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जनसहयोग केंद्र की तरह अब प्रदेश मंत्री जनता दर्शन लगाएंगे: राजेन्द्र प्रताप सिंह कैबिनेट मंत्री


लखनऊ 09 अक्टूबर 2018, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में मंगलवार को जन सहयोग केन्द्र में जनता की समस्याओं के निराकरण के लिए कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र प्रताप सिंह उर्फमोती सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों से आये लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों को दिशा निर्देश दिये तथा पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि जनसहयोग केन्द्र की भांति ही प्रदेश के सभी मंत्री द्वारा जनता दर्शन की भी व्यवस्था की गई है। जिससे प्रदेश की जनता को लाभ उचित न्याय मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि जन सहयोग केन्द्र पर अधिकतर जिनके कार्य जनपद स्तर से होकर प्रदेश स्तर से होने है वे ही अपना पक्ष लेकर आते है जिन पर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सम्मनित जनता जो भी प्रदेश के विभिन्न जिलों से यहा आती है सरकार पार्टी की नीति दिये गये दिशा निर्देश के अनुरूप उनकी बात सुनकर जल्द से जल्द समाधान उचित कार्यवाही चाहे वह पत्र के माध्यम से अधिकारी को कार्यवाही करने की बात हो चाहे फोन के माध्यम से जररूत पड़े हर तरह के सरकार के सभी मंत्रीगण जनता दर्शन के माध्यम से पार्टी अपने पदाधिकारियों जनसहयोग केन्द्र के द्वारा उसे हल कर आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की नीति जनकल्याण का कार्य सर्वप्रथम के संकल्प को लेकर आगे बढ़ रहे है। इसी के तहत आज जितने भी लोग जनसहयोग केन्द्र में आये सभी संतुष्ट होकर अपने गृह जिले गये है तथा अधिकारियों को यह भी कहा कि जल्द से जल्द समस्या का निवारण किया जाये। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष डा0 राकेश त्रिवेदी उपेन्द्र शुक्ला भी जनता की समस्याओं का निराकरण करने में सहयोग किया।


पुलिस को आधार की सूचना पर यूआईडीएआई कहा: डेटा का इस्तेमाल आपराधिक जांच में नहीं किया जा सकता है.

पुलिस को आधार की सूचना पर यूआईडीएआई कहा: डेटा का इस्तेमाल आपराधिक जांच में नहीं किया जा सकता है.

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भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने कहा है कि आधार अधिनियम के तहत आधार की बॉयोमेट्रिक जानकारी (डेटा) का इस्तेमाल आपराधिक जांच में नहीं किया जा सकता है.

यूआईडीएआई का यह बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने अपराध पकड़ने के लिए पुलिस को आधार की सूचनाओं की सीमित उपलब्धता की बातें की थी.

प्राधिकरण की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि आधार की सूचनाएं कभी भी किसी आपराधिक जांच एजेंसी के साथ साझा नहीं की गई हैं.

यूआईडीएआई ने कहा, 'आधार अधिनियम 2016 की धारा 29 के तहत आधार जैविक सूचनाओं का इस्तेमाल आपराधिक जांच के लिए स्वीकृत नहीं है. अधिनियम की धारा 33 के तहत बेहद सीमित छूट दी गई है. इसके तहत राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रकरण होने पर आधार की जैविक सूचनाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन यह भी सिर्फ तभी संभव है जब मंत्रिमंडलीय सचिव की अध्यक्षता वाली समिति इसके लिए प्राधिकरण को अनुमति दे चुकी हो.

उसने कहा , 'उच्चतम न्यायालय में आधार मामले की चल रही सुनवाई में भी भारत सरकार का यह लगातार पक्ष रहा है.'

प्राधिकरण ने आगे कहा कि उसके द्वारा जमा की गई जैविक सूचनाओं का इस्तेमाल मात्र आधार बनाने तथा आधारधारक के सत्यापन के लिए की जा सकती है. इसके अलवा किसी भी अन्य उद्देश्य के लिए इनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है.