नकारा अधिकारियों को चिह्नित किए जाने की कार्यवाही में 434 पीपीएस अधिकारियों की स्क्रीनिंग की गई। प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को स्क्रीनिंग कमेटी की अहम बैठक हुई, जिसमें 118 एएसपी व 316 डिप्टी एसपी की स्क्रीनिंग की गई। बैठक में प्रमुख सचिव नियुक्ति दीपक त्रिवेदी व डीजीपी सुलखान सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

सूत्रों के मुताबिक तीन अधिकारियों को चिह्नित कर लिये गये है, जिनकी बर्खास्तगी की तैयारी है। कुछ अन्य के नाम की भी सभीक्षा चल रही है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि स्क्रीनिंग पूरी कर ली गई है। अंतिम निर्णय शासन अधीन है। जल्द ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उ0प्र0 के आइपीएस अधिकारियों की स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके लिए कमेटी का गठन किया जा रहा है। नवंबर माह के अंतिम सप्ताह तक आइपीएस अधिकारियों की स्क्रीनिंग भी पूरी कर ली जाएगी।

स्क्रीनिंग कमेटी ने बैठक में 50 की उम्र पार कर चुके चिह्नित पीपीएस अधिकारियों के कैरेक्टर रोल से लेकर उनकी कार्यशैली व प्रदर्शन का ब्योरा देखा। खासकर पिछले 10 सालों में अधिकारियों का सर्विस रिकार्ड देखा गया कि इस अवधि में उनकी कार्यशैली किस प्रकार की रही। किस अधिकारी पर किस प्रकार के आरोप लगे और किसे किन मामलों में दंडित किया गया। किस पर बार-बार आरोप लगते रहे। कितनों के खिलाफ किस प्रकार की विभागीय जांचें की गईं और उनमें उनकी भूमिका किस हद तक दोषी रही है।
इसी आधार पर दागी व नकारा अधिकारियों को तलाशा जा रहा है। ताकि उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा सके। बताया गया कि प्रदेश में पीपीएस कैडर के 1200 से अधिक अधिकारी हैं। ऐसे में इस कैडर के करीब एक तिहाई अधिकारियों की स्क्रीनिंग से पुलिस मुहकमे मे हड़कंप मचा है। दूसरी ओर डीजीपी मुख्यालय स्तर पर 50 की उम्र पार कर चुके नकारा व दागी इंस्पेक्टर, उपनिरीक्षक, दीवान व सिपाही को चिह्नित करने की प्रकिया चल रही है। 

अधिकार और पुलिस के बीच झड़प; महिला भीड़ पर यू पी पुलिस का कहर

लखनऊ। यूपी की राजधानी लखनऊ की सड़कों से बेहद हैरान कर देने वाली तस्वीरें सामने आईं हैं। लखनऊ के हजरतगंज इलाके में बीते 32 घंटे से राज्य कर्मचारी का दर्जा और मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहीं आंगनबाड़ी की महिला कार्यकर्ताओं को सड़कों से हटाने के लिए मंगलवार दोपहर पुलिस ने उग्र रुप धारण कर लिया।
पुलिस ने महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर जमकर लाठियां बरसा दीं। इतना ही नहीं अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रही महिलाओं को पुलिस ने सड़कों पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटा।पुलिस का ऐसा क्रूर रूप देख कर कुछ आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों ने उनसे लोहा लेने की कोशिश तो की लेकिन उन्हें निराशा और दर्द ही मिला। यूपी पुलिस के इस क्रूर कार्रवाई की वजह से कई कार्यकर्त्रियों को काफी चोटें भी आईं हैं।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ कर पार्क के एक कोने में समेट कर रख दिया। पुलिस की इस कार्रवाई से पूरे इलाके में भगदड़ मच गई। पुलिस की लाठियों से बचने के लिए लोगों में भगदड़ मच गई। प्राप्त ताज़ा जानकारी के मुताबिक माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है।
हालांकि इससे पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को मनाने के भरसक प्रयास किए गए थे। लेकिन वे हजरतगंज से नहीं हटीं। उनकी वजह से आज भी सुबह से जाम बड़ी समस्या बना रहा। बीती देर रात प्रदेश अध्यक्ष गीतांजलि मौर्या सहित 12 लोगों को गिरफ्तार किये जाने के बाद से आंदोलनकारी कार्यकर्त्रियां नारेबाजी करती रहीं।

फिलहाल एक तरफ से रास्ता खाली कराकर आवागमन शुरू करा दिया गया। गिरफ्तार सभी आंगनबाड़ी नेताओं पर 106 और 116 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अपने नेताओं की गिरफ़्तारी और मांगों को न माने जाने से नाराज इन लोगों ने नारेबाजी कर विरोध दर्ज कराया। मुख्यत: ये लोग अपना मानदेय बढ़ाए जाने के लिए विगत 36 दिनों से प्रदेश भर में धरने पर बैठे हैं। इन लोगों का कहना है कि अब बग़ैर लिखित आदेश के कुछ भी नहीं मानेंगे।

काशी की अंतरात्मा की आवाज का एक अध्याय बंद; गिरिजा देवी नहीं रहीं

गोकुल छोड़ मथुरा में छाये, किन संग प्रीत लगाये, तड़प तड़प जिया जाय

समय के साथ भागता संगीत भले ही ऊंचा और वैविध्यपूर्ण होता जा रहा हो, लेकिन वो उतना ही नकली हो चुका है जितना अब लखनऊ का चिकनकारी वाला कुर्ता. रंग भी है, काम भी है. सजावट भी और वही अर्धपारदर्शी अहसास. लेकिन आत्मा कहीं नहीं है. सब गाने निष्प्राण कंकालों की तरह झूलते नजर आते हैं. जिनपर आप अपने अवसाद और दंभ भुनाने के लिए नाच तो सकते हैं, सुकून नहीं पा सकते.
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि इस दौर मे योगेश प्रवीन जैसी हस्तियां ही लखनऊ की धूल मे छिपी इतिहास के करवट की सच्ची दास्तान या कथक की विरासत को अजुर्न मिश्र जैसे लोग जीवित रखे हैं।किन्तु धीरे-धीरे इसके परिस्थितकी तंत्र मे पनपी हुई विरासत शहर विस्तार का शिकार होने लगी है.
किसी आयोजन में गिरिजा देवी का आना और उन्हें गाते हुए सुन पाना. पान दबे गाल से एक खट्टी-मीठी टेर भरी वो आवाज़ जो अब शहरी महिलाओं के कंठ से सुनने को नहीं मिलती. जिसके लिए वापस लौटना ही पड़ता है गंगा की गोद में बसे इलाकों की ओर, गांवों की ओर या गांव को अपने पक्के मकानों में समेटे शहरों की ओर.
साफ है की भारत की महान हस्तियों को और दुनिया को काशी अपनी ओर क्यों आकर्षित करती रही  है इनके पीछे इन्ही विभूतियों का ही योगदान है.  
परंपराओं की गंध, मिट्टी का स्वाद और मां जैसे अपनत्व वाली ये आवाज़ थी गिरिजा देवी की. उनको गाते सुनता था तो मन करता था जाकर गोद में बैठ जाउं. एक शाम उन्हें सुन लो तो हफ्तों खुमारी छाई रहती थी. फिर कितने ही दिन उनके ऑडियो और यू-ट्यूब लिंक सुनता रहता था. इस शहर में जब-जब निराशा सिर पर नाचने लगती है, भीमसेन जोशी, किशोरी अमोनकर, गिरिजा देवी और कुमार गंधर्व ही ढांढस बंधाते हैं. राशिद ख़ान फिर से नए प्राण भरते हैं.
गिरिजा देवी की आवाज में जो ठहराव था और जो विश्वास, सच्चाई, वो लंबे संघर्षों से अर्जित हुआ था. परिवार, खासकर मां कभी भी इसके पक्ष में नहीं थीं कि वो सार्वजनिक रूप से जाएं और गाएं. वीणा वाली देवी को पूजने वाला यह समाज गाने वाली महिला को बहुत नकारात्मक दृष्टि से देखता है. लेकिन आत्मविश्वास और सच्चाई के जरिए गिरिजा हर प्रतिकूलता से लड़ती हुई गाती रहीं. यही उनकी आवाज की ताकत भी रही.
दरअसल, गिरिजा देवी की आवाज में एक टीस भरी टेर थी. यही टेर मुझे हर बार बिस्मिल्लाह खां की शहनाई में भी सुनाई दी. छन्नूलाल में यह गंवई या देसजपन नहीं है. वो मसान की होली में उड़ते फाग की तरह हैं. शिवमय, गंभीर और मीठे. लेकिन यह जो गले में बसी हुई शहनाई है न, केवल बेगम अख्तर और गिरिजा देवी को ही नसीब थी. अख्तरी बाई तो कब की अलविदा कह गईं, अब गिरिजा भी गवन बाद ससुराल चली गईं.
इस आवाज की ताकत और ठहराव को अब किसी और गले में खोज पाना मुश्किल काम है. बाकी लोग गाते हैं. कुछ उनसे सीखे या उनसे अनुशरण करने वाले भी हैं. लेकिन वो बात दूसरों में नहीं है. बाकी मधुर हैं, विविध हैं, सुगम भी. पर गिरिजा देवी जैसे गहरे, ठंडे, निर्मल और ठहराव कतई नहीं.
88 साल की उम्र में वे लगातार एक घंटे तक अपनी खनकती आवाज में गाती रहीं और और लोग मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे. मुझे सुर, राग और बारीकियों की कोई समझ नहीं है पर उनको सुनते हुए संगीत आपकी आत्मा तक पहुंचता है. गिरिजा जी की गायकी ने शास्त्रीय को हमेशा ही लोक के लिए सहज बनाया है. आप एक ही पंक्ति लेकर घर लौटते हैं लेकिन अपूर्ण नहीं बल्कि सम्पूर्णता के भाव के साथ. उस दिन मेरे साथ घर आयी थी- झनक झनक मोरी बाजे पायलिया.


विस्मृति, मनुष्यता का पाप है. गिरिजा जी ने हमेशा हमें इससे सतर्क किया. हमें हमारी स्मृतियों को बचाने की सीख देते हुए वो खुद एक स्मृति बन गयी हैं. मैंने उनके हर कार्यक्रम में ध्यान दिया कि प्रायः अपने प्रत्येक संगीत समारोह में वे कम समय में ही विविध राग सुनाया करती थी और कहा करती थीं की एक-एक राग गाने के लिए आधा-आधा घंटा समय चाहिए लेकिन यह उम्र गाने की नहीं सिखाने की है. बच्चों के लिए कुछ छोड़ जाने की है. इसीलिए वे कम समय में ढेर सारे राग गाती थी जिससे हम संगीत की अपनी विविधतापूर्ण विरासत से परिचित रह सकें.

गिरिजा देवी का जाना संगीत की एक परंपरा में से हमारे समय की अन्नपूर्णा के चले जाना जैसा है. काशी की कहानी बिना अन्नपूर्णा के पूरी नहीं होती. और अगर अन्नपूर्णा बिना अपनी छाया प्राण प्रतिष्ठित किए चली जाएं तो यह काशी का चला जाना है. सचमुच, संगीत परंपरा का एक काशी आज खो गया, सदा के लिए सो गया.

बनारस के परिचितों, मित्रों और 'कासीवासियों' से मिलते हुए इसपर हर बार चर्चा होती है कि काशी कहां जा रहा है. काशीनाथ सिंह अपने उपन्यास 'काशी का अस्सी' में कहते हैं कि काशी धीरे-धीरे अपनी हंसी, मस्ती खोता जा रहा है. धीरे-धीरे मर रहा है. वो शायद इसीलिए क्योंकि काशी से ठहराव खत्म होता जा रहा है. ठहराव के लिए ममत्व चाहिए और ममत्व के अंतिम प्रतिबिंबों में गिरिजा देवी प्रतिष्ठित नजर आती थीं. वो चली गईं तो काशी से एक आंचल छिन गया. अब ठहराव कहां. और बिना ठहराव के आनंद नहीं आता, न आती है प्रसन्नता. बस नाहक खीस निपोरी जा सकती है.
इसलिए गिरिजा देवी का जाना केवल संगीत की एक परंपरा का अवसान भर नहीं है. गिरिजा के साथ काशी का वो सबकुछ भी खत्म होता दिख रहा है जो हमें समय के चक्रवात में सबसे बेहतर संभाले रख सकता था. चैती, झूला, कजरी, ठुमरी और सोहर गाने वाले कुछ गले आसपास खोजने पर मिल भी जाएं तो गिरिजा वाली बात कहां से मिलेगी.

एक गिरिजा ही तो थीं. अकेले छन्नूलाल अब क्या-क्या संभालेंगे. काशी का अब क्या होगा?

हार्ट अटैक होने की आशंका को समझे और इसके दर्द से सतर्क हो जाये

 यदि आपकी डायबिटीज को दस साल से ज्यादा टाइम हो गया हो या आपको डायबिटिक रेटिनोपैथी हो, या फिर आपकी पेशाब में माइक्रो एल्ब्यूमिन की मात्रा बढ़ी हुई रहती हो तो आपको हार्ट अटैक होने की ज्यादा आशंका है. सो सबसे पहले आप जान लें कि कहीं आप इस हाई रिस्क ग्रुप में शामिल तो नहीं हैं.
अब दूसरे प्रश्न पर आते हैं. हार्ट अटैक का दर्द किस तरह का होता है? दरअसल दिल का दर्द दो तरह का होता है. एक वह दर्द जिसे एनजाइना कहते हैं और दूसरा वह जिसे हार्ट अटैक या मायोकार्डियल इन्फार्कशन कहते हैं. दोनों ही दिल के दर्द हैं पर दोनों का अंतर समझने के लिए आपको दिल तक खून पहुंचाने वाली रक्त नलिकाओं को जानना होगा.
दिल की तीन मुख्य नलियां होती हैं - दो दिल के बाएं तरफ और एक दिल के दाएं तरफ. इन्हें हम कोरोनरी आर्टरीज कहते हैं - राइट कोरोनरी आर्टरी और लेफ्ट कोरोनरी आर्टरी. बढ़ती उम्र तथा अन्य कई कारणों से इन रक्त नलिकाओं में अंदर धीरे-धीरे रुकावट पैदा होने लगती है. इनमें कोलेस्ट्रॉल जमने लगता है. नली सिकुड़ने लगती है. रक्त का प्रवाह कम होता जाता है. जब रक्त का प्रवाह एक निश्चित सीमा से भी कम हो जाता है, मान लें कि कोई नली 70% से ज्यादा बंद हो गई है तो आराम से बैठने पर तो कभी कोई तकलीफ नहीं होती परंतु हल्की सी मेहनत करने पर ही (पैदल चलने पर, खासकर कोई चढ़ाई चढ़ने पर या सीढ़ियां चढ़ने पर, वजन लेकर चलने पर) आदमी को दिल में दर्द महसूस होता है.

यह दर्द तेज नहीं होता, छाती में एक असहजता का अहसास या छाती में हल्का सा भारीपन या भरा-भरा सा लगता है. यह केवल पैदल चलने पर ही लगता है और जैसे ही रुकते हैं वैसे ही कुछ देर में यह एहसास खत्म भी हो जाता है. इसे एंजाइना कहा जाता है. यह हार्ट अटैक नहीं है. यह तो शरीर की तरफ से एक चेतावनी है कि भविष्य में कभी जब यह नली पूरी बंद हो जाएगी तो आपको हार्ट अटैक हो सकता है. यदि इस चेतावनी को समझ लिया जाए और इसका बराबर इलाज हो जाए तो आदमी हार्ट अटैक से बच जाता है. कभी-कभी आदमी की कोरोनरी नलिकायें बिना एंजाइना के सीधे ही पूरी बंद हो सकती हैं. तब सीधे ही हार्ट अटैक हो जाता है.
हार्ट अटैक का छाती का दर्द एकदम अलग किस्म का होता है जो एनजाइना से पूरी तरह अलग है. एंजाइना तो केवल मेहनत करने पर ही होता है. यह बैठे-बैठे नहीं होता. इधर हार्ट अटैक का दर्द अचानक ही कभी बैठे हुए भी हो सकता है. यह प्रायः बहुत तेज होगा, छाती के मध्य में होगा, पर यह ऐसा दर्द होगा जिसे आप एक जगह पिन पॉइंट नहीं कर सकेंगे. यह ऐसा तेज दर्द होगा जैसे छाती पर कोई भारी चट्टान रख दी गई हो. एक बोझ का एहसास या छाती के फटने की फीलिंग और साथ में दम सा घुटने का एहसास भी. साथ-साथ यह अहसास कि मानो जान ही जा रही हो. ऐसे दर्द के साथ प्रायः बहुत ज्यादा ठंडा पसीना आयेगा. यदि यह सब हो तो मानिए कि यह हार्ट अटैक का दर्द है.
वैसे, यह दर्द छाती के साथ-साथ प्रायः बाएं हाथ में भी महसूस हो सकता है. बांह जैसे फटने सी लगती है, खासकर अंदर की तरफ की बांह का हिस्सा. पर याद रहे कि यह दर्द बाईं की जगह दाहिनी बांह में भी हो सकता है, कंधे में आ सकता है, पीछे पीठ की तरफ जा सकता है, गर्दन में या दोनों जबड़ों में भी जा सकता है, या कभी-कभी तो यह कमर तक भी जा सकता है. तो ऐसा कोई भी छाती का दर्द जो भारीपन जैसा हो और जिस में बहुत पसीना आ रहा हो वह हार्ट अटैक का दर्द हो सकता है. और ऐसा दर्द यदि किसी डायबिटिक, ब्लड प्रेशर, मोटे आदमी, तंबाकू लेने वाले आदमी या ऐसे आदमी जिसके परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक हुआ हो - इनमें से किसी को भी हो, तब तो ऐसे दर्द के हार्ट अटैक होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है.
यहां इस मामले में एक पेंच हैं जिससे कई बार डॉक्टर भी ऐसे हार्ट अटैक को ठीक से नहीं समझ पाते और गलती कर देते हैं. पेंच यह कि यदि मरीज को डायबिटीज है तो कई बार हार्ट अटैक में कोई दर्द या तो होता ही नहीं या फिर बहुत हल्का होता है, या फिर दर्द न होकर कुछ और ही तरह के लक्षण पेश आते हैं. इससे भ्रम हो जाता है. कई अजीब से लक्षण हो सकते हैं. जैसे आधे घंटे से या एक घंटे से कुछ ठीक नहीं लग रहा है, चक्कर से लग रहे हैं, आंखों के सामने अंधेरा सा आ रहा है, बिना किसी कारण के थकान बहुत लग रही है, जरा सा चलने भारी थकान हो जा रही है. यह मान लें कि यदि एक डायबिटिक मरीज को कोई भी ऐसी नई तकलीफ अचानक ही हो जाये जो बस कुछ देर से ही हो रही हो, जो पहले कभी नहीं थी तब या तो उसकी शुगर कम हो रही है या फिर यह दर्द के बिना भी हार्ट अटैक हो सकता है.
वैसे और लोगों को भी बहुत तेज दर्द के बिना हार्ट अटैक हो सकता है या बहुत हल्के दर्द के साथ भी हार्ट अटैक हो सकता है और कई बार दर्द छाती में ना होकर केवल बाहों में, केवल कंधे में, केवल जबड़े या गर्दन में, या केवल पेट के ऊपरी हिस्से में हो सकता है. पेट के मामले में मरीज को लगता है कि आज गैस बहुत बन रही है, पेट फूला जा रहा है जैसा उसका कभी पहले फूला ही नहीं.
ये सब हार्ट अटैक के असामान्य प्रेजेंटेशन हैं जो आमतौर पर नहीं होते पर किसी-किसी में कुछ अलग हटकर भी हार्ट अटैक हो सकता है.वैसे ऐसा कम होता है. जब होता है तो डॉक्टरों से भी ऐसे में डायग्नोसिस कई बार मिस हो सकती है. पर ऐसे किसी दर्द को कतई नजरअंदाज ना करें क्योंकि हार्ट अटैक में एक-एक मिनट कीमती होता है. यदि कभी ऐसा कोई भी दर्द आपको भी हो तो देर मत कीजिएगा, एक एस्प्रिन लेकर तुरंत अस्पताल जाइएगा.

अगवा किशोरी के साथ सामूहिक बलात्कार;जौनपुर पुलिस आरोपियों की तलाश मे

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में एक किशोरी को अगवा कर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किए जाने का मामला प्रकाश में आया है. पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है. हालांकि अभी तक पुलिस के हाथ आरोपी व्यक्तियों का कोई सुराग नहीं लग पाया है.
यह शर्मनाक वारदात जौनपुर के सरपतहां थाना क्षेत्र की है. एक स्थानीय पुलिस अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि पीड़िता इंटर की छात्रा है. वह अपनी नानी के घर आई थी. रात को कुछ लोग जीप में सवार होकर आये और उसे अगवा कर अपने साथ ले गये. स्पष्ट है कि यह सुनियोजित था.
किशोरी ने पुलिस को बताया कि गांव में ही नहर के पास ले जाकर चार लोगों ने उसके साथ बलात्कार किया. घटना के बाद किशोरी आरोपियों के चंगुल से किसी तरह छूटकर एक घर में जाकर घुस गई और वहां मौजूद लोगों को उसने आपबीती सुनाई.
तब इस बात की सूचना पुलिस तक पहुंची. किशोरी को अस्पताल में दाखिल कराया गया है. पुलिस के अनुसार मामले की छानबीन की जा रही है. घटना को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय पुलिस खोजी कुत्तों की मदद से आरोपियों की तलाश कर रही है.
इस बीच पुलिस अधीक्षक के.के. चौधरी ने बताया कि पीड़िता के परिजनों ने घटना की तहरीर दी है, परंतु सामूहिक दुष्कर्म का कोई जिक्र उसमें नहीं है. तहरीर में अगवा करने का मामला बताया गया है. मामले की जांच चल रही है और दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार कर लिया जायेगा.


रघुराम राजन ‘सख्त’ थे, तो मौजूदा गवर्नर उनसे अलग कैसे हैं?

अपनी सख्त मौद्रिक नीति से महंगाई थामने की भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की कोशिश लगातार रंग दिखा रही है. पिछले हफ्ते घोषित आंकड़ों के अनुसार सितंबर में खुदरा महंगाई दर को बताने वाले सूचकांक यानी सीपीआई में केवल 3.28 फीसदी की वृद्धि हुई. इससे वित्त वर्ष 2017-18 की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) में खुदरा महंगाई की औसत दर केवल 2.6 फीसदी रही. यह खुदरा महंगाई पर आरबीआई के अनुमान (दो से 3.5 फीसदी) की अधिकतम सीमा से करीब एक फीसदी कम है.
इसके पीछे  का अतीत देखे तो सख्त गवर्नर की छवि वाले रघुराम राजन ने जनवरी 2015 से अप्रैल 2016 के बीच केवल 15 महीनों में इन दरों में क्रमश: 1.5 और एक फीसदी की कमी की थी. 
यह हैरान करने वाली बात है कि जो आलोचक राजन की मौद्रिक नीति की आलोचना करते नहीं थकते थे, उनकी निगाह से उर्जित पटेल की नीति पर कैसे अभीतक परीक्षण नहीं हुआ है? विचारणीय विषय है. 

कई आलोचक इसका श्रेय आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल की सख्तमौद्रिक नीति को दे रहे हैं. लेकिन यह उन्हें गवर्नर बनाए जाते वक्त (सितंबर 2016) उनसे लगाई गई उम्मीदों के विपरीत है. तब सरकार को उनसे उम्मीद थी कि वे मौद्रिक नीति को नरम करेंगे जिससे सस्ती दर पर कर्ज मिल सके. लेकिन पिछले तेरह महीनों में उन्होंने रेपो और रिवर्स रेपो दरों में केवल आधा और चौथाई फीसदी की कमी की है.

आल अलाइ फाउण्डेशन की दीपावली गरीब बच्चो के साथ

ऑल अलाइ  फाउण्डेशन  ने आज  शकुंतला मिश्रा  विश्व विद्यालय लखनऊ  स्थानीय  गरीब बच्चो  को  दीपावली  के अवसर पर मिठाई  का वितरण किया। यह सब स्थानीय  गरीब  बच्चे।  इस  कार्य  में तमाम प्रोफेसर व अन्य  लोगो द्वारा  सहयोग धनराशि  चंदे के रूप  में  दी  गई थी। 
इस कार्यक्रम के  मुख्य आकर्षण थे  -- इन  बच्चो  को दैनिक प्रयोग  की सामग्री मंजन ,ब्रश ,सबुन, दिये  आदि  वितरण किया  जाना । इस  कार्यक्रम  को सिर्फ  उन लोगो  को समर्पित किया गया था जो मजदूरी आदि से अपना भरण पोषण  करते है।अब्दुल्ला चौधरी व् अन्य इस कार्यक्रम में शामिल हुए।  
इस कार्यक्रम  में अंग्रेजी  साप्ताहिक अख़बार 'दी बंट लाइन' के  संपादक क्षितिज कांत भी शामिल होकर इन सामग्री के वितरण में सहयोग दिया।   

साम्प्रदायिक बवाल, पथराव और आगजनी के बीच यूपी का बलिया

यूपी के बलिया जिले के रतसड़ कस्बे में दो बुधवार को दो समुदाय आमने-सामने आ गए। इस दौरान जमकर पथराव और आगजनी हुई। दर्जनों दुकानों में तोड़फोड़ की गयीं और दो घरों में आग लगा दिया गया। सूचना मिलते ही कई थानों की फोर्स लगाकर हालात को काबू में किया गया। जिलाधिकारी सुरेन्द्र विक्रम सिंह ने कहा है कि अब हालात सामान्य हैं। लापरवाही बरतने के आरोप में चौकी इंचार्ज को निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, दो लोगों पर रासुका और गैंगस्टर के तहत कार्रवाई की जा रही है। बता दें कि महज 10 दिनों में यह दूसरा मामला है जब बलिया जिले में दो समुदायों के बीच बवाल हुआ है। पुलिस के मुताबिक अब इलाके में शांति बनी हुई है पर गांव में तनाव की बात कही जा रही है बताया गया है कि बलिया जिले के गड़वार थानाक्षेत्र के रतसड़ कस्बे में बुधवार को हुए बवाल की शरुआत एक दिन पहले हुई मामूली घटना से हुई। रतसड़ में मंगलवार को बाइक व साइकिल की टक्कर के बाद दोनों पक्षों की ओर से मारपीट हुई थी। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाकर समझा बुझा दिया। इसके बाद दोनों पक्ष फिर भिड़ गए। इसमें घायल युवक को तत्काल पहले नजदीक के अस्पताल भेजा गया। वहां से उसे जिला अस्पताल के लिये रेफर कर दिया गया। प्रशासन के मुताबिक इस दौरान किसी तरह ये बात फैल गई कि घायल को अधिक चोटें आयी हैं और उसकी हालत चिंताजनक है। हालांकि दूसरी ओर कुछ लोगों का यह भी कहना है कि अस्पताल में पुलिस केस कहकर इलाज से मना कर देने को लेकर उन लोगों की नाराजगी बढ़ गयी। इसके बाद नाराज लोगों ने कस्बे में सड़क जाम कर दिया। प्रशासन के मुताबिक इसी में से कुछ उपद्रवी लोगों ने तोड़फाड़ किया। दो मकानों में आगजनी की और कई ठेले उलट दिये। इस मामले में 20 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। दो विशेष रूप से चिन्हित हुए हैं उन पर एनएसए और गैंग्स्टर लगाया जाएगा।


रिहाईमंच ने रविवार को कहा है कि 10 अक्टूबर को शाम के वक़्त में अरविंद राजभर और रिंकू के बीच साइकिल.मोटरसाइकिल की टक्कर के बाद तनाव बढ़ा और दूसरे दिन गांधी आश्रम चौरहे पर हो रहे धरने से उड़ी अफवाह की हिन्दू युवक की मौत हो गई के बाद मुस्लिम दुकानों.मकानों पर हमला, लूट.पाट और आगजनी की गई। दंगाइयों ने डॉ मोहम्मद बिस्मिल्लाह के क्लिनिक पर भी हमला किया।
‌रतसर की ठठेरी गली, सदर बाजार, पकड़ी तर के तीन मकान.दुकान समेत दसियों दुकानों को पूरी तरह से लूट के बाद आतताइयों ने तहस.नहस कर दिया। हिदायततुल्ला खान के दो मंजिला मकान में स्थित पैतृक कपड़े की दुकान और रिहाइश को जहाँ लूटपाट कर आग के हवाले किया वहीं मुहम्मद शमीम के सीमा जनरल स्टोर के दो मंजिला होलसेल के गोदाम और स्टोर को भी लूटपाट के बाद आग के हवाले कर दिया। राजू रेडीमेड को भी इसी तरह से खाक कर दिया दंगाइयों ने
गांधी आश्रम चौराहे पर आगे फलों की दुकानों को लूटते हुए सैकड़ों की संख्या में पेट्रोल, लाठी.डंडों, रंभा.लोहे के राड से लैस जुलूस रतसर मुख्य बाजार में प्रवेश करते हुए पहले से चिंहित मुस्लिमों की बड़ी.बड़ी दुकानों निशाना बनाया।
पकड़ी तर पर स्थित दानिश नफीश की कोहिनूर मोबाइल तो उन्हीं के भाई डंपी की सेंट्रल बैंक के पास न्यू कोहिनूर मोबाइल की दुकान को पूरी तरह से लूट लिया। कमाल खान के जिम] नईम अंसारी के हिन्द वॉच] अख्तर नवाज के जनरल स्टोर समेत कई दुकानों पर लूटपाट की।
रिहाई मंच ने दावा किया है कि 20 किलोमीटर दूर सिंकन्दरपुर की आग ठंडी भी नहीं हुई थी कि रतसर को भी साम्प्रदायिक तत्वों ने आग में झोंक दिया। सिंकन्दरपुर में साम्प्रदायिक तत्वों के खिलाफ करवाई न होने के चलते साम्प्रदायिक तत्वों का मनोबल बढ़ा। सत्ता संरक्षण में प्रशासन के उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में मुस्लिमों के दुकानों में की गई लूटपाट और आगजनी। पीड़ितों की पुलिस एफआईआर नहीं दर्ज कर रही है।


हरदोई में लड़की को अगवा कर उसके साथ गैंगरेप

हुमा मुबीन: हरदोई  
उत्तर प्रदेश की राजधानी से मात्र 100 किलोमीटर दूर हरदोई के लोनार कोतवाली क्षेत्र में एक लड़की को अगवा कर उसके साथ गैंगरेप किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इतना ही नहीं दरिंदों ने पीड़िता के साथ हैवानियत की सारी हद पार करते हुए उसके प्राइवेट पार्ट पर नुकीली चीज़ से हमला किया है। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस केस दर्ज करके इस मामले की जांच कर रही है।
जानकारी के अनुसार, हरदोई जिले के लोनार कोतवाली क्षेत्र में रहने वाली पीड़िता की मां की अचानक तबियत खराब होने पर पिता उसे अस्पताल ले कर गए थे। इस दौरान घर में पीड़िता अकेली थी, लेकिन जब पीड़िता के परिजन घर वापस आए तो देखा कि उनकी बेटी नहीं है। देर रात तक बेटी के नहीं आने पर पीड़ित परिवार इसकी सूचना लोनार पुलिस को दी।
इसके बाद भी किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं होने पर लड़की का पिता सुबह तहरीर लेकर थाने गया। वहां पुलिस उन्हें शाम तक थाने में ही बैठाए रखा और बाद में बिना रिपोर्ट दर्ज कर वापस घर भेज दिया। शाम को जब पीड़िता का पिता घर पहुंचा तो पता चला कि लड़की घर आ गई है। उसके बाद पीड़िता ने अपने साथ हुई दरिंदगी की दास्तान परिजनों को बताई।
पीड़िता के मुतातबिक, वह घर में अकेली थी, तभी दो लोग अकेले का फायदा उठाकर उसे जबरन वाहां से उठा ले गए। उन लोगों ने उसके साथ गैंगरेप किया. दरिन्दों ने लड़की के प्राइवेट पार्ट पर नुकीली चीज से हमला भी किया. चीखने पर पीड़िता के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया गया, आंख पर पट्टी और हाथ-पांव बांध कर बांस के झाड़ में फेंक दिया गया। किसी तरह इनके चंगुल से छूटकर घर पहुंची।

पिता ने जब पुलिस को बताया तो उसे ही फर्जी मामले में फंसाने की धमकी दे डाली गई। जब युवती की हालत बिगड़ी तो उसे महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद महिला थाने में पीड़िता के पिता द्वारा दी गई तहरीर पर गांव के ही उदयभान और नन्हे के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया गया है। पुलिस इस मामले की जांच में जुट गई है।

इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में समाजवादी छात्र सभा का वर्चस्व कायम



अवनीश कुमार यादव अध्यक्ष इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय


इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में चार पर समाजवादी छात्र सभा व एक पद पर एबीवीपी का कब्जा हुआ है। इस चुनाव के परिणम बड़े अप्रत्याशित है। अध्यक्ष -अवनीश कुमार यादव ( समाजवादी छात्र सभा) उपाध्यक्ष - चंदशेखर चौधरी (समाजवादी छात्र सभा) महामंत्री - निर्भय कुमार द्विवेदी(एबीवीपी)  संयुक्त सचिव - भरत सिंह (समाजवादी छात्र सभा) सांस्कृतिक सचिव - अवधेश कुमार पटेल (समाजवादी छात्र सभा) इस चुनाव के दौरान जहां एबीवीपी के चुनावी प्रत्याशी ध्राशयी हुए हैं वहां पर मात्र एबीवीपी के महामंत्री पद के प्रत्याशी ही अपनी सीट बचान मे सफल हुए है। अन्य सभी सीटों पर समाजवादी छा़़त्रसभा ने अपना वर्चस्व कायम रखा है।

हिमाचल प्रदेश में आचार संहिता तो लागू -- गुजरात में नहीं: आश्चर्यजनक! सीपीएम ने कहा

गुजरात चुनाव को लेकर चुनाव आयोग फिलहाल राजनीतिक दलों के निशाने पर घिरा हुआ है. साल के आखिर तक देश के दो राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. गुजरात और हिमाचल प्रदेश में. निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को चुनाव की तारीखें घोषित कीं, किन्तु यह सिर्फ हिमाचल प्रदेश के लिए है।
 गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित नहीं की गईं. चुनाव आयोग के इस कदम से सभी राजनीतिक पार्टियां अब चुनाव आयोग पर सवाल उठाने लगी हैं और इन पार्टीयों का आरोप हैं कि चुनाव आयोग भेदभाव कर रहा है।
 वामपंथी दल कम्यूनिष्ट पार्टी(मार्क्स) ने बयान जारी कर चुनाव आयोग पर सवाल उठाएं हैं।  सीपीएम पोलित ब्यूरो ने कहा कि, "यह तो और भी आश्चर्यजनक है, क्योंकि गुजरात में चुनाव अगर 18 दिसंबर तक पूरे होने हैं तो गुजरात में भी आचार संहिता लग जानी चाहिए।"
 यह आश्चर्य करने वाली बात है कि चुनाव आयोग ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान तो कर दिया, लेकिन गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीख टाल दी।
उन्होंने कहा, "सामान्यता अगर किन्हीं दो राज्यों में विधानसभा चुनाव छह महीनों के भीतर तय हों तो उन राज्यों में चुनाव की तारीख की घोषणा एक साथ होती है और दोनों राज्यों में एकसाथ आचार संहिता एक ही दिन से लागू होती है। अब तक ऐसा ही होता आया है. हिमाचल प्रदेश में आचार संहिता तो लागू हो गई है, लेकिन गुजरात में स्थिति ऐसी नहीं है और गुजरात में आचार संहिता लागू नहीं की गई।"