UPBIL/2018/70352

हम भी क्यों न बनायें एशियन यूनियन


आर्थिक दिक्कतों को हल करने की एक पहल 


प्रदीप कुमार सिंह ; वरिष्ठ पत्रकार
आजादी कहें या स्वतंत्रता ये ऐसा शब्द है जिसमें पूरा आसमान तथा पूरी धरती समायी है। आजादी एक स्वाभाविक भाव है या यूँ कहें कि आजादी की चाहत मनुष्य को ही नहीं जीव-जन्तु और वनस्पतियों में भी होती है।
अतीत में भारत अंग्रेजों की दासता में था, उनके अत्याचार से जन-जन त्रस्त था। खुली फिजा में सांस लेने को बैचेन भारत में आजादी का पहला बिगुल 1857 में बजा किन्तु कुछ कारणों से हम गुलामी के बंधन से मुक्त नहीं हो सके। उसके पश्चात देशभक्तों के 90 वर्ष के निरन्तर प्रयास तथा बलिदान द्वारा 15 अगस्त 1947 को हमें स्वतंत्रता की प्राप्ति हुई।
भारत की स्वतंत्रता से प्रेरणा लेकर विश्व के 54 देश अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हो गये। अन्याय तथा जोर-जबरदस्ती पर टिका अंग्रेजी शासन एक छोटे से द्वीप में सिमट गया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि कोई भी कार्य करने के पूर्व हमें यह सोचना चाहिए कि इससे समाज के अन्तिम व्यक्ति को क्या लाभ होगा? राष्ट्रपिता गांधी की यह इच्छा पूरी करने के लिए विचारशील लोगों को एक साथ मिलकर नीचे लिखे बिन्दुओं को सरकार के समक्ष रखकर इस पर कानून बनाने के लिए ध्यान आकर्षित करना चाहिए :-
1. नोबेल शान्ति पुरस्कार से सम्मानित नेल्शन मण्डेला ने कहा था कि शिक्षा संसार का सबसे शक्तिशाली हथियार है जिससे समाज को बदला जा सकता है। विश्व एकता की शिक्षा इस 21वीं सदी की सबसे बड़ी आवश्यकता है। शिक्षा के अधिकार के स्थान पर गुणात्मक शिक्षा का अधिकार अधिनियम बनाया जायें। शिक्षा के अधिकार कानून के अन्तर्गत सरकार द्वारा गरीब बच्चों को प्रतिपूर्ति का पैसा स्कूल के बैंक खाते में भेजने के बजाय गरीब छात्रों के अभिभावकों को वाउचर के रूप में देना चाहिए। ताकि अभिभावकों को इस बात की स्वतंत्रता हो कि वह अपने बच्चे को किस सरकारी या निजी स्कूल पढ़ाना चाहता है? अभिभावक प्रतिपूर्ति के रूप में मिले वाउचर को स्कूल को अपने बच्चे की फीस के रूप में दे देगा। स्कूल संचालक वाउचर को अधिकृत बैंक में उसे जमा करके फीस की धनराशि बैंक से नगद के रूप में प्राप्त कर लेगा।
2. विधायक तथा सांसद को सरकार चलाने के लिए मिलने वाले वेतन भत्ते की तरह देश के प्रत्येक वोटर को सरकार बनाने की फीस के रूप में वोटरशिप के अन्तर्गत कुछ धनराशि भुगतान करने के लिए निर्धारित की जायें। इस कानून के बनने से शत प्रतिशत वोटिंग होगी। सरकारी खजाने से कुछ धनराशि प्रत्येक वोटर को मिलने से असली लोकतंत्र का अनुभव देश की जनता को होगा। ए.टी.एम. तथा इण्टरनेट के युग में वोटर के खाते में पैसा बड़ी ही सरलता से भेजा जा सकता है।
3. वर्तमान में केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों का धन डायरेक्ट बेनिफिट ट्रान्सफर के अन्तर्गत लगभग 314 योजनाओं का पैसा बिना बिचैलियों के सीधे गरीब लाभार्थियों के खाते में पहुंच रहा है। बिचैलियों की भूमिका खत्म होने से पूरा का पूरा पैसा सीधे लाभार्थी के पास पूरी पारदर्शिता  के साथ जा रहा है। लेकिन वोटरशिप के सिद्धान्त के अनुसार यह ऊंट के मुँह में जीरा है। आर्थिक गुलामी हटाने की यह एकमात्र अचूक दवा प्रत्येक वोटर को वोटरशिप का पैसा गरीब तथा अमीर का भेदभाव किये बिना देना है। यदि किसी एक वर्ग को वोटरशिप दी जायेगी तो योग्यता का प्रमाण पत्र देने के लिए सरकारी कर्मचारियों को बिचैलियों की भूमिका में लगाया जायेगा। इस कारण से देश में भ्रष्टाचार बढ़ेगा।
4.जब हमारा देश परतंत्र था उस समय विश्व में हमारा किसी प्रकार की कोई सम्मान नहीं था। न हमारा राष्ट्रीय ध्वज था, न हमारा कोई संविधान था। भारतीय संविधान में समस्त देशवासियों को समानता का अधिकार है। हमारा संविधान आज पूरे विश्व में विश्व एकता की प्रतिबद्धता के कारण अनुकरणीय एवं अनूठा है। किसी समाज का स्वतंत्र चिन्तन, प्रगतिशीलता एवं सहिष्णुता का पैमाना संभवतः यही होता है कि वह समाज के अन्तिम व्यक्ति से किस तरह पेश आता है। देश को स्वतंत्रता मिली, उसमें बलिदान देने वाले सदा के लिए अमर हो गए। सारे विश्व को आतंकवाद तथा युद्धों से मुक्त कराने का ठीक वैसा ही समय अब पुनः हमारे सामने चुनौती बनकर खड़ा है।
5.धरती की चुनी हु वैश्विक लोकतांत्रिक व्यवस्था (विश्व संसद) बनाने के लिए अब फिर से राजनैतिक, बौद्धिक, नैतिक एवं सामाजिक क्रांति अवश्यंभावी है। उसका मोर्चा विचारशील तथा सामाजिक व्यक्ति सँभालेंगे। विश्वभर के ऐसे लोग विचारशील लोग एकत्र हो जाएँ और अपनी शक्ति तथा क्षमता के अनुरूप योगदान देने के लिए आगे आये। यह इस नये युग की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
6. स्वतंत्रता हमारे जीवन का एक मौलिक तथा अनिवार्य तत्व है। कालान्तर में स्वतंत्रता अपने देश की स्वतंत्रता के भाव तक सीमित थी। इस स्वतंत्रता का विकास अब मनुष्य की सब जगह और सब प्रकार के संकुचित बन्धनों से मुक्ति ही नहीं, बल्कि इससे भी आगे बढ़कर मानवीय व्यक्तित्व की स्वतंत्रता, विचार की स्वतंत्रता, सत्य की स्वतंत्रता बन जानी चाहिए। यह स्वतंत्रता हमारे जीवन की एक निष्ठा बननी चाहिए। हम रोटी के लिए, सत्ता के लिए, सुरक्षा के लिए, समृद्धि के लिए, राज्य की प्रतिष्ठा के लिए या किसी अन्य वस्तु के लिए इसके साथ समझौता नहीं करेंगे यह संकल्प हमारे अंदर दृढ़ होना चाहिए।
7. ध्यान देने योग्य बात यह है कि धरती की सरकार के लिए अतीत में बहुत लोगों ने प्रयत्न किये लेकिन उनमें से अधिकांश की मंशा विश्व का तानाशाह बनने की तथा दूसरे देशों को गुलाम बनाकर शोषण करने की थी। लेकिन भारत के लोगों में अतीत काल से विश्व का तानाशाह बनने की तमन्ना कभी नहीं रही। भारत की सदैव से नीति जगत गुरू के रूप में विश्व का आध्यात्मिक मार्गदर्शन करने की रही है। भारत की विश्व-भोग्या बनने की चाहत कभी भी नहीं रही, विश्वमाता की ममता रही। यहां पहले से ही धरती को माता कहा जाता रहा। भारत के बहुसंख्य लोगों की रग-रग में यह भाव बसा है। यह भाव उनके खून के कतरे- कतरे में मौजूद है। यह चेतना प्रत्येक भारतीय के जीन्स में प्रवेश करके हमारा वसुधैव कुटुम्बकम् का उदार तथा व्यापक स्वभाव बन गया है। इसलिए विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत जैसे देश के लिए विश्व का राष्ट्रीयकरण करना सबसे आसान है। लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास करने वाली पूरी दुनिया के लिए भारत एक नई आशा की किरण है! पुरानी मान्यताएं, पुरानी बातें, पुराने युग के साथ विलीन हो रही हैं। यह सारा विश्व एक बड़ा विश्वविद्यालय है। जहाँ रहकर मनुष्य को प्रकृति से प्रति क्षण कुछ नया सीखते हुए अपना शत प्रतिशत प्रयास करके समाज को अपना अर्जित अनुभव रोज के रोज लौटाना चाहिए।
8.धरती माता का हमारे ऊपर एक बड़ा ऋण है। इस नाशवान देह को छोड़ने के पूर्व जीवन की सारी पूँजी दांव पर लगाकर इस ऋण को चुकाकर जाना ही संसार की सबसे बड़ी सफलता है। बुलन्दियों पर पहुँचकर भी जो न ठहरे वह ही इतिहास बनाते हैं। एक सौ तीस करोड़ लोगों का विशाल तथा युवा भारत ही विश्व में शान्ति स्थापित करेंगा! नई सदी में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के युग का नवप्रभात हो रहा है। जिस साहस तथा बलिदान के बलबुते हमने गुलाम भारत को अंग्रेजी शासकों की गुलामी से आजाद कराकर जय हिन्द के संकल्प को साकार किया था उसी जज्बे के साथ अब आगे बढ़कर जय जगत अर्थात वैश्विक लोकतांत्रिक व्यवस्था (विश्व संसद) का गठन करना है। जो व्यक्ति ईश्वर को जान लेता है फिर उसे धरती और आकाश की कोई ताकत लोक कल्याण की राह में आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती। वसुधैव कुटुम्बकम् अर्थात जय जगत के संकल्प को समय रहते पूरा करना सबसे बड़ी विश्वव्यापी समझदारी तथा दृष्टिकोण है। यूरोप के अनेक देश दो विश्व युद्धों की विभिषका से उकता गये थे। 1993 में संधि द्वारा यूरोपियन यूनियन के आधुनिक वैधानिक स्वरूप की नींव रखी गयी थी। दिसम्बर 2007 में लिस्बन समझौता जिसके द्वारा इसमें और व्यापक सुधारों की प्रक्रिया 1 जनवरी 2008 से शुरू की गयी है।
यूरोप के 28 देशों ने विश्वव्यापी समझदारी का परिचय देते हुए अपनी यूरो मुद्रा, यूरोपियन पार्लियामेन्ट, यूरोपियन संविधान, वीसा मुक्त आवागमन की सुविधा, एक सेना आदि का गठन कर लिया। यूरो मुद्रा की ताकत अमेरिकी डालर के मुकाबले पर आने से अमेरिका घबरा गया उसने इंग्लैण्ड को यूरोपियन यूनियन से अलग होने के लिए प्रेरित किया ताकि यूरोपियन यूनियन की बढ़ती ताकत तथा समृद्धि कम हो जाये। इंग्लैण्ड के यूरोपियन यूनियन से अलग होने के बाद भी उसकी ताकत तथा समृद्धि पर कोई असर नहीं हुआ है। यूरोपीय संघ के महत्वपूर्ण संस्थानों में यूरोपियन कमीशन, यूरोपीय संसद, यूरोपीय संघ परिषद, यूरोपीय न्यायालय एवं यूरोपियन सेंट्रल बैंक इत्यादि शामिल हैं। यूरोपीय संघ के नागरिक हर पाँच वर्ष में अपनी संसदीय व्यवस्था के सदस्यों को चुनती है। यूरोपीय संघ को वर्ष 2012 में यूरोप में शांति और सुलह, लोकतंत्र और मानव अधिकारों की उन्नति में अपने योगदान के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया
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पूर्वी उत्तर प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव के प्रभारी बने अजय कुमार लल्लू


उत्तर प्रदेश कांग्रेस पार्टी की सभी जिला समितियों को तुरंत प्रभाव के साथ भंग 

ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने सोमवार को एक बड़ा फैसला करते हुए उत्तर प्रदेश में पार्टी की सभी जिला समितियों को तुरंत प्रभाव के साथ भंग कर दिया है. इसके साथ ही वहां 11 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के मद्देनजर दो सदस्यीय एक दल के गठन का फैसला भी किया है. यह दल उन सीटों की चुनावी तैयारियों और व्यवस्थाओं पर नजर रखेगा. एआईसीसी ने ये फैसले सोमवार को एक बैठक के दौरान किए गए.
इसी बैठक में कांग्रेस के विधायक दल के नेता अजय कुमार लल्लू को भी एक अहम जिम्मेदारी सौंपते हुए एआईसीसी ने उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक बदलाव का प्रभारी नियुक्त किया है. साथ ही एआईसीसी ने यह भी तय किया कि पूर्वी हिस्से की तरह प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र में भी संगठनात्मक बदलाव किया जाएगा. लेकिन इसके लिए वहां के प्रभारी के नाम पर बाद में विचार होगा.

इसके अलावा लोकसभा के बीते चुनाव दौरान आए अनुशासनहीनता के मामलों की जांच को लेकर एआईसीसी ने तीन सदस्यों की समिति गठित करने का फैसला भी किया है. इस दौरान बताया गया है कि अगले हफ्ते एक बार फिर एआईसीसी की बैठक होगी. इसमें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से पार्टी के अध्यक्ष पद पर बने रहने की अपील की जाएगी.

इससे पहले हालिया लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त को देखते हुए राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश की थी. हालांकि तब कांग्रेससहित कई दूसरी पार्टियों के आला नेताओं ने उनसे ऐसा नहीं करने की अपील भी की थी. हालांकि मीडिया में आई खबरों के मुताबिक राहुल गांधी अब भी अपने इस फैसले पर अड़े हुए हैं.

लखनऊ का सिंधी समाज अपनी संस्कृति अपने बच्चों में विकसित करना चाहता है :अनिल चंदानी




लखनऊ: सिंधी समाज के बच्चों में उनकी संस्कृति का विकास कैसे किया जाए के उद्देश्य को लेकर उत्तर प्रदेश सिंधी अकादमी द्वारा भारतीय सिंधू सभा लखनऊ के सहयोग से बालसंस्कार शिविर का उद्घाटन समारोह कृष्णा नगर स्थित लक्ष्मी निवास गेस्ट हाउस मे किया गया। उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि प्रशान्त भाटिया जो आरएसएस (अवध प्रान्त) के सह कार्यवाहक भी मौजूद रहे।
विशिष्ट अतिथि के तौर पर नानक चंद लखमानी जो के उत्तर प्रदेश सिंधी समाज के उपाध्यक्ष है की मौजूदगी के साथ ही समाज सेविका श्रीमती रिशु भाटिया भी बतौर विशिष्ट अतिथि के तौर पर इस समारोह मे उपस्थित रही।

सात दिवसीय बालसंस्कार शिविर की जानकारी देते हुए भारतीय सिंधू सभा लखनऊ के अध्यक्ष अनिल चंदानी ने बताया कि इस शिविर के द्वारा सिंधी समाज के बच्चों को सिंधी कला,लोकनृत्य,चित्रकला,खेल कूद से लेकर उनके व्यक्तित्व की भी कक्षाएं लगेंगी जो कि पूरी तरह निशुल्क होंगीं। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही शिविर में दन्त एवं नेत्र प्रक्षिक्षण भी होगा जो भी पूरी तरह निशुल्क होगा।साथ ही उनके मनोरंजन की भी कई गतिविधियां कराई जाएंगी।ये शिविर विभिन्न विद्यालय में आयोजित किया जायेगा।
इस मौके पर उपाध्यक्ष नानक चंद लखमानी ने कहा कि सिंधी समाज के उत्थान के लिए जो भी ऐसे काम करेगा तो उनकी अकादमी की तरफ से उसे हर तरह का सहयोग दिया जाएगा।

राजपुताना फाउंडेशन द्वारा विश्वभर में ठाकुरों को जोड़ने की मुहिम चालू


लखनऊ में बीती शाम राजपुताना शौर्य फाउन्डेशन द्वारा एक स्वागत समारोह कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।

इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के विभिन्न मंत्री मोती सिंह, महेंद्र नाथ सिंह, महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्य मंत्री कृपाशंकर सिंह, कांग्रेस एमएलसी दीपक , वरिष्ठ पत्रकार विजय बहादुर सिंह, पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह, जस्टिस आलोक सिंह, यूपी खेल निदेशक आरपी सिंह के साथ और कई राजपूत शामिल हुए।

राजपुताना शौर्य फाउंडेशन एक गैर राजनीतिक संगठन है जो राजपूत समाज के लोगो की मदद देश और विदेश में करती है। 
यह फाउंडेशन पिछले 5 वर्षों से अपने कार्य लगा हुआ है और यह भारत के साथ साथ लगभग 80 देशों के राजपूतो से जुड़ चुका है।
राजपुताना शौर्य फाउन्डेशन के इस कार्यक्रम के मौके पर रोजगार मेले का भी आयोजन किया गया जिसमें लगभग 100 युवाओ को रोजगार दिया गया वही अपने 10 सूत्रीय कार्यक्रम के चलते कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार, शादी विवाह के कार्यक्रमो के बारे में चर्चा की गई।
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प्रदेश में गुण्डा राज की कमान योगी जी के हाथ में:कांग्रेस



अखिलेश श्रीवास्तव 
आज मंगलवार रायबरेली की सदर विधायक अदिति सिंह जिला पंचायत कुछ सदस्यों के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव में वोट देने के लिए लखनऊ से रायबरेली की तरफ जा रहीं थीं, इसी दरम्यान लखनऊ रायबरेली के बीच में पड़ने वाले टोल प्लाजा के पास जिला पंचायत अध्यक्ष अवधेश सिंह के कॉलेज महावीर इंस्टीट्यूट के सामने पहले से घात लगाकर बैठे गुण्डों ने इस काफिले पर अस्लहों, ईंटपत्थर एवं अन्य जानलेवा हथियारों से हमला कर लिया। गुण्डों की तरफ से कइई राउण्ड फायरिंग की गयी और जमकर ईंट पत्थर फेंके गये जिससे कांग्रेस विधायक अदिति सिंह व जिला पंचायत सदस्य और कांग्रेस के  कार्यकर्ता बुरी तरह घायल हो गये, गाड़ियाँ अनियंत्रित होकर रोड़ पर पलट गयीं।

कांग्रेस विधायक सदर रायबरेली जिनके काफिले पर हमला किया गया 

कांग्रेस विधान मण्डल दल के नेता अजय कुमार ‘लल्लू‘ ने आरोप लगाते हुए कहा उक्त कृत्य योगी सरकार के इशारे एवं सह पर जिला पंचायत अध्यक्ष अवधेश सिंह ने करवाया है। 

 उन्होंने कहा कि यह अपराधियों को शरण देने वाली सरकार की पोल खुल गयी है कि अब विधायक पर सरकार समर्थित गुण्डे दिन दहाड़े जानलेवा हमला कर सकते हैं, तो आम आदमी की सुरक्षा कैसे सम्भव है ? 

प्रदेश में चारों तरफ अराजकता व्याप्त हैं। लूट-खसोट, हत्या और जानलेवा हमला करके विपक्षी पार्टियों के कार्यकर्ताओं और नेताओं पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। 

2019 की आम चुनाव में हार की बौखलाहट के कारण भाजपा गुण्डागर्दी पर उतारू हो गयी है। 

उन्होंने माँग करते हुए कहा कि विधायक अदिति सिंह पर हुए जानलेवा हमले के आरोपी अवधेश सिंह सहित तमाम गुण्डों की तुरन्त गिरफ्तारी की जाये तथा विधायक को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करायी जाए अन्यथा कांग्रेस पार्टी प्रदेश व्यापी आंदोलन करेगी।

युवाओं को रोजगार का सपना दिखया गया पर उन्हें मिला कुछ नहीं:डिम्पल यादव


छठवे चरण के मतदान के लिए प्रचार के अंतिम दिन शुक्रवार को  इलाहाबाद और फूलपुर में गठबंधन के पक्ष में सांसद श्रीमती डिम्पल यादव तथा राज्यसभा सदस्य श्रीमती जया बच्चन ने 14 किलोमीटर रोड-शो किया।

इस रोड-शो में दोनों लोकसभा क्षेत्रों के हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए। उत्साही कार्यकर्ताओं के अलावा जनता की भारी भीड़ को देखकर डिम्पल एवं जया बच्चन ने हाथ हिलाकर उनका अभिवादन किया।
 
 यह रोड-शो पीडी टंडन पार्क स्थित डाॅ0 राममनोहर लोहिया की मूर्ति पर माल्यार्पण से शुरू होकर सुभाष चौक, पत्थर गिरजाघर, नवाब यूसुफ रोड से ओवर ब्रिज, रेलवे स्टेशन चैराहा, खुल्दाबाद थाना, नूरउल्ला रोड, अटाला चैराहा, अतरसुइया, यूइंग क्रिश्चियन कालेज, गौघाट चैराहा, आर्यकन्या विद्यालय होते हुए पायल सिनेमा बैरहना चौराहे पर समाप्त हुआ। इस रास्ते को पार करने में 5 घंटे से ज्यादा का समय लगा। 
 इस रोड-शो का नेतृत्व कर रही  डिम्पल यादव एवं  जया बच्चन का जगह-जगह पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया। घरों के छज्जों पर खड़ी महिलाओं ने उन पर खूब फूल बरसाए। सड़क के किनारे भीड़ में स्त्री-पुरूष, छात्र, नौजवान, अधिवक्ता, प्रोफेसर तथा बुजुर्ग भी थे तो बुर्के में मुस्लिम महिलाएं भी बड़ी तादाद में दिखाई दे रही थी।
 सांसद डिम्पल यादव एवं जया बच्चन ने इलाहाबाद लोकसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी श्री राजेन्द्र सिंह पटेल और फूलपुर लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी श्री पंधारी यादव को विजयी बनाने की मतदाताओं से अपील की। 

डिम्पल यादव ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा कि भाजपा की पांच साल की सरकार ने गरीबों, किसानों, नौजवानों और महिलाओं के लिए कुछ भी नहीं किया। युवाओं को रोजगार का सपना दिखया गया पर उन्हें रोजगार नहीं मिला।
जया बच्चन, राज्यसभा सदस्य ने कहा कि इलाहाबाद से उनका पुराना पारिवारिक रिश्ता रहा है। उन्होंने समाजवादी पार्टी और गठबंधन के सभी प्रत्याशियों को जिताने की अपील की। 

       

पांच करोड़ महिलाओ को 3.6 लाख रूपये पांच साल में भेजे जायेंगे: प्रियंका गांधी

 पांच करोड़ महिलाओ को तबतक 72 हजार रूपये सालाना दिया जाता रहेगा जबतक उनकी आमदनी 12 हजार रूपये प्रतिमाह नहीं हो जाती: प्रियंका गांधी

RB SINGH: PRATAPGARH
कांग्रेस की महासचिव एवं पूर्वी उ0प्रकी प्रभारी श्रीमती प्रियंका गांधी ने आज प्रतापगढ़ में कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती रत्ना सिंह व जौनपुर में कांग्रेस प्रत्याशी श्री देवब्रत मिश्रा के पक्ष में आयोजित विशाल चुनावी जनसभाओं को सम्बोधित किया। इसके उपरान्त सुलतानपुर पहुंचकर कांग्रेस प्रत्याशी डाॅसंजय सिंह के पक्ष में ऐतिहासिक रोड शो कर व्यापक जनसम्पर्क करते हुए कांग्रेस प्रत्याशियों को विजयी बनाने की अपील की। 
श्रीमती प्रियंका गांधी ने आज प्लाजा पैलेसप्रतापगढ़ में कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती रत्ना सिंह के पक्ष मंे आयोजित विशाल चुनावी जनसभा को सम्बोधित किया।

इसके उपरान्त अपरान्ह बदलापुरजौनपुर में कांग्रेस प्रत्याशी श्री देवब्रत मिश्रा के पक्ष में विशाल चुनावी जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणापत्र में न्याय योजना की घोषणा की है जिसके माध्यम से हर गरीब महिला के खाते में 72 हजार रूपये सालाना अर्थात 3.6 लाख रूपये पांच साल में भेजे जायेंगे। 
इस योजना के अन्तर्गत पांच करोड़ महिलाएं आयेंगी और यह पैसा उनको तब तक दिया जाता रहेगा जबतक उनकी आमदनी 12 हजार रूपये प्रतिमाह नहीं हो जाती।
उन्होने कहा कि भाजपा सरकार में जब शिक्षा मित्रआंगनबाड़ी कार्यकत्रीअनुदेशक और आशा बहू अपनी पीड़ा बताने और अपनी मांगों को लेकर सरकार तक अपनी बात पहुंचाने गयी थीं तो उनकी नहीं सुनी गयी और उन पर लाठीचार्ज किया गया और मारा-पीटा गया।
किसानों का बकाये गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया गयाजिससे किसान परेशान हैं। देश भर के किसान अपनी मांगों को लेकर प्रधानमंत्री से मिलना चाहते थे किन्तु प्रधानमंत्री जी किसानों से नहीं मिले। 
पांच साल में 12 हजार किसानों ने आत्महत्या की। मोदी जी किसानों को बिजली देने के लिए नारा देते थे और आज किसानों को बिजली का बिल बढ़ा-चढ़ाकर दिया जा रहा है जिससे किसान परेशान हैं।
सायं सुलतानपुर पहुंचकर प्रियंका गांधी ने कांग्रेस प्रत्याशी डाॅसंजय सिंह के पक्ष में दरियापुर तिराहा से रोड शो का शुभारम्भ कर जमाल गेट से मामधारी की दुकान के सामने से होते हुए गुरूद्वारा के सामनेबाघमण्डी चौराहागांधी नगर स्कूलराहुल चौराहालाला का पुरवानार्मल चौराहा होते हुए लाल डिगीबाबा मेडिकल स्टोरडाकखाना चैराहागन्दा नालागल्ला मंडी चौराहाअस्पताल तिराहासब्जी मंडीमाल गोदाम होते हुए गंगा गार्डेन तक रोड शो कर व्यापक जनसम्पर्क करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी डाॅसंजय सिंह को विजयी बनाने की अपील की। 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल धर्म की वेदी पर अपने राजनीतिक अस्तित्व के बारे में चिंतित है:डा मनमोहन सिंह


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से बाहर का दरवाजा दिखाने का समय आ गया है डा मनमोहन सिंह पीटीआई को रविवार को दिये अपने साक्षात्कार मे कहा
डा सिंह ने अपने इस वक्तव्य के तर्क मे कहा की मोदी के सत्ता मे पांच वर्ष भरत के युवाओं, किसानों, व्यापारियों और हर लोकतांत्रिक संस्थान के लिए सबसे दर्दनाक और विनाशकारी रहे हैं।
 डॉ सिंह कहते है कि मोदी पक्ष में लहर है की धारणा को खारिज करता हूं क्योंकि लोगों ने सरकार को वोट न देने के लिए अपना मन बना लिया है इसका मूल कारण समावेशी विकास में इनका विश्वास न होकर, केवल यह चिंतित हैं धर्म की वेदी पर अपने राजनीतिक अस्तित्व के बारे में
डा़ सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी की दूरंदेशिता पर एक बडा़ आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षो में भ्रष्टाचार की बदबूको अकल्पनीय अनुपातके रूप में देखा गया -उन्होने विमुद्रीकरण को स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा घोटालाकहा।
संयोग से, 2014 के चुनावों में भाजपा अभियान सिंह के नेतृत्ववाली-यूपीए सरकार के 10 साल के कार्यकाल के दौरान हुए 2-जी स्पेक्ट्रम और कोयला ब्लॉक के आवंटन सहित विभिन्न कथित घोटालों पर केंद्रित था।
पूर्व प्रधानमंत्री ने श्री मोदी की पाकिस्तान नीति को बेपरवाहभी कहा, उन्होंने कहा कि अनगिनत गल्तियों जब वह बिना किसी निमंत्रण के धूर्त आई एस आई को पठानकोट एयरबेस पर आतंकियों के हमले की जांच के लिये बुलाया द्वारा स्थिति बिगड़ गई।
डॉ। सिंह, जिन्हें 1990 के दशक में भारत के आर्थिक सुधारों के वास्तुकार के रूप में जाना जाता है, ने महसूस किया कि देश मंदी की ओर अग्रसर है और मोदी सरकार पर देश की अर्थव्यवस्था को गंभीर तंगीमें डालने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि लोग मौजूदा बयानबाजी, भाषणकला और अंगराग के बदलाव एवं वर्तमान दूरंदेशिता से तंगहै और इस भ्रम और घमंडपूर्ण आत्म-अभिनंदनके खिलाफ एक अंतर्धारा पनप रही है।
इस चुनाव में राष्ट्रवाद और आतंकवाद के मुद्दों पर भाजपा के फोकस का मुकाबला करने के लिए, पूर्व प्रधानमंत्री ने श्री मोदी की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि यह नोट करना ’’ परेशान करने वाला ’’ है कि श्री मोदी 40 सीआरपीएफ पुलवामा  के जवान मारे गए के हमले के तत्काल बाद सुरक्षा पर कैबिनेट कमेटी (सीसीएस) की किसी भी बैठक की अध्यक्षता करने के बजाय जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में ’’ फिल्मांकन ’’ कर रहे थे
उन्होंने दावा किया कि पुलवामा में सकल खुफिया विफलताथी और यह तथ्य ही आतंक से निपटने के लिए सरकार की तैयारियों के बारे में छुपा हुआ सच बोलती है।
 यह मत भूलें कि पूर्व प्रधानमंत्री ने श्री मोदी की पाकिस्तान नीति बेपरवाहहै, उन्होंने कहा कि अनगिनत गल्तियों जब वह बिना किसी निमंत्रण पाकिस्तान गये और धूर्त आई एस आई को पठानकोट एयरबेस पर आतंकियों के हमले की जांच के लिये बुलाया द्वारा स्थिति बिगड़ गयी - क्या यह राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर मोदी सरकार की रणनीतिक विफलताओं के बारे में नहीं बोलता है।
डॉ। सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर मोदी सरकार का रिकॉर्ड "निराशाजनक" है क्योंकि आतंकवाद की घटनाओं ने क्वांटम छलांग देखी है।
मोदी के राष्ट्रवाद के पट पर पर कहा गया, “एक झूठ को सौ बार बोलने पर वह सच नहीं हो जाता,“ यह कहते हुए कि पिछले पाँच वर्षों में जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों में 176 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और पाकिस्तान के साथ सीमा पर संघर्ष विराम उल्लंघन 1,000 प्रतिशत बढ़ा है।
फूट एवं घृणा भजपा के समनार्थी हो गये है, जो समाजिक दुराव को फैला रहे हैं
बैंक घोटाला करके देश छोड़ने वाले घोटालेबाजों का राजनेजिक पदों पर आसीन लोगों के बीच आपसी तिलीभगत अवश्य रही है।
डॉ। सिंह ने कहा कि भाजपा का "राजनीतिक संकट" अपने "असफल ट्रैक रिकॉर्ड" से निकलता है और दावा किया कि पार्टी हर रोज़ नई कथाएँ खोज रही है। "यह देश के लिए एक राष्ट्रीय सुरक्षा दृष्टि के दिवालियापन को दर्शाता है।"
 “मोदी सरकार के पांच साल शासन और जवाबदेही की विफलता की दुखद कहानी है। वर्ष 2014 में, मोदीजी ने अच्छे दिन आ गयेके वादे पर सत्ता में आए, उनका पांच साल का शासन भारत के युवाओं, किसानों, व्यापारियों, व्यवसायों और हर लोकतांत्रिक संस्था के लिए सबसे दर्दनाक और हानिकारक हो गया है,” उन्होंने कहा।
 “हमारे सामाजिक-राजनीतिक माहौल ने सामंजस्य खो दिया है। लोग प्रसाधित परिवर्तन के लिये दैनिक ज़ोरदार बयानबाजी से तंग आ चुके हैं। जनता के बीच गहरी निराशा और मोहभंग की भावना है। मोदी सरकार और भाजपा को अस्वीकार करने के लिए लोगों ने अपना मन बना लिया है ताकि भारत का भविष्य सुरक्षित और सुरक्षित हो, ”डॉ। सिंह ने कहा।
पूर्व प्रधान मंत्री ने कहा कि एक व्यक्ति भारत जैसे विविध देश में एक व्यक्तिकी विचार प्रक्रिया और इच्छा को लागू करके लोगों की आकांक्षाओं और आशाओं के साथ कोई न्याय नहीं कर पायेगा।
 “भारत में प्रतिनिधित्व बहुत महत्वपूर्ण है। एक अकेला आदमी न तो भारत के 130 करोड़ लोगों की सभी इच्छाओं का प्रतिनिधित्व कर सकता है और उनके द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं का समाधान भी नहीं कर सकता है। यह आइ्रडिया एक व्यक्ति को ज्ञान के एकेश्वर के रूप में भारत में लागू नहीं किया जा सकता है,” यह विचार, उन्होंने, क्या राष्ट्रपति का चुनाव लोकतंत्र के लिए अच्छा है, पर रखे।
विदेश नीति पर, उन्होंने कहा कि भारत हमेशा राष्ट्रीय हितों के लिए तत्पर रहा है न कि किसी व्यक्ति की छवि निर्माणके लिए।

विदेश नीति गंभीरता“, कूटनीति और संयम की भावना, मेजबान राष्ट्र की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता और अंततः भारत के हितों को आगे बढ़ाती है, लेकिन अफसोस की बात है, इस सरकार की विदेश नीति की स्थापना  परिपक्व कूटनीति की समझ के छोड़कर किसी अन्य चीज पर आघारित हैकुछ नहींउन्होने कहा।