UPBIL/2018/70352

लखनऊ शहर में झूठ और नफरत की राजनीति को समाप्त करना है :आचार्य प्रमोद कृष्णम कांग्रेस उम्मीदवार


 

आचार्य प्रमोद कृष्णमलखनऊ लोकसभा से कांग्रेस प्रत्याशी,की सलेमपुर हाउसबारादरी में बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि मैं शुक्रगुजार हूं राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी जीराष्ट्रीय महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी जी काकि उन्होने गंगा-जमुनी तहजीब से सराबोर लखनऊ शहर की रज को मुझ जैसे सामान्य व्यक्ति को अपने माथे पर लगाने का अवसर प्रदान किया।
उन्होंने कहा हम लखनऊ शहर में झूठ और नफरत की राजनीति को समाप्त करने व् प्यार और आपसी सदभाव की राजनीति करने आये हैं। कोई भी लड़ाई अहंकारतोप और तलवार की ताकत से नहीं लड़ी जाती है लेाकतंत्र की लड़ाई हौसलांेजज्बातों और आत्मविश्वास से लड़ी जाती है।महाभारत के युद्ध में भी कौरवों के साथ बहुत बड़े-बड़े धुरंधर योद्धा थे और पाण्डवों के साथ भगवान श्रीकृष्ण और सत्य था। 
उन्होंने कहा आज भी इस चुनावी महासंग्राम में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के साथ धनबल और अहंकारी ताकतें हैं हमारे साथ कांग्रेस पार्टी की नीतियांजनता का विश्वास और उनका प्यारकांग्रेस कार्यकर्ताओं की इच्छाशक्तिवरिष्ठ नेताओं का आर्शीवाद है। 
उन्होंने आगे कहा आज लखनऊ की धरती इस जुमलेबाज सरकार की पार्टी के प्रत्याशी से पूछना चाहती है कि पिछले बीस वर्षों से लखनऊ मंे काबिज होने के बावजूद आज लखनऊ पश्चिम के चौक क्षेत्र में सीवर लाइन क्यों नहीं है
आज जनता जवाब चाहती है बड़े-बड़े दावों के बावजूद भी राजधानी की 95 किमी सड़कें गड्ढायुक्त क्यों हैं
आज भी इन्दिरा नगर के निवासी गंदा पानी पीने को मजबूर क्यांे हैं
पहली ही बरसात में लखनऊ के अधिकतर इलाके बड़े तालाबों में तब्दील क्यों हो जाते हैं
और खदरा जैसे इलाके में महामारी कैसे फैल जाती है? सीतापुर रोड के पूर्वी किनारे पर बसी कॉलोनी में पेयजल सप्लाई क्यों नहीं है एवं सीवर लाइन क्यों नहीं डाली गयी ?
कांग्रेस सरकारों द्वारा बनायी गयी फैक्ट्रियां जैसे अपट्रानस्कूटर इंडिया आज बंद क्यों खड़ी हैं
इन सवालों का जवाब भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी से जनता पूछ रही है और हमारे घोषणापत्र पर इसलिए विश्वास कर रही है क्योंकि हमने अपनी पिछली सरकारों में जो भी वादा किया उसे पूरा किया है। 
श्री राहुल गांधी जी ने जो मध्य प्रदेशछत्तीसगढ़ और राजस्थान के किसानों से कर्जमाफी का वादा किया हमने करके दिखाया है 
आज जब हम वादा कर रहे हैं गरीबी पर अंतिम प्रहार करने का, 20 करोड़ आबादी के हर गरीब परिवार को हर वर्ष 72 हजार रूपये देने काजनता हम पर विश्वास कर रही है। 
जब हम किसानों से वादा करते हैं लाख रूपये कर्ज माफ करने का तो किसान हम पर विश्वास कर रहा है 
जब हम बेरोजगार नौजवानों को खाली पड़ी 22 लाख नौकरियों को देने का वादा कर रहे हैं वह हम पर विश्वास कर रहे हैं। 
यही कारण है कि आज भारतीय जनता पार्टी और संघ जैसे षडयंत्रकारी संगठन की पेशानी पर बल पड़ रहा है। 
सूत्रों की जानकारी है कि हमारे ऊपर हमले भी हो सकते हैंअफवाहें भी फैलायी जा सकती हैंहम सबको मिलकर इस षडयंत्र को नाकाम करना होगा। 
एक-एक साथी को घर-घर जाकर भारतीय जनता पार्टी के विश्वासघात और हमारे संकल्प पत्र के वादों पर विस्तार से बात करनी होगी।
कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि हम आपके शहर में मेहमान नहीं हैं। जिस तरीके से लखनऊ ने हमें अपना प्यार दिया है हम शहरवासियों को विश्वास दिलाते हैं कि हम अपनी अंतिम सांस तक लखनऊ की खिदमत करते रहेंगे। 
कांग्रेस पार्टी ने कभी भी भारतीय जनता पार्टी की तरह वादाखिलाफी की नीति नहीं रखी है। 
ये झूठे लोग हैं और झूठ एवं नफरत की राजनीति करते हंै। 
हम विश्वास के साथ वायदे करते हैं इंसानियत पर विश्वास करते हैं। हम हिन्दू या मुसलमान नहींबल्कि एक इंसान हैं। ईमानदारीप्यार और विश्वास ही हमारा गहना है। हम लखनऊ शहरवासियों से मतसमर्थन और विश्वास हासिल करने आये हैं और इसके लिए हम आपके आभारी रहेंगे। 



कांग्रेस का रोड शो, क्या कुछ कहता है?

एक झलक ग़ज़िआबाद  रोड शो  की ; प्रियंका  गाँधी  एवं डॉली शर्मा 

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं पूर्वी उ0प्रकी प्रभारी श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा जी ने एक दिन के कार्यक्रम के दौरान आज गाजियाबाद में भव्य रोड शो किया।

जहां से भी प्रियंका गांधी का काफिला गुजरा हर तरफ आम जन सड़क उत्साहित पर खड़े रहे और बहुमंजिली इमारतांे से भीड़ पुष्पवर्षा से स्वागत कर रही थी। 
कहीं पर श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा जी सहजता एवं सरलता के साथ लोगों से बातें करती हुई उनके दुख-दर्द को समझती नजर आयीं तो कहीं महिलाओं के साथ शेल्फी लेती हुई दिखीं। 
कार्यक्रम के आरम्भ में गाजियाबाद से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की उम्मीदवार डाॅली शर्मा ने दिल्ली-उ0प्रसीमा पर स्थित एलीवेटेड रोड पर  प्रियंका गांधी का स्वागत कर रिसीव किया। 

यह काफिला शहीद भगत सिंह चौक पर उनकी मूर्ति को  माल्यार्पण एवं श्रद्धासुमन अर्पित कर घण्टाघर मेन मार्केट होते हुए रमतेराम रोड से गुजरा और डासना गेट जा पहुंचा जहां पर हजारों की संख्या में मौजूद स्थानीय महिलाओंपुरूषों एवं विशेषकर युवा प्रियंका के लिए नारों से भव्य स्वागत किया गया। 
प्रियंका गाँधी ने जटवाड़ा होते हुए मालीवाड़ा चौक पर पहुंचकर एक जनसभा को सम्बोधित किया।जनसभा को सम्बोधित करते हुए श्रीमती प्रियंका गांधी ने कहा कि पीएम मोदी दुनिया भर का दौरा करते हैं जापान गये वहां गले लगेपाकिस्तान गये वहां बिरयानी खायीचीन गये वहां गले लगे लेकिन वाराणसी में उन्हें किसी ने भी किसी गरीब परिवार से गले लगते नहीं देखा।
उन्होने कहा कि, ‘‘यह सिर्फ प्रचार की सरकार है। इनके प्रचार से धोखे में मैं भी आ गयी थी किन्तु 15 दिन पहले जब वाराणसी गयी तो सोचा कि मोदी जी ने बहुत काम किया होगालोगों के बीच गए होंगेमगर वहां के लोगों ने मुझे बताया कि मोदी जी ने बड़ी-बड़ी रैलियों के अलावा कुछ नहीं किया।
उन्होने कहा कि अगर पीएम मोदी ने काम किया है तो अपनी उपलब्धियां गिनायें। 
उन्होने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री देश के लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं। कोई भी सवाल करता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जा रही है चाहे वह नौजवान हैकिसान हैआशा बहू है या शिक्षा मित्र है। किसानों पर गोलियां बरसायी गयीं और छोटे व्यापारियों को जीएसटी के कारण तबाह और बर्बाद कर दिया गया। 
दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी की राजनीति है जो गरीबों के लिए न्याय की बात करती है, 72 हजार रूपये हर साल देने की बात करती हैभाजपा की नकारात्मक राजनीति से देश का भला नहीं हो सकता इसलिए युवाओं एवं महिलाओं को आगे आने का आवाहन किया। 

बाल कल्याण सिमिति ने स्ट्रीट चिल्ड्रन को बचाव प्रशिक्षण दिया


स्ट्रीट चिल्ड्रन को अगर प्रशिक्षण दिया जाये तो वो क्या नहीं कर सकते ऐसा एक जलवा देखने को मिल रहा है, लखनऊ में सहभागी शिक्षा केंद्र परिसर में जहाँ समाज सेवी चेतना संस्था और एचसीएल फाउंडेसन के संयुक्त तत्वाधान में लगभग 70 ऐसे बच्चे जो की सड़क एवं झुगियो में जीवन यापन करते है, उनको एक अनोखा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में बाल अधिकार, शोषण से बचना और विभिन स्टेक होल्डर्स की कार्य प्रणाली के बारे में बताया जा रहा है,
इस प्रशिक्षण में बताया जा रहा है कि विशेष किशोर पुलिस इकाई कैसे काम करती है, बाल कल्याण सिमिति, चाइल्ड लाइन और बाल आयोग बच्चो की कैसे मदद करते है।
संस्था के निदेशक श्री संजय गुप्ता ने बताया कि बच्चो के साथ प्रशिक्षण करने के लिए हमें बच्चो के स्तर पर आना पड़ता है , इस लिए प्रशिक्षण में खेलकूद, नाटक ,सेमिलेसन आदि करके बच्चो का उत्साह बढ़ाया जा रहा है।
विकास नगर में रहने बाली बच्चो की लीडर काजल का कहना है की यहाँ पर मेरे को जानकारी मिली है अगर कोई मेरे साथ बतमीजी करे तो कैसे चाइल्ड लाइन, बाल कल्याण समिति से मदद लेनी है, कहाँ और कैसे पुलिस का प्रयोग करना है। 11 साल के रवि ने वहाँ उपस्थित सभी लोगो का अपने सुन्दर डांस से मन मोह लिया।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि धीरेन्द्र सिंह सचान (spl Secy u.p. Gov ),DPO और एचसीएल फाउंडेसनसे सिमी , अरुणिमा अदि लोग उपस्तिथ रहे।

मर्द को दर्द नहीं होता रीव्यू: ज़रूर देखें!

मर्द को दर्द नहीं होता रीव्यू: ज़रूर देखें!

mard ko dard nahi hota
जब मैंने पिछले साल एक फिल्म फेस्टिवल में पहली बार मर्द को दर्द नहीं होता  देखी, तो मुझे माटुंगा के एक फिल्म दीवाने के पॉप कल्चर अंदाज़ में छुपे नासमझी भरे अतीत को देखने में काफ़ी मज़ा आया।
फिर मैंने इसे दुबारा देखा, और मुझे लगा कि सचमुच इसे ही कहते हैं फिल्म मेकिंग की बिल्कुल ओरिजिनल सोच।
डायरेक्टर वासन बाला का दिमाग़ सपनों की एक दुनिया है, जहाँ बचपन की सुनहरी यादें एक अद्भुत वास्तविकता के साथ सामने आती हैं।
वो हमें ऐसी चीज़ें दिखाते हैं, जो पहले भी हमारे बीच थीं, लेकिन उन्हें दिखाने का तरीका इतना अनोखा होता है, कि उस चीज़ को देखने का हमारा नज़रिया ही बदल जाता है।
साथ ही वो कहानी के साथ जाने वाला मस्ती भरा, मज़ेदार म्यूज़िक पसंद करते हैं।
हालांकि मर्द को दर्द नहीं होता  में कई फिल्मी पहलुओं के लिये सम्मान जताया गया है लेकिन एक फैनबॉय की कलाकारी के रूप में इन्हें फिल्म में बेहद मज़ेदार और हास्यपूर्ण तरीके से दिखाया गया है। हम सभी सिनेमा प्रेमी जानते हैं कि फिल्मों का शौक ज़िंदग़ी के शुरुआती दिनों में शुरू होता है, और ज़िंदग़ी भर रहता है।
बच्चन हो या ब्रूस ली, एक फिल्म-दीवाने का अपने फिल्म मसीहा के लिये विश्वास अटूट होता है।
बाला ने इसी अटूट विश्वास को एक मर्द की कहानी में दिखाया है, जो हर बार चोट लगने पर 'आउच' की आवाज़ निकालता है, क्योंकि उसे एक पुरानी बीमारी है - उसे लगता है उसे दर्द नहीं होता।

यह एक कहानी बयाँ करने वाला शीर्षक है और मनमोहन देसाई की मर्द में बिग बी के जाने-माने डायलॉग का ख़ूबसूरत इस्तेमाल है।
जब हम सूर्या (अभिमन्यु दसानी) की पहली झलक देखते हैं, तो मुंबई के सबर्ब्स का ये लड़का स्लो मोशन में उसकी तरफ पागल सांड की तरह बढ़ते गुंडों से अकेला लड़ता हुआ दिखाई देता है।
न्यूकमर अभिमन्यु अपने भीतर भरी ज़िंदादिली के साथ-साथ नयेपन और सादग़ी की एक ख़ूबसूरत झलक देते हैं।
स्पोर्टिंग मरून ऐडिडास और ब्लू ऑनिट्सुका टाइगर शूज़ के साथ एक फैशनेबल पहली झलक के बीच चिरंजीवी 1990 के दशक के मशहूर गाने के लिये तैयार होते दिखाई देते हैं। रजनीकांत और कमल हासन भी आते हैं और अंजाने में फैन थ्योरीज़ के बारे में मज़ेदार बातें बताते हैं।
स्कूल के लड़के सूर्या के सीन्स में पुरानी फिल्मी झलकियों की कोई कमी नहीं है, जो स्टीमपंक पायलट जैसे कपड़े पहनता है और हाइड्रेशन बैकपैक लेकर चलता है, गोविंदा और चंकी पांडे की फिल्मों की लड़ाई के नारे लगाता है, अपने खतरनाक ज्योमेट्री बॉक्स में विध्वंसक हथियार रखता है और बचपन में एक लड़की से दोस्ती करता है, जिससे उसका धर्म और उनके पिता उन्हें अलग कर देते हैं।
इस अनोखी बीमारी के पीछे चलती कहानी भले ही उसे सुपरहीरो न बना पाये, लेकिन ज़्यादातर मार्शल आर्ट्स मूवीज़ की वीएचएस टेप्स देख-देख कर उसमें जाँबाज़ी भर गयी है और वो खुद को लोगों का रक्षक मानने लगा है।
फिल्मों से दूर रहना उसके लिये क्रिप्टोनाइट की तरह है, लेकिन उसके चिंतित पिता जब उसपर लगाम लगाते हैं तो उसकी पीटर पैन वाली उत्सुकता घटने की जगह और बढ़ जाती है।
सूर्या के आजोबा (महेश मांजरेकर का बहुत ही प्यारा किरदार) का उदार पालन-पोषण उसे हर चीज़ सिखाता है, उसके लड़ाकू सपनों (असभ्य कोड वर्ड्स में) से लेकर लड़कपन की चाह (सहे-ली वाले सुझावों में) तक, उनके बीच की बातचीत मर्द को दर्द नहीं होता  में मस्ती का नया रस घोल देती है।
कहानी और भी मज़ेदार हो जाती है जब सुप्री के रूप में राधिका मदन फ्रेम में आती हैं।
नयी और पुरानी नखरेवाली  की तर्ज पर दिया गया उसका परिचय उसके गुस्सैल स्वभाव को बख़ूबी बयाँ करता है, जिसकी झलक वो छेड़खानी करने आये कुछ गुंडों की पिटाई करके देती है और सूर्या के साथ-साथ दर्शक भी हक्के-बक्के रह जाते हैं।
वह सीन बड़ा ही प्यारा है जिसमें वो बेहद खुशी के साथ बताती है कि खुजली करने में कितना मज़ा आता है।
बचपन के बिछड़े दोस्तों के जवानी में दुबारा मिलने की इस कहानी में मेलोड्रामा का न होना बाला के ख़ास अंदाज़ की झलक देता है।
ऐसा नहीं है कि मर्द  साहस दिखाने से दूर भागता है। बल्कि मर्द तो अपनी बीमारियों, कमज़ोरियों, कमियों को मानता है और इन सभी को दूर करके बदलाव लाने के लिये तैयार रहता है।
जैसे मदन एक जिज्ञासु विरोधाभास है।
गलत काम करने वालों की हड्डी-पसली एक करने में माहिर एक कराटे एक्सपर्ट, जो अपनी बीमार माँ के इलाज के लिये अपने एनआरआइ आशिक के बर्ताव को झेलती है।
मैं कुछ भी नहीं हूं, एक दिल छू लेने वाले सीन में वो अपनी माँ (गंभीर पल को संजीदग़ी से अदा करती लवलीन मिश्रा) से कहती है।
लेकिन वो है, और यह बात मणि को पता है।
गुलशन दवैया की एक पैर वाली कराटे इन्स्ट्रक्टर और उसकी बदमाश जुड़वाँ बहन जिमी मर्द को दर्द नहीं होता  के सबसे बड़े ट्रम्प कार्ड हैं। दोनों पर बाला का पूरा ध्यान उनकी हरफनमौला काबिलियत के साथ-साथ अपने किरदारों के लिये ऐक्टर के भीतर से सही हाव-भाव को बाहर लाने की क्षमता को दिखाता है, जो आपको डायरेक्टर के रूप में उनकी पहली फिल्म पेडलर्स  में भी दिखाई देता, अगर वह फिल्म रिलीज़ हो पाती।
एस पी बालासुब्रमण्यम के प्लेबैक के अनोखे अंदाज़ के साथ मणि और जिम्मी के बीच की दुश्मनी की शुरुआत के पीछे की धमाकेदार कहानी मज़ेदार तरीके से दिखाई गयी है।
करन कुलकर्णी के गाने चिल्लाहट की तरह हैं, और फिल्म के पूरे 137 मिनट अलग-अलग भावनाओं के साथ गूंजते रहते हैं।
बाला ने एक इतनी अजीबोग़रीब, लेकिन बारीकी से भरी दुनिया बनाई है, जो शायद ही हमने पहले कभी देखी हो (हीरो को विलेन का पता मांगते हमने पिछली बार कब देखा था?)
दो बहनों के बीच बढ़ती दुश्मनी की दीवार हो, रीडेवलपमेंट के लिये अधूरी छोडी गयी इमारत पर मिलने वाले दोस्त हों, एक सिक्योरिटी सर्विसेज़ की इमारत के भीतर हँसाने वाला ऐक्शन सेट पीस हो, जिसके बुज़ुर्ग रखवाले मामा एमटीवी वाले दिनों की याद दिलाते हों या फिर फार्ट ज्ञान से शुरू होने वाला एक अनोखा रॉयल रम्बल हो, मर्द को दर्द नहीं होता  में हर कदम पर आपको सच और सपनों का संगम दिखाई देता है।
वासन बाला ने पूरे दिल से इसे बनाया है।
लोग सीढ़ियों से फँस कर गिर रहे हैं, गाड़ियों से टकरा रहे हैं, अपनी हथेलियाँ काट रहे हैं, होंठ छिल रहे हैं, खौलता पानी पी रहे हैं, लेकिन दर्द आपको ज़रूर दिखाई देगा।
और इस बात को फिल्म बनाने वाले से बेहतर कौन जानता है।
जैसा कि चिरंजीवी ने उस फ़्लैशबैक में कहा था, 'इट्स अ चैलेंज!

संवेदन बनाम गैर-संवेदन रिश्तों के मध्य एक राजनेता का अंत

  SD DESUZA; PANJI
गोवा के नए मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत आज विधानसभा में बहुमत परीक्षण का सामना करेंगे. उससे पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने विधायकों को एक पांच सितारा होटल में भेज दिया है. यह सूत्रों के हवाले से यह खबर आयी है.
मनोहर पर्रिकर और भाजपा विधायक फ्रांसिज डिसूजा के निधन व दो कांग्रेसी विधायकों के इस्तीफे के चलते 40 सदस्यों वाली गोवा विधानसभा में अब 36 सदस्य रह गए हैं. भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने कहा है कि उसे 21 विधायकों का समर्थन है. इनमें उसके अपने 12 विधायकों के अलावा तीन-तीन विधायक गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी)महाराष्ट्र गोमंतक पार्टी (जीएमपी) से और तीन ही निर्दलीय के रूप में शामिल हैं.
यह कार्य बीजेपी मनोहर परिकर के जीवित रहते ही कर सकती थी. अब इसमें यह सफाई देना कि पर्रिकर बीजेपी के प्रिय नेतृत्व वाले व्यक्तित्व थे यह उत्तरदायी जवाब नहीं कहा जा सकता इसे प्रश्नवाचक ही माना जायेगा जिसे बीजेपी देना नहीं चाहेगी.
सच परिकर समर्पित थे;वफादार थे, किन्तु पार्टी के बाहुबली जिन्हे चिन्हित नहीं किया जा सकता है उनके पास निश्चय ही संवेदना का अभाव है यह कहना गलत नहीं है.
इस तर्क को इस बात से भी समझने की कोशिश की जाय कि बीजेपी के शीर्ष नेता में अटल बिहारी बाजपेई 2014 में जीवित थे और देश-दुनिया की बड़ी जानी पहचानी हस्तियों में थे एवं बीजेपी में उनके सम्मान का आकलन इस बात से भी लगता है कि 36 कलश में रखी हुई अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियों को उनकी मृत्यु के बाद नदियों में प्रवाहित किया गयाउनमें मध्य प्रदेश की  नर्मदाक्षिप्राताप्तीचम्बलसोनबेतवापार्वतीसिंधपेंच और केन शामिल हैं.
इसे प्रवाहित करने से पहले बीजेपी ने इनके सम्मान में कलश यात्रा का आयोजन भी किया। अब देखना यह है कि बाजपेई जी को बीजेपी ने दोबारा प्रधानमंत्री क्यों नहीं बनाया; कारण जो भी रहा है  मानवीय परिस्थितियां परिकर एवं पूर्व प्रधान मंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपाई की एक जैसी थी. दोनों परिस्थितियों में चरित्र ने कैसा महसूस किया और पार्टी के सेंसर ने कितना उनपर रहम किया यह बात दुनिया के सामने है.
इस तरह की संवेदनहीन परिस्थितियों के वातावरण में आगे का कार्य जारी है तो क्या अब लोकतंत्र परिथितिकी से इतर अंको द्वारा नियंत्रित किया जायेगा।                  
खबर के मुताबिक गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी)महाराष्ट्र गोमंतक पार्टी (जीएमपी) और निर्दलीय विधायकों को भाजपा के खेमे में लाने के लिए खुद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को काफी मशक्कत करनी पड़ी. बताया जा रहा है कि जीएमपी के सुदिन धवालिकर और जीएफपी के विजय सरदेसाई पहले मुख्यमंत्री का पद मांग रहे थे. हालांकि अब ये दोनों उप-मुख्यमंत्री बनने को राजी हो गए हैं. इसे लेकर सरदेसाई ने एनडीटीवी से कहा, ‘हम सरकार में होने के नाते चाहते हैं कि यह बची रहे. मैं इतना जरूरी कहूंगा कि यह एक नई शुरुआत है. आप कह नहीं सकते कि भविष्य में क्या होगा.
मनोहर पर्रिकर  का गोवा में जनता के मध्य संवेदनशील संबंध था  इसे यूँ  भी समझा जा सकता है कि  गोवा में कांग्रेस से भी कम सीटें होने के बावजूद भाजपा की सरकार मनोहर पर्रिकर के नाम पर ही बनी थी.
जो भी निर्दलीय विधायक और छोटी पार्टियों के विधायक भाजपा के साथ आए, उनमें से ज्यादातर की शर्त यही थी कि पर्रिकर को मुख्यमंत्री बनाया जाए. 
गोवा में भाजपा सरकार बनवाने में सबसे सक्रिय भूमिका निभाने वाले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सार्वजनिक तौर पर माना था कि मनोहर पर्रिकर को मुख्यमंत्री बनाने की शर्त सबसे पहले विजय सरदेसाई ने रखी और इसके बाद कुछ दूसरे विधायकों ने भी यही शर्त रखी. इन्हीं विधायकों के दबाव में मनोहर पर्रिकर से केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री का पद छुड़वाकर उन्हें वापस गोवा भेजा गया था.
2014 में मनोहर पर्रिकर से गोवा के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया था. उस वक्त यह बात आई थी कि प्रधानमंत्री अपनी शुरुआती टीम में ही उनको शामिल कर उन्हें दिल्ली लाना चाह रहे थे. यानी मई 2014 में. लेकिन उस वक्त मनोहर पर्रिकर तैयार नहीं हुए. लेकिन जब नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में पहली बार फेरबदल किया तो पर्रिकर केंद्र सरकार में आ गए और उनकी जगह गोवा का मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर को बनाया गया.
असल में जैसे हालात थे उनमें गोवा में मनोहर पर्रिकर का कोई ऐसा विकल्प नहीं था जो हर पक्ष को स्वीकार्य हो. केंद्रीय मंत्री श्रीपद नाइक को मुख्यमंत्री बनाने को लेकर कुछ सहयोगियों को दिक्कत थी. वहीं नाइक के आने के बाद किसी विधायक से इस्तीफा दिलाकर उन्हें छह महीने के अंदर विधानसभा के लिए निर्वाचित कराने का भी झंझट था. सूत्रों के मुताबिक 13 विधायकों वाली भाजपा लोकसभा चुनाव से पहले ऐसा कोई जोखिम लेने को तैयार नहीं थी.


पाकिस्तान ने घायल भारतीय वायुसेना के जवान की सैन्य नैतिकता से परे वीडियो प्रसारित किया


 भारत सरकार ने इस हरकत का कड़ा विरोध किया 
और सुरक्षित वापसी की मांग की  
भारत सरकार ने पाकिस्तान से भारतीय वायु सेना के पाईलट की तत्काल व सुरक्षित वापसी की मांग की है। यह पाईलट दोनो देशों के हवाई युद्ध के दौरान 1971 के बाद पहली बार पाकिस्तान द्वारा पकड़ा गया है।दोनो पड़ोसियों के मध्य संबंधो की स्थिति खराब होती जा रही हैं।
आज शाम इस विषय पर पाकिस्तानी राजदूत को डिमार्श हस्तगत कराया गया है। भारत ने अपना कड़ा विरोध जताते हुए इसे पाकिस्तान की आक्रमकता का अनुचित कार्य बताया है। भारतीय वायु हमले मे पाकिस्तानी जमीन,बालाकोट, पर चल रहे आतंकवादी कैंप को नष्ट करने के अगले दिन भारतीय सेना के सैन्य ठिकाने को पाकिस्तानी जेट द्वारा लक्षित किया गया।
भारत ने भारतीय वायुसेना के एक घायल जवान का पाकिस्तान द्वारा अभद्र प्रदर्शन का कड़ा विरोध किया एवं इसे जेनेवा समझौते एवं अन्तर्राष्ट्रीय मानव अधिकार कानून के सभी मानकों का उल्लंघन करार दिया। भारत ने साफ-साफ कहा है कि पाकिस्तान सुनिश्चित करे कि भारतीय प्रतिरक्षा जवान जो पाकिस्तानी अभिरक्षा मे है को कोई नुकसान नही होना चाहिये।
पाकिस्तान पहले तो दावा किया की इसके पास दो भारतीय पाईलट थे लेकिन इसमे संशोधन करते हुए बाद मे बताया कि एक ही पाईलट अभिरक्षा मे है। यह भी कहा है कि उनसे सैन्य नैतिकता के मानको के अन्तर्गत व्यवहार किया जा रहा है।
प्रसारित विडियो मे पाकिस्तान की ओर से दिखाया गया है कि उसके आंख मे पटट्ी बांध रखी हैवह घायल है,उसके हांथो को पीछे से बांध रखा है और उससे पूछताछ की जा रही है।
जब पाकिस्तान के ऊपर जेनेवा समझौते के उल्लंघन का आरोप लगा तो उसने इस विडियो को तुरन्त हटा दिया। बाद मे प्रसारित किया कि पाईलट यह कहते हुए कि पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी अच्छी देखभाल कर रहे हैं चाय पी रहा है. 
पाकिस्तान ने अपने बयान मे कहा है कि उसने अपनी हवाई सीमा मे नियंत्रण रेखा के पार हमले किये है, यह बदला नही है; इसमे स्थिति खराब करने का कोई इरादा नही है; किन्तु यह एक प्रदर्शन है कि यदि इसे मजबूर किया गया तो पाकिस्तान हर तरह से तैयार है
अपने उत्तर मे भारत सरकार ने कहा है कि पाकिस्तान एयरक्राफ्ट जो भरतीय ठिकाने को लक्षित कर रहा था को मारगिराने की कार्रवाई के दौरान पाईलट लापता है।